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चुनाव के बाद पीएम मोदी ने लिया अब तक का सबसे क्रांतिकारी फैसला, अमेरिका, रूस, चीन तक ने की तारीफ़ं

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नई दिल्ली : पांच राज्यों में चुनाव के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने देश की जनता को बड़ा तोहफा दिया है. वो लोग जो बीमार हैं और उनके पास अस्पताल में इलाज करवाने के पैसे नहीं हैं, उन्हें अब परेशान होने की कोई जरुरत नहीं है. कल शाम मोदी कैबिनेट ने नेशनल हेल्थ पॉलिसी को मंजूरी दे दी है, जिसकी चर्चा देश-विदेश में की जानी शुरू हो गयी है. इसे मोदी सरकार की एक बेहद क्रांतिकारी योजना के रूप में देखा जा रहा है.

न्यू हेल्थ पॉलिसी की अहम् बातें

इस नेशनल हेल्थ पॉलिसी के तहत जेब में पैसा ना होने के बावजूद हर मरीज को इलाज की सुविधा दी जाएगी. किसी भी मरीज का इलाज करने से मना नहीं किया जा सकेगा. सरकारी सूत्रों के मुताबिक़ कल पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले दो साल से लटकी इस नेशनल हेल्थ पॉलिसी को मंजूरी दे दी है.

इस पॉलिसी के तहत इंश्योरेंस बेस्ड मॉडल या फिर प्रीपेड मॉडल के जरिये भारत के सभी नागरिकों को कम कीमत पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. जिस तरह अभी एजुकेशन सेस लगता है, वैसे ही इन स्वास्थ्य सेवाओं को उपलब्ध कराने के लिए हेल्थ सेस लगाने की बात भी इस पालिसी में कही गयी है.

पॉलिसी के तहत लोगों को प्रीपेड हेल्थकेयर सर्विस की सुविधा दी जा सकती है और साथ ही एक सिकनेस फंड बनाने की बात भी इस पॉलिसी में कही गयी है ताकि जरूरतमंदों का सरकारी या फिर प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराया जा सके.

इस पॉलिसी के जरिये से सरकार का लक्ष्य है कि देश के 80 फ़ीसदी नागरिकों का इलाज और दवा सरकारी अस्पतालों में बिलकुल मुफ्त हो. इसके साथ ही इस हेल्थ पॉलिसी में हेल्थ इंश्योरेंस की भी व्यवस्था की गई है, जिसके तहत सभी मरीजों को इंश्योरेंस का लाभ मिलेगा और वो प्राइवेट अस्पताल में भी इलाज करवा पाएंगे.

हेल्थ इंश्योरेंस योजना के तहत प्राइवेट अस्पतालों को ऐसे इलाज के लिए अलग से तयशुदा रकम मुहैया कराई जायेगी. देश में मातृ और शिशु मृत्यु दर घटाने पर जोर दिया जाएगा. देशभर के सरकारी अस्पतालों में रोगों की जांच के लिए सभी आधुनिक साधन मुहैया कराये जाएंगे यानी सरकारी अस्पताल भी प्राइवेट अस्पतालों को टक्कर देंगे.

इस पॉलिसी के तहत प्राथमिक चिकित्सा की मजबूती के लिए भी काम किये जाएंगे. सबसे अहम् बात ये है कि इसके तहत जिला अस्पताल और इससे ऊपर के अस्पतालों को पूरी तरह सरकारी नियंत्रण से अलग करके PPP यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप में शामिल किया जाएगा.

स्वास्थ्य पर फिलहाल जीडीपी का 1.04 फ़ीसदी खर्चा होता है, जिसे बढ़ाकर 2.5 फ़ीसदी कर दिया जाएगा यानी दोगुने से भी थोड़ा ज्यादा. आपको बता देन कि फिलहाल ऐसी योजनाएं केवल बहुत विकसित देशों में ही हैं लेकिन अब भारत में भी ये लागू होंगी.

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