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पीएम मोदी फिर आये एक्शन में, नोटबंदी के बाद मंत्रियो और सांसदों को हिलाने वाला एक और फरमान जारी


नई दिल्ली : जिस तरह कॉलेजों से निकलने के बाद भी बच्चे हॉस्टलों में पांच- छह सालों तक जमे रहते हैं ठीक उसी तरह हमारे देश में मंत्री संतरी भी सरकारी बंगले में कई सालों तक अवैध तरीके से कब्ज़ा जमाएं रहते हैं. लेकिन अब मोदी सरकार ने ऐसा कड़ा नियम बनाया है जिससे सभी पूर्व मंत्रियों और सांसदों के ऐशो आराम और सुख सुविधाएं छीन ली जाएँगी.

वर्तमान नियम के मुताबिक कानून की खामियों का फायदा उठाते हुए सरकारी आवास खाली करने के लिए लम्बी चौड़ी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता था जिसमे बहुत वक़्त लगता था. अभी तक मंत्रियों, सांसदों को चार से पांच महीने लग जाते हैं सिर्फ नोटिस भेजने में, आदेश जारी होने के बाद भी एक से दो महीने का वक़्त दिया जाता था. इसके बाद भी ये लोग निचली अदालतों से स्टे आर्डर ले आते थे और फिर मामला लम्बा खिँच जाता था.

मौजूदा पीएम मोदी सरकार में शहरी विकास मंत्री वैंकैया नायडू को कई नेता जैसे अम्बिका सोनी, अधीरंजन चौधरी, हरीश रावत, उमर अब्दुल्ला जैसे नेताओं से सरकारी बांग्ला या फ्लैट खाली करवाने में पसीने छूट गए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अनेक मंत्रियों और 70 से ज़्यादा अधिकारीयों, बाबुओं, नौकरशाहों ने वर्षों से सरकारी आवास कब्ज़ा पर किया हुआ था. इस लिस्ट में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी पिछले दो सालो से दिल्ली के सरकारी आवास पर कब्ज़ा जमाये हुए हैं और अभी उन्होंने और वक़्त की मांग के लिए निचली अदालत में अपील करी है.


कांग्रेस पार्टी के पास 24 अकबर रोड स्थित मुख्यालय 18 जुलाई, 1990 से कब्जे में है. साथ ही 26 अकबर रोड वाला सरकारी आवास 8 मार्च 1994 से उनके पास है. कांग्रेस के अन्य तीन बंगले भी वर्षों से है 5 रायसीना रोड, सी-2-109 चाणक्यपुरी वाला बंगला भारतीय युवक कांग्रेस ने अपने कार्यो के लिए लिया है वही 26 अकबर रोड वाला बंगला पार्टी के जुड़े अन्य कार्यो के लिए लिया गया है.

नए नियम के तहत तीन दिन में बंगला खाली करना होगा

इसी सिलसिले में बुधवार को पीएम मोदी की अध्य्क्षता में की गयी कैबिनेट मीटिंग ने सरकारी आवास (अनधिकृत कब्जा विरोधी) अधिनियम, 1971 में बदलाव करके ऐसा कड़ा नियम बनाया है जिससे अब सरकारी आवास में ऐशो आराम से दिन काट रहे मंत्रियों , सांसदों, नौकरशाहों की मुश्किलें बढ़ जाएगी. इस नियम के तहत सबसे पहले तो आदेश जारी होने के तीन दिन के अंदर मंत्रियो, सांसदों, बाबुओ को सरकारी आवास या फ्लैट खाली करना होगा और इसपर स्टे आर्डर लेने के लिए उन्हें अब निचली अदालत में अपील करने की अनुमति भी नहीं दी जाएगी. इसके बाद भी अगर किसी ने सरकारी बंगला खाली करने में आनाकानी या बहानेबाजी करी, या खाली करने से इंकार किया तो सरकार जबरदस्ती सख्ती का प्रयोग करके उनसे ये आवास छीन लेगी साथ ही भारी जुर्माना भी देना पड़ेगा.


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