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अभी-अभी : मोदी के खिलाफ कोंग्रेसी दलालों की बड़ी साजिश का खुलासा, यूपी पुलिस ने किया पर्दाफ़ाश

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नई दिल्ली : चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस और उनके दलाल किस हद तक गिर सकते हैं, इस बात का अंदाजा आपको ये हैरतअंगेज खबर पढ़कर हो जाएगा. यूपी चुनाव से पहले सपा नेताओं ने गुजरात के लोगों को गधा तक कह डाला था. अब गुजरात चुनाव में एक बार फिर गधों का सहारा लेकर कांग्रेस चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस के दलाल माने जाने वाले एनडीटीवी ने बीजेपी सरकार का मजाक उड़ाते हुए झूठी खबर वायरल कर दी कि यूपी पुलिस ने गधों को चार दिनों के लिए जेल में डाल दिया, मगर यूपी पुलिस ने तुरंत इनकी अक्ल ठिकाने लगा दी.


आकाओं की मदद के लिए झूठी ख़बरें छाप रहा एनडीटीवी

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में जेल प्रशासन ने गधों के एक समूह को हिरासत में ले लिया था. इस रिपोर्ट के मुताबिक़ उरई में हिरासत में लिए गए इन गधों ने जिला जेल के बाहर लगे पेड़ों को नुकसान पहुंचाया था, जिसके बाद जेल प्रशासन के कर्मचारी इन्हें पकड़कर ले आए.

हालांकि ये खबर पूरी तरह से झूठी और बकवास थी, मगर फिर भी बिना सच्चाई की पड़ताल किये कई मीडिया चैनलों व् अखबारों ने प्रमुखता से इस खबर को चलाया और बीजेपी सरकार पर खूब कीचड उछाला गया. कोंग्रेसी दलालों की पूरी कोशिश थी कि किसी तरह इस मुद्दे को लेकर मोदी को घेर लिया जाए और गुजरात चुनाव को प्रभावित किया जाए.

यूपी पुलिस ने दी चेतावनी

मगर यूपी पुलिस ने तुरंत घटना का संज्ञान लेते हुए जांच की और पाया कि पूरी खबर कोरी बकवास है और यूपी पुलिस ने किसी गधे को नहीं पकड़ा है. जिसके बाद एनडीटीवी को फटकार लगाते हुए यूपी पुलिस ने आगे से जांच करके रिपोर्ट छापने के लिए कहा.

मगर बदतमीजी की इंतहां देखिये कि गलती पकडे जाने पर भी एनडीटीवी ने माफ़ी नहीं मांगी. माफ़ी मांगना तो दूर, उलटा यूपी पुलिस को ही नसीहत देते हुए कह दिया कि ये रिपोर्ट उनके बारे में है ही नहीं. वहीँ देश की जनता इस झूठी खबर और मोदी के खिलाफ मीडिया के एक वर्ग द्वारा किये जा रहे षड्यंत्र को देख बुरी तरह भड़क उठे.

ट्विटर व् फेसबुक पर लोगों ने एनडीटीवी को जी-भर कर कोसा. लोगों ने ट्वीट करके कहा कि मीडिया जितनी झूठी ख़बरें चलाएगा, मोदी उतना ही आगे बढ़ेगा. वहीँ कुछ लोगों ने एनडीटीवी पत्रकारों को अफवाह फैलाने के लिए जेल भेजे जाने तक के लिए कहा.

बता दें कि एनडीटीवी सदा ही देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहा है. इससे पहले भी आतंकवादियों की मादा करने के आरोप के चलते सरकार ने इस चैनल को एक दिन के लिए बैन करने का फैसला लिया था, मगर तब सभी वामपंथी पत्रकार उसके समर्थन में आकर घड़ियाली आंसू बहाते हुए उसे प्रेस की आजादी पर ख़तरा बताने लगे थे.

मगर ये साफ़ है कि एक पार्टी के खिलाफ एजेंडा चलाने वाले ऐसे डिज़ाइनर पत्रकार अपने आकाओं को चुनाव में जीत दिलाने के लिए झूठी, फर्जी ख़बरें छापने से भी संकोच नहीं करते हैं. ऐसे में इनके द्वारा छापी गयी किसी भी खबर का विशवास करना मुश्किल हो जाता है.


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