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कश्मीर पर आगबबूला हुए मोदी, एक फैसले से उड़ाए अलगाववादियों के होश, महबूबा के भी छूटे पसीने

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नई दिल्ली : कश्मीर में चल रही पाकिस्तान की नापाक योजनाओं का अंत होने वाला है. कश्मीरी अलगाववादियों पर शिकंजा कसता जा रहा है. आधे से ज्यादा अलगाववादी नेता जेल में हैं और जांच एजेंसियां ठुकाई कर उनसे सच उगलवा रही हैं. पत्थरबाजों के गैंग लीडर भी जेल में हैं और अपनी करनी का दंड भुगत रहे हैं. इसके बाद कश्मीर में पीएम मोदी ने एक और बेहद अहम् फैसला लिया है, जिसे देख सीएम महबूबा मुफ़्ती बुरी तरह से बौखला गयी हैं और अपने पाकिस्तान प्रेम का असली रूप दिखा रही हैं.

सीमा पार व्यापार बंद होता देख तड़प उठी महबूबा !

कांग्रेस की यूपीए सरकार ने 2008 में पाकिस्तान के साथ क्रॉस बॉर्डर ट्रेड की शुरुआत की थी. नवम्बर 2008 में मुंबई में पाक प्रायोजित आतंकी हमला होने के बावजूद ये पाकिस्तान के साथ ट्रेड बदस्तूर जारी रहा. आतंकियों की फंडिंग आखिर होती कैसे है, इसकी जांच में लगी जांच एजेंसी एनआईए को पता चला है कि पाकिस्तान लगातार सीमा पार व्यापार के जरिए भी आतंकियों की फंडिंग कर रहा है.

सुरक्षा के मद्देनज़र एनआईए ने गृह मंत्रालय से उरी और पुंछ से होने वाले क्रॉस बॉर्डर ट्रेड को बंद करने की सिफारिश की है. सूत्रों के मुताबिक़ मोदी सरकार ने इसे बंद करने का मन भी बना लिया है. लेकिन सरकार के इस फैसले को देख कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ़्ती बुरी तरह से तड़प उठी हैं. महबूबा ने क्रॉस बॉर्डर ट्रेड को बंद करने का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि वो केंद्र सरकार से अपील करती हैं कि वो लाहौर घोषणा को दोबारा से लागू करे, ताकि जम्मू एवं कश्मीर में शांतिपूर्वक रहा जा सके.


खुलकर अलगाववादियों को दिया समर्थन !

आतंकियों को पालने वाले हुर्रियत नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर भी महबूबा नाखुश नजर आईं. उन्होंने केंद्र सरकार पर हुर्रियत नेताओं के खिलाफ साजिश का आरोप तक लगा दिया. महबूबा ने कहा कि कश्मीर को लेकर हर तरह की सोच रखने वालों के साथ बातचीत की जानी चाहिए. यानी महबूबा के मुताबिक़ “भारत मुर्दाबाद” और “हम पाकिस्तानी हैं, पाकिस्तान हमारा है” इस तरह के नारे लगाने वालों के साथ भी केवल बातचीत करते रहना चाहिए.

दरअसल धारा-370 की आड़ में इन टुटपुँजिये नेताओं की राजनीतिक दुकाने चलती हैं. भारत सरकार से खरबों रुपये की मदद मिलती है सो अलग. मुफ्तखोरी की ऐसी आदत लग चुकी है कि इन दो कौड़ी के नेताओं को कश्मीर की समस्या से कोई सरोकार तक नहीं है. इन्हे पता है कि धारा-370 के ख़त्म हो जाने से इन नेताओं का राजनीतिक अस्तित्व ही ख़त्म हो जाएगा. यही इस तड़प के पीछे मुख्य कारण है.

बहरहाल ये तय माना जा रहा है कि मोदी सरकार जल्द ही धारा-370 को लेकर बड़ा फैसला ले सकती है. संविधान के अनुच्छेद 35(ए) को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. इसे लेकर भी महबूबा तड़प उठी हैं और उन्होंने मोदी सरकार को सीधे-सीधे धमकी देते हुए कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 35(ए) के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ को स्वीकार नहीं किया जाएगा. उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि यदि अनुच्छेद को खत्म किया जाता है तो कोई भी कश्मीर में भारत के राष्ट्रध्वज तिरंगे के शव को भी हाथ नहीं लगाएगा.


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