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आखिरकार कश्मीर में रंग लाई मोदी सरकार की मेहनत, आ गयी वो खबर जिसका सबको था बेसब्री से इंतज़ार

gilani

नई दिल्ली : अगर कश्मीर की बदहाली का कोई जिम्मेदार है तो वो हैं कश्मीरी अलगाववादियों नेता, जो चाँद रुपयों के लिए देश का सौदा करने से भी नहीं हिचकिचाते. कश्मीरी युवकों को उकसा कर, उनमे पैसे बाँट कर सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी के पीछे भी इन्ही का हाथ रहा है. इंडिया टुडे के “ऑपरेशन हुर्रियत” खुलासे के बाद अब हुर्रियत के नेताओं का खेल खात्मे के कागार तक आ गया है. खबर है कि जांच एजेंसियों ने हुर्रियत के नेताओं के खिलाफ बड़ा फैसला लिया है.

दरअसल हुर्रियत नेताओं द्वारा पाकिस्तानी आतंकियों से पैसे लेने का खुलासा होने के बाद जांच एजेंसियों ने हुर्रियत नेताओं पर पाबंदी बढ़ा दी है. पाकिस्तान से मिलने वाली फंडिंग मामले में एनआईए ने हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी पर तेजी से शिकंजा कसते हुए अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है और अब इन अलगाववादियों से कश्मीर में नहीं बल्कि दिल्ली में एनआईए के हेडक्वार्टर में एनआईए अपने तरीके से पूछताछ करेगी.

एनआईए ने इस मामले में गिलानी समेत 4 अलगाववादी नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और अब इन्हे दिल्ली बुलाकर ऐसी तुड़ाई की जायेगी, जिसमे अच्छे भी सच उगलना शुरू कर देते हैं. एनआईए ने अपनी प्रारंभिक जांच के केस में इन अलगाववादियों पर क्रॉस बार्डर फंडिंग, सरकारी संपत्ति के नुकसान, सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी और स्कूल सरकारी प्रतिष्ठानों को जलाने के मामले में केस दर्ज किया है.

स्टिंग ऑपरेशन में अपने ही एक नेता द्वारा अपनी काली-करतूतों की पोल खुलने के बाद से हुर्रियत नेता बौखलाए हुए हैं. सिमी की तरह सरकार इस संगठन पर प्रतिबन्ध लगाने का विचार भी कर रही है. ये बात तो तय है कि अब अलगाववादियों का खेल ख़त्म हो चुका है, जैसे-जैसे पूछताछ में इनके दिल्ली में बैठे साथियों के नाम सामने आते जाएंगे, वैसे-वैसे इनका पूरा नेटवर्क ख़त्म होता चला जाएगा. जांच में तेजी के लिए एनआईए ने इन कट्टरपंथियों को दिल्ली में पूछताछ के लिए बुलाने का फैसला कर लिया है.

इन अलगाववादियों को लगा कि कश्मीर में ही इनसे प्रेम पूर्वक पूछताछ की जायेगी, जहाँ ये हर बार की तरह ढीट की तरह चुप्पी साधे बैठे रहेंगे और सबूत ना मिल पाने के कारण इन्हे बरी कर दिया जाएगा, लेकिन इस बार खेल उलटा पड़ गया. इन अलगाववादी नेताओं को अच्छी तरह से पता है कि दिल्ली में इनकी किस कदर खातिरदारी की जायेगी, इस वजह से गिलानी ने अभी से अपने और अपने संगठन के लिए कश्मीरियों से समर्थन जुटाना शुरू कर दिया है.

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