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“प्रभु” से खफा हो गए पीएम नरेंद्र मोदी… बोले…”पटरी पर आओ, वरना सुधार दूंगा” !

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नई दिल्ली : प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी देश के विकास के लिए रात-दिन पूरी ताकत से काम करने में लगे हुए हैं. पीएम मोदी की सबसे ख़ास बात ये भी है कि उनका काम एकदम लाजवाब होता है, कहीं कोई कोर-कसर वो नहीं छोड़ते. ऐसी ही उम्मीद वो अपने मंत्रिमंडल और अधिकारियों से भी करते हैं कि उन्हें जो भी काम दिए जाएँ वो तय समय पर ठीक तरह से पूरे हों. आमतौर पर हँसी-मजाक करते हुए दिखने वाले पीएम मोदी के बारे में कहा जाता है कि यदि काम में कोई लापरवाही दिखती है तो वो सख्ती से भी पेश आते हैं. अभी-अभी आयी खबर के अनुसार इस बार पीएम ने अपने ही एक मंत्री पर सख्ती दिखाई है.

रेलवे के काम-काज की रफ़्तार धीमी?

सुरेश प्रभु की काबिलियत को ध्यान में रखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें केंद्रीय रेल मंत्री का पद दिया. रेल मंत्री के रूप में सुरेश प्रभु ने काफी अच्छा काम भी किया, जिसकी लोगो ने काफी तारीफ़ भी की. देश में पहली बार लोग सिर्फ एक ट्वीट करते हैं और रेलवे अधिकारी फ़ौरन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए पहुच जाते हैं. लेकिन लगता है कि रेलवे के अधिकारी रेलवे के विकास कार्यों में थोड़ी सुस्ती बारात रहे हैं. खबर आयी है कि इस सिलसिले में प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से रेल मंत्रालय को चिट्ठी भेजी गयी है. इस चिट्ठी में रेलवे के विकास कार्यों की धीमी रफ़्तार के बारे में आगाह किया गया है.

प्रधानमंत्री मोदी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्र ने ये चिट्ठी रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल को लिखी है. इस चिट्ठी में उन्होंने आगाह किया है कि रेलवे में किये जा रहे कामों की रफ्तार थोड़ी धीमी है और इसे बढ़ाने की जरुरत है. इस चिट्ठी में हाल ही में हुए रेल हादसों पर भी चिंता व्यक्त की गयी है. चिट्ठी के जरिये चेताया गया है कि रेलवे बोर्ड ने बीते दो साल के दौरान खुद के लिए जो लक्ष्य तय किए थे उन्हें वो अब तक पूरी तरह से हासिल नहीं कर सका है.

धीमी रफ़्तार पर पीएमओ सख्त

चिट्ठी में कहा गया है कि रेलों में सुविधाओं के आधुनिकीकरण का काम भी सुस्त रफ़्तार से चल रहा है, इसके अलावा रेल लाइन का दोहरीकरण और इलेक्ट्रिफिकेशन की रफ्तार भी थोड़ी धीमी है. चिट्ठी में रेल मंत्रालय से ये भी पूछा गया है कि बीते 2 वर्षों में रेलवे को दिए जाने वाले फंड में काफी इजाफा किया गया है फिर भी काम करने की रफ़्तार और तेज क्यों नहीं हुई?

प्रधानमन्त्री कार्यालय की ओर से भेजी गयी इस चिट्ठी में अब तक के हुए कामों के बाकायदा आंकड़े भी दिए गए हैं. इसके मुताबिक़ दिसंबर 2016 तक 531 किलोमीटर रेल लाइन का दोहरीकरण किया गया जबकि इसका लक्ष्य 1600 किलोमीटर रखा गया था. इसी तरह अब तक 1210 किलोमीटर रेल लाइन का इलेक्ट्रिफिकेशन हुआ है जबकि इसका लक्ष्य 2000 किलोमीटर रखा गया था. चिट्ठी में रेलवे बोर्ड से काम की रफ़्तार बढ़ाने की उम्मीद भी की गयी है.

रेलवे अधिकारी आये हरकत में

बेहद सख्त भाषा में लिखी इस चिट्ठी के आने से रेलवे बोर्ड के आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया है. रेल मंत्री सुरेश प्रभु लगातार रेलवे बोर्ड के अधिकारियों और अलग-अलग रेलवे जोन के महाप्रबंधकों के साथ बैठक करके रेलवे के सभी विभागों के कामों की समीक्षा कर रहे हैं. प्रभु को पता है कि प्रधानमन्त्री कार्यालय से आयी शिकायत को पूरी गंभीरता से लेकर उसे जल्द से जल्द ठीक करना बेहद जरुरी है वरना खुद उनकी साख पर प्रश्न उठेंगे.

हालाकि कुछ रेलवे अफसरों के मुताबिक़ उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है, उनके मुताबिक रेलवे का अधिकतर काम अक्टूबर से लेकर मार्च के बीच पूरी तेजी से होता है, जिसके आंकड़े अभी तक नहीं आये हैं. मार्च के आंकड़े आते ही पीएमओ को पता चल जाएगा कि सारे काम तय वक़्त के अनुसार किये जा चुके हैं. खैर इससे ये बात तो पता चलती है कि पीएम मोदी अपने काम के प्रति कितना गंभीर हैं और अपने हर मंत्री के कामों पर बराबर नज़र रखते हैं कि हर काम पूरे अनुशासन से हो.

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