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रूस में पीएम मोदी ने साकार किया भारत का सबसे बड़ा सपना, ताकते रह गए चीन और पाकिस्तान !

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नई दिल्ली : इन दिनों पाक न्यूक्लियर प्रोग्राम पर ख़तरा मंडरा रहा है. बलोच लोग दुनियाभर में पाक के परमाणु हथियारों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीँ भारत को परमाणु ऊर्जा संयंत्र माले में बड़ी सफलताएं मिलती जा रही है. खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के साथ भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूस के सेंट पीटर्सबर्ग पहुंच चुके हैं.


भारत-रूस के बीच परमाणु ऊर्जा करार

यहाँ भारत और रूस के बीच कई समझौते होने को हैं, जिनमे सबसे ख़ास है भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र की अंतिम दो इकाइयों के लिए रूस की सहायता का करार. पीएम मोदी ने ट्वीट के जरिये से अपने पीटर्सबर्ग पहुंचने की जानकारी दी, साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी इस यात्रा से भारत-रूस के रिश्ते और भी ज्यादा दृढ़ होंगे.

बताया जा रहा है कि तमिलनाडु में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की इकाई 5 और 6 के निर्माण के लिए आर्थिक सहायता पर समझौते के विवरण और भाषा को लेकर अंतिम दौर की बातचीत चल रही है. आज पीएम मोदी रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में भी शामिल होंगे. भारत पहली बार इस बिजनेस कार्यक्रम में शिरकत कर रहा है.

बताया जा रहा है कि परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण में रूस की सहायता से जुड़े समझौते पर काम जारी है. संयंत्रों का निर्माण भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) और रूसी परमाणु संयंत्रों की नियामक संस्था साटॉम की सहायक कंपनी “एटम्सस्ट्रॉय एक्सपोर्ट” कर रहे हैं.


इसके अलावा रूस व् भारत के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रेलवे, सांस्कृतिक आदान-प्रदान समेत अन्य क्षेत्रों में करीब 12 समझौते होने जा रहे हैं. इसके अलावा पीएम मोदी व् पुतिन मिलकर एक एक विजन डॉक्यूमेंट भी जारी करेंगे. हालांकि फिलहाल दोनों ही देशों का पूरा ध्यान परमाणु समझौते पर दस्तखत को लेकर है.

भारत में चौबीसों घंटे बिजली की दिशा में बड़ा कदम

ये समझौता भारत के लिए इतना महत्वपूर्ण कि भारत और रूस के अलावा दुनिया भर के देशों, खासतौरपर चीन और पाकिस्तान की निगाहें इसी पर गड़ी हुई हैं. इससे पहले अक्तूबर 2016 में गोवा में हुए द्विपक्षीय सम्मेलन में भी सारा ध्यान इसी समझौते की और था. रूस के साथ इस करार के होने पर देश में भारी मात्रा में बिजली का उत्पादन हो सकेगा.

एक-एक हजार मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता वाले दोनों संयंत्र देश में परमाणु ऊर्जा उत्पादन को जबरदस्त तरीके से बढ़ा देंगे. फिलहाल भारत में 22 परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के जरिये बिजली उत्पादन किया जाता है, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 6780 मेगावाट है.


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