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इजराइल से आयी ये खबर पढ़कर आपकी आँखें फटी रह जाएंगी, भारतीय सेना को सलाम करेंगे आप भी

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नई दिल्ली : इजराइल की शक्ति के बारे में तो सभी चर्चा कर रहे हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इजराइल आखिर क्यों भारत को अपना सबसे अच्छा दोस्त मानता है? आइये आपको बताते हैं कि कैसे इजराइल के बनने के पीछे सबसे बड़ा योगदान भारतीय सेना का ही था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजराइल के दौरे पर हैं. गुरुवार को वो इजरायल के शहर हाइफा जाएंगे, जहाँ वो प्रथम विश्वयुद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों को श्रद्धांजलि देंगे. दरअसल 99 साल पहले प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान भारत के वीर जवानो ने हाइफा शहर को तुर्की आक्रमणकारियों से आजाद कराया था. इस तरह भारतीय सैनिकों ने यहूदियों के देश इजराइल की स्थापना की नीव रखी थी.

इन वीर जवानों के सम्मान में दिल्ली में तीन मूर्ति चौक भी बनाया गया है, लेकिन अब इसरायली दोस्ती के चलते इसका नाम बदलकर “तीन मूर्ति हाइफा चौक” किए जाने पर विचार किया जा रहा है. हाइफा इजरायल का एक छोटा सा शहर है, जो समुद्र के किनारे बसा है. भारत और इजराइल की दोस्ती का सबसे मजबूत स्तम्भ है हाइफा शहर. 99 साल पहल हुए युद्ध में हिंदुस्तानी जवानों ने जिस तरह इस क्षेत्र को आजादी दिलाई थी, उसके सम्मान में यहूदी आज भी उस दिन को हाइफा दिवस के रूप में मनाते हैं.

प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान भारत की 3 रियासतों मैसूर, जोधपुर और हैदराबाद के सैनिकों को अंग्रेजों की ओर से युद्ध के लिए तुर्की भेजा गया. बताया जाता है कि हैदराबाद रियासत के सैनिक मुस्लिम थे और इसलिए उन्होंने तुर्की के खलीफा के खिलाफ युद्ध लड़ने से मना कर दिया. इसलिए अंग्रेजों ने केवल जोधपुर और मैसूर के जवानों को युद्ध लड़ने का आदेश दिया.


तुर्कों को जर्मनी की सेना का भी साथ मिला हुआ था और उनकी सेना के पास भारी मात्रा में गोला बारूद ओर मशीनगनें भी थी, वहीँ दूसरी ओर अंग्रेजों की तरफ से हिंदुस्तान की दो रियासतों की फौज थी ओर भारतीय जवानों के पास केवल तलवारें, भाले ओर सिर्फ घोड़े की सवारी थी. इसके बावजूद वीर भारतीय जवानों ने केवल तलवार और भाले-बरछे के साथ ही उन्हें हरा दिया.

मेजर दलपत सिंह शेखावत की अगुवाई में भारतीय जवानों ने 1350 जर्मन व् तुर्क सैनिकों को बंदी बना लिया. इनमे 2 जर्मन अधिकारियों, 35 तुर्की अधिकारियों, 17 तोपखाने व् बंदूकें और 11 मशीनगन भी शामिल थी.

23 सितंबर 1918 को ही ये जंग घुड़सवारी की सबसे बड़ी और आखिरी जंग थी, जिसमे जीत हासिल करके भारतीय जवानों ने इजराइल बनने की नीव रखी. 1918 में हाइफा शहर से यहूदियों ने इजराइल में बसना शुरू किया. 14 मई 1948 को इजरायल बनने के बाद यहां यहूदियों के लिए रास्ता खुल गया. हालांकि अरब देशों को इजराइल नामाजूर था, जिसके कारण 1948 में इजरायल का अरब देशों से एक बार फिर युद्ध शुरु हुआ. उस दौरान भी यही हाइफा शहर युद्ध का केंद्र बना था.


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