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मोदी सरकार का अबतक का सबसे जबरदस्त फैसला, पिछले एक हज़ार साल में भी कभी नहीं हुआ ऐसा

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नई दिल्‍ली : 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने देश की जनता से वादा किया था कि वो देश में राम राज्य ले आएंगे. लोगों ने उनपर यकीन करते हुए बीजेपी को भारी मतों से चुनाव जीता कर उन्हें पीएम की गद्दी तक पहुचा भी दिया. हालांकि विपक्ष की ओर से पीएम मोदी के वादों को केवल जुमले कहा गया था लेकिन अभी-अभी जो खबर आयी है उसे देखकर आपको यकीन आ जाएगा कि पीएम मोदी कभी झूठे वादे नहीं करते और देश में राम राज्य की स्थापना की ओर उनकी सरकार ने कदम बढ़ा दिए हैं.

क्या है राम राज्य ?

दरअसल हिन्दू संस्कृति में भगवान् राम द्वारा किया गया आदर्थ शासन रामराज्य के नाम से प्रसिद्ध है. भारत को आजादी मिलने के बाद खुद महात्मा गांधी ने भी देश के साथ-साथ पूरी दुनिया में राम राज्य की चाह की थी. रामचरितमानस के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की शासन व्यवस्था इतनी बेहतरीन थी कि उनके राज में चारों ओर हर्ष व्याप्त हो गया, नागरिकों के सभी दुःख-दर्द और डर दूर हो गए एवं दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति मिल गई. कोई भी नागरिक अल्पमृत्यु, रोग–पीड़ा से ग्रस्त नहीं था, सभी स्वस्थ, बुद्धिमान, साक्षर, गुणज्ञ, ज्ञानी तथा कृतज्ञ थे.

भ्रष्टाचार और बेईमानी ख़त्म करके देश के नागरिकों के विकास के लिए और हेल्थ केयर के लिए तो मोदी सरकार कई काम कर ही रही है. लेकिन अब मोदी सरकार ने देश में लगातार फैलते अपराध, अनैतिक कृत्य और कई अन्य सामाजिक बुराइयों को भी जड़ से ख़त्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है.

नैतिक शिक्षा की जरुरत !

10 मार्च को भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी ने लोकसभा में “शैक्षिक संस्थाओं में नैतिक शिक्षा पाठ्यक्रम के रूप में श्रीमद भगवद गीता का अनिवार्य शिक्षण विधेयक, 2016” पेश किया जिसमें प्रस्ताव है कि स्कूलों समेत सभी शैक्षिक संस्थाओं में नैतिक शिक्षा के पाठ्यक्रम के रूप में भगवद गीता को अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाए.


बिधूड़ी के मुताबिक़ आज देश में तेजी से फ़ैल रहे अपराध व् अन्य सामाजिक बुराइयों के लिए कमजोर शिक्षा व्यवस्था जिम्मेदार है. उनके मुताबिक़ स्कूलों से ही अनिवार्य रूप से नैतिक शिक्षा पर जोर दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि भगवद गीता नैतिकता का पाठ पढ़ाती है और लोगों को सही राह भी दिखाती है.

बिधूड़ी के मुताबिक़ नये भारत की नींव को मजबूत बनाने के लिए बच्चों में नैतिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए और इसी उद्देश्य से उन्होंने लोकसभा में एक निजी विधेयक पेश किया है. बिधूड़ी के अनुसार स्कूलों में तीसरी कक्षा से ही नैतिक शिक्षा पढ़ायी जानी शुरू कर देनी चाहिए. आशय ये है कि नागरिकों का कोई गलत काम करने के लिए अंदर से मन ही ना करे और ऐसा केवल नैतिक शिक्षा के जरिये से ही संभव है, तभी सही मायनो में देश से अपराध को ख़त्म किया जा सकता है.

यानी एक ओर तो मोदी सरकार विकास कार्यों के जरिये लोगों के जीवन को संवारने का काम कर रही है, वहीँ दूसरी ओर नैतिकता का पाठ पढ़ाकर देश से अपराध को ख़त्म करके सही मायनो में राम राज्य की स्थापना की भी कोशिश कर रही है.


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