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मोदी ने दिखाई विरोधियों को 56 इंच की ताकत, हाहाकारी एक्शन से बैंकों समेत देशभर में हड़कंप

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नई दिल्ली : पीएम मोदी पर कीचड़ उछालने वालों को आज मोदी ने अपने 56 इंच के सीने की ताकत दिखाई है. अरुण शौरी जैसे बीजेपी नेताओं को, जो मोदी के नोटबंदी को सरकार की मनी लॉन्ड्रिंग योजना बता रहे हैं, उन्हें करारा जवाब मिला है. पीएम मोदी ने दिखा दिया है कि काले कुबेर भले खुद को काफी स्मार्ट समझ रहे हों, लेकिन वो जहाँ सोचना बंद करते हैं, वहाँ से तो मोदी सोचना शुरू करते हैं.


बैंकों के साथ मिलकर मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों के खिलाफ एक्शन

बड़े पैमाने पर कालेधन को सफ़ेद करने वालों का खुलासा हुआ है. मोदी सरकार को जबरदस्त भ्रष्टाचार से जुडी कुछ जानकारियों प्राप्त हुई हैं, जिनमें करीब 13 बैंकों के लेन-देन की जानकारी मिली है. 2 लाख से ज्यादा ऐसी फर्जी कंपनियों के बारे में पता चला है, जिनके जरिए कालेधन को सफेद बनाया जाता था.

खुलासे में पता चला है कि कई ऐसी फर्जी कंपनियों के 100-100 खाते थे. कुल 2,09,032 कंपनियों पर संदिग्ध गतिविधि की जानकारी के बाद रोक लगा दी गई है. इनमें से एक कंपनी के तो लगभग 2134 खाते थे. नोटबंदी के बाद इन फर्जी कंपनियों ने करीब 4573.87 करोड़ रुपए की लेन-देन करके कालेधन को सफ़ेद करने की कोशिश की थी, मगर इन्हे क्या पता था कि मोदी की नज़र इन लोगों पर पहले से ही बनी हुई थी.

बैंकों के खिलाफ भी होगी कार्रवाई

बता दें कि मोदी सरकार ऐसी शेल कंपनियों पर लगातार श‍िकंजा कस रही है. इससे पहले सरकार ने शेल कंपनियों से संबंध रखने वाले 4.5 लाख डायरेक्टर्स को अयोग्य करार भी दिया था. केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी ने कहा है कि कालेधन के ख‍िलाफ सरकार की लड़ाई जारी रहेगी.

समझिये कैसे होता आ रहा था मनी लॉन्ड्रिंग का ये खेल दशकों से. भ्रष्टाचारियों का कालाधन एक खाते से दूसरे खाते में होता हुआ सफ़ेद बनाया जाता था. लाखों ऐसी कंपनियों की मदद से सारा खेल भ्रष्ट कोंग्रेसी राजनेताओं की शह पर सालों से चल रहा था. इतने बड़े पैमाने पर भ्र्ष्टाचार होता रहा और इसमें नेताओं व् बैंक के भ्रष्ट कर्मचारियों की मिलीभगत ना हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता.


दशकों से चली आ रही भ्रष्टाचार व्यवस्था चकनाचूर

बड़े-बड़े सफेदपोश कारोबारियों समेत बड़े-बड़े नेता इसी तरह बैंकों की मिलीभगत द्वारा कालेधन को सफ़ेद करते आ रहे थे और इसी कालेधन का इस्तमाल चुनाव जीतने के लिए किया जाता था. सालों से जो गुंडे, बदमाश व् बाहुबली टाइप के अपराधी चुनाव जीतते आ रहे थे, वो सब इसी पैसे से होता था.

मगर नोटबंदी के एक ही वार से सारा खेल ही पलट चुका है. ऐसे भ्रष्ट लोगों ने जितना भी पैसा सफ़ेद करने की नीयत से बैंकों में जमा कराया था, वो सब अब उन्हें वापस तो मिलने से रहा. अब ये सारा पैसा देश के काम आएगा. ऐसी कंपनियों के पीछे जिन लोगों का हाथ है, अब सब जेल की हवा खाएंगे क्योंकि जांच तेजी से चल रही है.

गया सारा पैसा, जेल होगी सो अलग

कॉरपोरेट मामलों के मंत्री पीपी चौधरी ने कहा कि वैध कंपनियों को इस प्रक्रिया से कोई परेशानी नहीं होगी. उन्होंने कहा कि जो कंपनियां नियमों के विरुद्ध काम कर रही हैं,उनकी वजह से ही अन्य कंपनियों को परेशानी पेश आ रही है.

चौधरी ने एक इंटरव्यू में कहा कि सभी अयोग्य करार दिए गए डायरेक्टर्स की प्रोफाइल की जांच की जाएगी. केंद्र सरकार इससे पहले सितंबर महीने में 2.17 लाख से भी ज्यादा कंपनियों के नाम रिकॉर्ड से हटा चुकी है. यह वे कंपनियां थीं, जो पिछले काफी समय से कारोबार नहीं कर रही थीं.

देश में स्वच्छता आंदोलन चल रहा है, भ्र्ष्टाचारियों को सिस्टम से साफ़ करके देश को पवित्र किया जा रहा है. ऐसे में भ्रष्टाचारियों का भड़कना तो स्वाभाविक ही है. मगर जल्द ही इस सफाई के सुखद परिणाम जनता को देखने को मिलेंगे.


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