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नोटबंदी पर आयी इस रिपोर्ट को पढ़कर आपकी आँखें फटी रह जाएंगी, देश बचा लिया मोदी ने

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कांग्रेस सरकार ने भारत को किस तरह से बर्बादी के कागार पर ला कर खड़ा कर दिया, ये बात कइयों को पता नहीं है. देश के कई नेता तो खुलकर पूरी बेशर्मी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले के विरोध में भी लग गए. लेकिन देश के बड़े अर्थशास्त्री अनिल बोकिल की टीम ने जो दावा किया है वो जानकार तो आपके होश उड़ जाएंगे. अनिल बोकिल टीम के अहम सदस्य व बड़े अर्थशास्त्री आदर्श धवन के मुताबिक़ यदि प्रधानमंत्री मोदी अभी नोटबंदी का फैसला ना लेते तो अगले कुछ वर्षो में देश की अर्थव्यवस्था तबाह हो सकती थी।


94 फ़ीसदी हो जाते बड़े नोट

उनके मुताबिक़ साल 2000 के बाद जिस तीव्र गति से पांच सौ व हजार के नोटों की छपाई करनी पड़ रही थी, उस हिसाब से 2025 तक 30 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा कीमत के बड़े नोट भारत में हो जाते। जिसका मतलब देश की कुल कैश करेंसी का 94 फ़ीसदी तो सिर्फ बड़े नोट ही होते। यदि ऐसा हो जाता तब नोटबंदी का फैसला लेना लगभग नामुमकिन हो जाता।

देश के बड़े अर्थशास्त्री आदर्श धवन के मुताबिक़ नोटबंदी के फैसले तक देश में पांच सौ व हजार के नोटों की संख्या कुल करेंसी की 86 फ़ीसदी तक पहुंच चुकी थी। यानि 2016 में 14 लाख 18 हजार करोड़ रुपये कीमत के नोट पांच सौ व एक हजार के थे, जबकि वर्ष 2000 में ये नोट केवल 56 हजार करोड़ रुपये कीमत के थे। बीते 15 वर्षो में सरकार को तकरीबन 90 हजार करोड़ रुपये प्रति वर्ष की दर से बड़े नोट छापने पड़ रहे थे।


2025 तक 22 प्रतिशत से अधिक हो जाती महंगाई की दर

इसी दर से यदि भारत सरकार बड़े नोट छापती रहती तो साल 2025 आते-आते तक महंगाई की दर बढ़कर 22 प्रतिशत तक पहुंच सकती थी। कई अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं का अध्यन करेंगे तो पता चलेगा कि महंगाई बढ़ने की की दर के 16 से 18 फीसद से ज्यादा होने पर देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद होने से कोई नहीं रोक सका। भारत भी बर्बादी के उसी कगार पर खड़ा था। नोटबंदी ना की जाती तो अगले दो-तीन वर्षो में भारत में महंगाई अनियंत्रित रूप से बढ़ती चली जाती और फिर देश को बर्बाद होने से कोई नहीं रोक सकता था।

16 फीसद से अधिक महंगाई दर के बाद ये देश हुए बर्बाद

भारत के नोटबंदी करने के बाद हिम्मत करके वेनेजुएला ने भी अपने यहां नोटबंदी की थी क्योंकि वहां महंगाई बढ़ने की दर 57 प्रतिशत तक पहुंच जाने से उसकी अर्थव्यवस्था चौपट हो गई थी। इसी तरह अर्जेन्टीना में साल 2013 में महंगाई दर 21 प्रतिशत तक पहुंचने से उसकी अर्थव्यवस्था डगमगाने लगी थी। जिसके कारण अर्जेन्टीना को मुद्रा अवमूल्यन करना पड़ा। इराक में महंगाई दर 17 प्रतिशत पहुंचने से वहां की अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह चरमरा गई है। इसके अलावा दुनिया के दूसरा सबसे विकसित देश रूस में भी 80 के दशक में महंगाई दर 24 प्रतिशत तक पहुंचने के बाद वहां की अर्थव्यवस्था भी तबाही के कागार पर पहुच गयी थी।

जाली नोट, हवाला और आतंकवाद के रैकेट

देश के ज्यादातर लोग तो गरीब हैं तो फिर इतनी अधिक संख्या में बड़े नोटों की जरुरत ही क्या थी? जाली नोट देश को अंदर से खोखला कर रहे थे. पंजाब, कश्मीर, नेपाल व बंगलादेश के रास्ते भारत में पांच सौ व एक हजार के सबसे अधिक जाली नोट खपाये जा रहे थे। 80 प्रतिशत जाली नोट इन्हीं चार मुख्य रास्तों से भारत में आते थे। पश्चिम बंगाल के मालदा जिला को तो जाली नोटों की राजधानी के नाम से जाना जाने लगा था। हर साल यहां दो करोड़ से अधिक के जाली नोट पकडे जाते थे। नोटबंदी के बाद से जाली नोटों के कारोबार पर नकेल कसी है जोकि देश के लिए अच्छा संकेत है।


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