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भारत की राजनीति में मोदी ने दाग दिया ब्रह्मास्त्र, पलट दी सारे भारत की सियासत, नए रूप में बीजेपी

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नई दिल्ली : यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जो अपना “रामबाण” चलाया है वो सटीक निशाने पर लगता नज़र आ रहा है. इसी रामबाण के सहारे अब बीजेपी केवल 2019 में ही नहीं बल्कि 2024 में भी लोकसभा चुनाव जीत सकती है. सोशल इंजीनियरिंग का ये फॉर्मूला इतना सटीक है कि कहा जा रहा है कि पीएम मोदी को अगले 20 साल तक पीएम की गद्दी से कोई हटा नहीं पायेगा.

मोदी का सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला

बिहार में जाति समीकरण के मकड़जाल के कारण बीजेपी को हार का मुह देखना पड़ गया था. लेकिन अब पार्टी ने इसका तोड़ निकाल लिया है. सबसे अहम् बात तो ये है कि सोशल इंजीनियरिंग का ये फॉर्मूला बीजेपी के हिंदुत्व के एजेंडे से भी मेल खाता है. इस फॉर्मूले को अब देश के अन्य राज्यों में भी प्रयोग किया जाएगा.

ये फॉर्मूला है- गैर-यादव ओबीसी + गैर-जाटव अनुसूचित जातियां + परंपरागत अगड़ी जाति के वोट. बीजेपी के एक नेता के मुताबिक़ हिंदुत्व का ये व्यापक जातीय फॉर्मूला दरअसल पीएम मोदी का ही आईडिया है. यूपी विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस बारे में चर्चा की गयी थी. पीएम मोदी का मानना है कि बीजेपी भले ही हिंदुत्व और हिंदुओं की एकता की बात करे मगर अन्य पार्टियां आरक्षण जैसे कई मुद्दों के जरिये से हिंदुओं में फूट डाल देती हैं.

हिन्दू समाज के सभी वर्गों की ओर ध्यान

ऐसे में हिंदुओं की एकता के साथ एक जातीय गणित के आधार पर हिन्दू समाज के हर तबके की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि हिंदुओं के हर तबके के वोट बीजेपी को मिल सकें. यूपी चुनाव में इसी गणित का उपयोग किया गया. यूपी चुनाव में बीजेपी की ओर से दिए गए सभी विज्ञापनों में पीएम मोदी, अमित शाह के साथ-साथ प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, उमा भारती और कलराज मिश्र की फोटो भी लगाई गयी.

पीएम मोदी और अमित शाह से प्रभावित होकर तो लाखों लोग वोट करते हैं. वहीँ केशव प्रसाद मौर्य और उमा भारती गैर-यादव ओबीसी वर्ग से हैं इसलिए उनके चेहरे के जरिये ओबीसी जातियों में विश्वास बिठाया गया कि बीजेपी सरकार में सभी ओबीसी जातियों पर भी ध्यान दिया जाएगा.

यादवों पर भी विषय ध्यान

वहीँ अगड़ी जातियों को ध्यान में रखते हुए राजनाथ सिंह और कलराज मिश्र को पोस्टरों में शामिल किया गया ताकि उनका विश्वास भी हासिल किया जा सके. यूपी और बिहार में यादवों के वोट सपा और आरजेडी ले जाती हैं. बीजेपी की ओर से यादवों को भी अपनी ओर करने की तैयारी है.

वैसे तो बीजेपी के पास भूपेंद्र यादव, हुकुमदेव नारायण, रामकृपाल यादव और बंडारू दत्तात्रेय जैसे कई बड़े यादव नेता हैं लेकिन फिर भी इनकी लोकप्रियता अभी इतनी नहीं कि मुलायम या लालू को पीछे छोड़ सकें. इसलिए यूपी चुनाव में बीजेपी ने कई यादव नेताओं को पार्टी में शामिल किया. कई यादवों को जिलाध्यक्ष भी बनाया ताकि यादवों के मन में बीजेपी के लिए विश्वास जगाया जा सके और मुलायम के प्रति उनका मोह भंग किया जा सके.

बीजेपी अब ‘ब्राह्मण-बनिया’ पार्टी नहीं

यूपी चुनाव में बीजेपी ने गैर-यादव ओबीसी उम्मीदवारों को 150 टिकट दिए और इसके साथ ही कुर्मी जाति के लिए बीजेपी के सहयोगी अपना दल का सहारा लिया गया. राजभर वोटरों को लुभाने के लिए बीजेपी के सहयोगी भारतीय समाज पार्टी का सहारा लिया गया. इन दोनों सहयोगी दलों के जरिये बीजेपी पूर्वी यूपी के 18 फीसदी वोटरों के मन में अपने लिए विश्वास जगा पायी. यानी पीएम मोदी की योजना अनुसार बीजेपी अब ब्राह्मण-बनिया की पार्टी की अपनी इमेज को पीछे छोड़ कर सभी जातियों पर सामान रूप से ध्यान देने की कोशिश करने लगी है.

यूपी में आज अंतिम चरण के मतदान हो रहे हैं लेकिन बीजेपी अपनी जीत को लेकर निश्चिन्त है. पार्टी के विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक़ बीजेपी को विश्वास है कि वो बहुमत से यूपी में सरकार बनाएगी. यूपी चुनाव में पीएम मोदी के सोशल इंजीनियरिंग का इस्तमाल किया गया है और यूपी की जीत ये निश्चित कर देगी कि मोदी जी का ये रामबाण सटीक काम कर रहा है. जिसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भी इस रामबाण का इस्तेमाल किया जाएगा.

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