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भारत पर आग उगलने वाले चीन की भी टूटी कमर, सुपर पॉवर ने दिया ऐसा झटका कि लड़खड़ा गए जिनपिंग

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नई दिल्ली : चीन के साथ भारत भले ही कितना भी भाई-चारा बनाये रखे लेकिन कड़वा सच तो यही है कि चीन ने अपने फायदे के लिए बार-बार भारत की पीठ में छुरा भोंका है. चाहे 1962 का युद्ध हो, या फिर पाकिस्तानी आतंकियों का साथ, चाहे भारत की एनएसजी की सदस्यता हो या फिर अरुणाचल प्रदेश का मुद्दा, चीन ने अपने निजी स्वार्थ के आगे कभी किसी भी देश की परवाह नहीं की. हालांकि भारत के साथ रेस में लगे चीन को फिर भी कुछ ख़ास फायदा होने की जगह उलटा नुक्सान ही उठाना पड़ रहा है.


भारत पर आग उगलने वाले ड्रैगन की टूटी कमर

विस्तारवादी रवैय्ये के साथ आगे बढ़ रहे चीन को बुरी तरह झटका लगा है, अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने बुधवार को चीन की क्रेडिट रेटिंग घटाकर एए3 से ए1 कर दी है और इसका कारण चीन पर बढ़ते कर्ज को बताया है. दरअसल चीन ने विकास की अंधी दौड़ में भारी मात्रा में कर्जा लिया हुआ है. अमेरिकी एजेंसी द्वारा पिछले पांच सालों में पहली बार चीन की रेटिंग में कटौती की गई है.

साथ ही मूडीज ने चेतावनी दी है कि भविष्य में चीन की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से लड़खड़ाने वाली है और इसके चलते चीन पर कर्ज और बढ़ सकता है़ं. एजेंसी ने चीन की स्थानीय मुद्रा की दीर्घकालिक और विदेशी मुद्रा इश्यू रेटिंग को एए3 से घटाकर ए1 कर दिया है. मूडीज के मुताबिक़ चीन की अर्थव्यवस्था के कमजोर होने से निवेश हेतु लिए जानेवाले कर्ज में वृद्धि होगी.

गिर रही है चीन की विकास दर

मूडीज के मुताबिक़ यह डाउनग्रेड चीन की वित्तीय ताकत में गिरावट के मद्देनजर किया गया है, जो आनेवाले वर्षों में कुछ कम हो जाएगी, क्योंकि चीन की अर्थव्यस्था पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण चीन की विकास दर नीचे जाने की संभावना है.


बता दें कि चीन के मुकाबले फिलहाल भारत की विकास डर काफी ज्यादा है. पीएम मोदी के विकास के लिए लिए जा रहे फैसलों के चलते भारत की विकास दर काफी अच्छी चल रही है, वहीँ चीन की अर्थव्यवस्था साल 2016 में 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जबकि इसके पिछले साल यह 6.9 प्रतिशत थी.

2016 में चीनी सरकार का बजट घाटा जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का लगभग तीन प्रतिशत था. मूडीज के मुताबिक़ 2018 तक चीन का कर्ज उसकी जीडीपी के 40 प्रतिचत तक और दशक के अंत तक जीडीपी के 45 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा.

ओबोर के तहत श्रीलंका को 24 अरब डालर और ऋण देना चाहता है चीन

बता दें कि इससे पहले चीन ने “वन बेल्ट वन रोड” यानी ओबोर (OBOR) पहल के तहत श्रीलंका को 24 अरब डालर अतिरिक्त ऋण देने की इच्छा जताई थी. चीन ने ये पेशकश तब रखी, जबकि श्रीलंका उसे पहले दिया गया 8 अरब डालर के ऋण को ही ठीक से नहीं चुका पा रहा है. बहरहाल चीन को अब अपने विस्तारवादी नजरिये का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. उसकी चालाकियां अब उसी पर भारी पड़ने लगी हैं.

जहाँ चीन दूसरे देशों का इस्तमाल करके केवल अपने ही विकास की और ध्यान दे रहा है और असफल हो रहा है, वहीँ भारत “सबका साथ, सबका विकास” के मार्ग पर चल कर लगातार सफल होता जा रहा है.


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