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आरएसएस के ये स्वयंसेवक बनेंगे यूपी के मुख्यमंत्री, लिया बाबा विश्वनाथ और काल भैरव का आशीर्वाद

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नई दिल्ली : यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बम्पर जीत के बाद से एक सवाल जो लगातार लोगों के मन में उठ रहा है, वो है कि यूपी में अगला मुख्यमंत्री आखिर कौन बनेगा. आखिर कौन है जो बीजेपी की ओर से प्रदेश की जनता से किये अपने वादे पूरे करेगा. इसे लेकर कई बड़े मंत्रियों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के नाम सामने आ रहे थे लेकिन अभी-अभी आयी एक बड़ी खबर के मुताबिक़ आखिरकार बीजेपी में एक नाम पर सहमति बन गयी है.

मनोज सिन्हा का नाम तय !

बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के जरिये से आयी इस जानकारी के मुताबिक़ केन्द्रीय संचार मंत्री मनोज सिन्हा का नाम यूपी सीएम के लिए तय कर लिया गया है. मनोज सिन्हा के नाम पर पीएमओ की ओर से भी भी हरी झंडी दिखा दी गयी है. खबर आयी है कि आज शाम 5 बजे तक उनके नाम का औपचारिक ऐलान भी कर दिया जाएगा.

दरअसल प्रक्रिया के अनुसार लखनऊ में आज बीजेपी विधायक दल की एक बैठक होगी, इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य सीएम पद के लिए मनोज सिन्हा के नाम का प्रस्ताव विधायकों के सामने रखेंगे. जिसके बाद केन्द्रीय पर्यवेक्षक भूपेन्द्र यादव और वेकैंया नायडू इस बारे में विधायकों की राय जानेंगे और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को इस बात की जानकारी देंगे.

विधायक दल की बैठक में विधायकों की राय लेने के बाद मनोज सिन्हा के नाम का औपचारिक ऐलान किया जाएगा. संघ ने भी सिन्हा के नाम पर सहमति जताई है और इसके साथ-साथ संघ ये भी चाहता कि पिछड़े और दलित वर्ग का भी यूपी में ख़ास ख़याल रखा जाए, इसलिए पिछड़े और दलित वर्ग से एक-एक उप मुख्यमंत्री भी बनाए जा सकते हैं.

ताकतवर नेता हैं सिन्हा !

फिलहाल मनोज सिन्हा मोदी सरकार के संचार मंत्री और रेल राज्यमंत्री हैं. वो 2014 के लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल के गाजीपुर सीट से चुनाव जीत कर सांसद बने थे. मनोज सिन्हा ने राजनीति में अपने कदम आईआईटी बीएचयू में छात्र नेता के तौर पर रखे थे.

पीएम मोदी और अमित शाह के साथ भी मनोज सिन्हा के अच्छे सम्बन्ध रहे हैं, मोदी और सिन्हा दोनों ही संघ प्रचारक रह चुके हैं और तभी से एक दूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं.

हालांकि पहले इस पद के लिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नाम की बात भी कही जा रही थी लेकिन राजनाथ ने खुद इसके लिए मन कर दिया था. जिसके बाद से बीजेपी में लगातार इस बात की चर्चा चल रही थी कि कौन इतनी बड़ी जिम्मेदारी उठाने के लिए उपयुक्त रहेगा, जो ना केवल केंद्र की योजनाओं को यूपी में सही तरीके से क्रियान्वित कर सके बल्कि प्रदेश की क़ानून व्यवस्था को भी बेहतर बना सके और सबको साथ लेकर चले.

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