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महिलाओं की मांग के आगे झुका मुस्लिम लॉ बोर्ड, देश की राजनीति में खलबली, ओवैसी, आजम सन्न

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नई दिल्ली : पिछले काफी वक़्त से देश में ट्रिपल तलाक और बहुविवाह का मुद्दा गर्माया हुआ है. मुस्लिम महिलाओं की मांग है कि ट्रिपल तलाक को ख़त्म किया जाए और उनके मूलभूत नागरिक अधिकारों की रक्षा की जाए. मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुच चुका है लेकिन मुस्लिम संगठनों के विरोध के चलते अब तक समाधान नहीं निकल पाया था. लेकिन अब ट्रिपल तलाक को लेकर एक बड़ी खुशखबरी सामने आयी है, जिससे मुस्लिम महिलाओं में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी है.


खत्म होगा ट्रिपल तलाक कानून !

दरअसल ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड के वाइस-प्रेसीडेंट डॉक्टर सईद सादिक ने ट्रिपल तलाक को ख़त्म करने की बात कही है. उन्होंने कहा है कि वो अगले 18 महीनों में ट्रिपल तलाक को ख़त्म कर देंगे. इसके साथ-साथ उन्होंने कहा कि ट्रिपल तलाक को लेकर सरकार के हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है.

ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड की ओर से ये बयान बोर्ड के उस दावे के दो दिन बाद आया है, जिसमे कहा गया था कि देश की 3.5 करोड़ मुस्लिम महिलाओं ने शरीयत और ट्रिपल का समर्थन किया है. बोर्ड की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया था कि ट्रिपल तलाक को चुनौती देने वाली याचिकाएं सुनवाई योग्‍य ही नहीं है क्योंकि ये न्‍यायपालिका के दायरे में ही नहीं आतीं. बोर्ड की ओर से कहा गाय था कि कुरान पर आधारित कानूनों को संविधान के नियमों के आधार पर परखा जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, महिलाओं के शोषण का जरिया !

वहीँ सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक, निकाह हलाला और बहु विवाह को मुस्लिम महिलाओं के सामाजिक स्तर और गरिमा को प्रभावित करने वाला बताते हुए कहा था कि इनकी वजह से मुस्लिम महिलाएं संविधान के मूलभूत अधिकारों से वंचित रह जाती हैं.


वहीँ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने ताजा अभिवेदन में अपने पिछले रुख को दोहराते हुए कहा कि ये प्रथाएं मुस्लिम महिलाओं को अपने समुदाय के पुरुषों के मुकाबले व् अन्य समुदायों की महिलाओं के मुकाबले आसमान व् कमजोर बनाती हैं.

ट्रिपल तलाक के खिलाफ उपराष्‍ट्रपति की पत्‍नी !

कुछ दिन पहले उपराष्‍ट्रपति हामिद अंसारी की पत्‍नी सलमा अंसारी ने भी ट्रिपल तलाक के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी. उन्होंने कहा था कि सिर्फ तीन बार तलाक कह देने भर से तलाक नहीं हो जाता है. यहां तक कि उन्होंने मुस्लिम महिलाओं से ये तक कहा कि वो मौलवियों की बातें मानने के बजाय कुरआन को ठीक से पढ़ें.

उन्होंने कहा था कि कुरान में इस तरह का कोई नियम नहीं है. ये सब मौलवियों ने अपने मन से बनाया है. उन्होंने महिलाओं से कहा कि वो अरबी कुरान को पढ़ें न कि उसके अनुवाद को. उन्होंने कहा कि मौलाना ओर मुल्‍ला ने जो कहा, उसे महिलाओं ने चुपचाप मान लिया, इसकी जगह उन्हें खुद कुरान और हदीस पढ़ना चाहिए.


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