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अभी-अभी : मोदी चीन पहुंचे, विमान से उतरते ही लिया ऐसा फैसला, जिसे देख चीन के उड़े होश !

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नई दिल्ली : पहले डोकलाम में और अब ब्रिक्स सम्मलेन में शरीक होने के लिए चीन पहुंचे पीएम मोदी ने चीन को एक और जोर का झटका दिया है. चीन के ऐतराज के बावजूद पीएम मोदी ब्रिक्स सम्मलेन में आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की चिंता को दुनिया के सामने रखेंगे. बता दें कि चीन ने भारत से आग्रह किया था कि आतंकवाद के मुद्दे को ब्रिक्स से दूर रखा जाए.

ब्रिक्स को आतंकवाद पर बात करनी ही होगी !

फॉरेन मिनिस्ट्री में सेक्रेटरी (ईस्ट) प्रीति सरन ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि, “इकोनॉमिक कोऑपरेशन के अलावा भी आपसी हित के कई मसले हैं, जैसे आतंकवाद का खतरा. ये भारत के लिए सबसे अहम मुद्दा है और ब्रिक्स लीडर्स इस पर बात करने के लिए बाध्य हैं.”

चीन की नापाक चाल का पर्दाफाश होगा !

आप सोच रहे होंगे कि चीन को भला आतंकवाद के मुद्दे पर बात करने से क्यों ऐतराज होने लगा. तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान की तरह चीन ने भी आतंकवाद का इस्तमाल अपने हितों के लिए करना शुरू कर दिया है. एक ओर तो वो पाक आतंकियों के समर्थन में यूएन में वोटिंग करता है और भारत की राह में अड़ंगा लगाता है.

ताकि भारत पाकिस्तान के साथ आतंकवाद के मुद्दे पर ही व्यस्त रहे और चीन आराम से अरुणाचल प्रदेश व् भारत-चीन बॉर्डर पर अपनी बढ़त बनाता जाए. वहीँ चीन म्यांमार को भी ताबे में लेने की कोशिश करता रहता है और इसीलिए चीन रोहिंग्या आतंकियों को भी आर्थिक सहायता देता है.

यही वजह है कि चीन नहीं चाहता कि ब्रिक्स में आतंकवाद का मुद्दा उठाया जाए. क्योंकि यदि मुद्दा उठेगा तो उसपर भी उंगलियां जरूर उठेंगी. मगर पीएम मोदी ने अपने इरादे साफ़ कर दिए हैं कि ब्रिक्स में आतंकवाद के मुद्दे पर बात जरूर की जायेगी.

पाकिस्तान और चीन को बेनकाब करके रहेंगे !

बता दें कि 9वां ब्रिक्स सम्मलेन 3 से 5 सितंबर तक चीन के शियामेन में होगा. प्रीति सरन ने कहा, “दुनिया में कुछ बदलाव आए हैं, जिन पर ब्रिक्स सम्मलेन में चर्चा होनी जरूरी है और मैं श्योर हूं कि ब्रिक्स लीडर्स इन पर बात करने को बाध्य हैं, इनमें आतंकवाद का खात्मा भी शामिल है, जो भारत के लिए सबसे अहम मुद्दा है.”


उन्होंने आगे कहा कि, “आतंकवाद का मसला पूरी इंटरनेशनल कम्युनिटी को प्रभावित कर रहा है. ब्रिक्स देश (ब्राजील-रूस-इंडिया, चीन-साउथ अफ्रीका) खुद भी आतंकवाद से पीड़ित हैं. पिछला ब्रिक्स सम्मलेन अक्टूबर 2016 में गोवा में हुआ था, उसमें भी भारत ने आतंकवाद का मुद्दा उठाया था और मुझे भरोसा है कि इस बार भी आतंकवाद के मुद्दे पर बात जरूर होगी. भारत इस सम्मलेन को बहुत गंभीरता से ले रहा है और इसीलिए आतंकवाद पर सख्त सन्देश देना चाहता है.”

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले ब्रिक्स सम्मलेन में भी पीएम मोदी ने आतंकवाद का मुद्दा पूरी ताकत से उठाया था और पाकिस्तान को ‘मदरशिप ऑफ टेररिज्म’ कहा था.

चीन को लगी मिर्ची !

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा था कि, “आतंकवाद पर पाकिस्तान का रवैया ब्रिक्स सम्मलेन के लिए सही मुद्दा नहीं है. हमें मालुम है कि भारत की कुछ चिंताएं हैं, लेकिन ये मुद्दा उठाने पर सम्मलेन अपने मकसद से भटक सकता है. चीन अपने करीब सहयोगी की किसी भी तरह की आलोचना को बर्दाश्त नहीं करेगा. वैसे पाक खुद भी आतंकवाद से पीड़ित है.” यानी चीन ने साफ़ कहा था कि पाकिस्तान उसका सहयोगी देश है और पाकिस्तान के खिलाफ चीन कुछ सुन नहीं पायेगा. चीन ने भारत से कहा था कि इस बार आतंकवाद का मुद्दा ब्रिक्स सम्मलेन में ना उठाया जाए.

डोकलाम की तरह ब्रिक्स में भी भारत का सख्त स्टैंड !

जिसके जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा था कि, “यह तय करना किसी देश की जिम्मेदारी नहीं है कि दूसरे देश का एजेंडा क्या होगा. चीन ऐसा करके दूसरों के अधिकारों में हस्तक्षेप कर रहा है. हर देश अपनी बात रखने को आजाद है. कोई देश क्या बात करेगा, यह कोई दूसरा देश तय नहीं करेगा.”

यानी भारत की ओर से चीन को साफ़ कर दिया गया कि वो अपनी हद में रहे और ज्यादा सयाना बनने की कोशिश ना ही करे. भारत को किस बारे में बात करनी है या नहीं करनी है, इसका फैसला भारत खुद करेगा, चीन को ज्ञान बांटने की जरुरत नहीं है. साफ़ है कि भारत ने डोकलाम की ही तरह यहाँ भी एक सख्त स्टैंड ले लिया है और चीन को मुँहतोड़ जवाब दिया है. बताया तो ये भी जा रहा है कि किसी भी अन्य देश को ब्रिक्स में आतंकवाद का मुद्दा उठाये जाने से ऐतराज नहीं है सिवाय चीन के.


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