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स्कूल जाने वाले बच्चों को मोदी सरकार का सबसे शानदार तोहफा, अभिभावकों ने कहा- धन्य हो गए !

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देहरादून : पिछले काफी वक़्त से लोगों की शिकायत रही है कि छोटे-छोटे बच्चों के कन्धों पर भारी बस्ते का बोझ उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो रहा है. घर से स्कूल और स्कूल से घर तक भारी-भरकम बस्ता कंधे पर लाद कर लाने ले जाने में छात्रों के पसीने छूट जाते हैं. कई बार तो उनके बस्तों का वजन, उनके खुद के वजन से भी ज्यादा हो जाता है. अब सरकार इसे लेकर सख्त हो गयी है और बस्ते के वजन को काम करने के लिए अहम् फैसले लिए गए हैं.

बच्चों को स्कूल नहीं ले जानी पड़ेंगी भारी किताबें !

सीबीएसई (सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन) ने स्कूली बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने के लिए स्कूलों में लॉकर की सुविधा देने का सर्कुलर जारी किया है. इसके लिए स्कूलों को एक साल का वक़्त दिया गया है. सीबीएसई ने एक साल के अंदर-अंदर सभी स्कूलों में लॉकर बनाकर इसकी रिपोर्ट देने को कहा है. जो भी स्कूलों लॉकर नहीं बनवाएंगे उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी.

अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों की तर्ज पर सीबीएसई बोर्ड ने छात्रों के बस्ते का वजन कम करने के लिए हर स्कूल में सुरक्षित लॉकर बनाने के निर्देश दिए हैं. सीबीएसई के मुताबिक़ भारी-भरकम बस्ते का बोझ ढोने से बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है.

पालन ना करने पर होगी सख्त कार्यवाही !

जिसके चलते सीबीएसई ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि स्कूलों में लॉकर होने से बच्चों को अपनी अनुपयोगी किताबें या शैक्षणिक सामग्री रखने में सुविधा मिलेगी. कई अभिभावकों की तरफ से भारी बस्ते को लेकर सीबीएसई को लिखित शिकायतें दी गई थीं, जिसके बाद ये कदम उठाया गया है.

सीबीएसई के सूत्रों के मुताबिक़ इस योजना को इसी सत्र से एक अभियान के रूप में चलाया जा रहा है. अगले सत्र तक सभी स्कूलों में लॉकर की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. जो स्कूल इसका पालन नहीं करेंगे उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जायेगी और उनकी मान्यता तक रद्द की जा सकती है.

वहीँ इस फैसले का अभिभावकों ने स्वागत किया है. अभिभावकों के मुताबिक़ देशभर के स्कूलों में यदि ये नियम लागू किया जाता है तो इससे बच्चों को काफी राहत मिलेगी. उनके मुताबिक़ भारी-भरकम अनुपयोगी कॉपियों व् किताबों को ढोने से बच्चों को अत्याधिक थकान के साथ-साथ पीठ व् कमर दर्द की समस्या का भी सामना करना पड़ता है. स्कूलों में लॉकरों की सुविधा वाकई में एक क्रांतिकारी फैसला होगा.

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