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अभी-अभी : भारतीय सेना के लिए देवदूत बना ये शख्स, दिया ऐसा शानदार तोहफा, गदगद हुआ हर जवान


नई दिल्ली : सर्दी हो या गर्मी या फिर बरसात, रातों दिन भारतीय सेना के जवान सीमा पर देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं. दुश्मन की गोलियों का सामना छाती खोलकर करते हैं और कभी पीठ दिखाकर नहीं भागते. ऐसे वीर जवानों के लिए बुलेट प्रूफ जैकेटों का पर्याप्त इंतजाम तक कांग्रेस नहीं कर पायी. जो थोड़े-बहुत इंतजाम किये भी, उसमे भी करोड़ों के घोटाले कर डाले. लेकिन मोदी सरकार के दौरान देश के होनहार नौजवान ने सेना की तकलीफ को समझते हुए सेना को एक बेमिसाल तोहफा दिया है.

ये शख्स सालाना बचाएगा सेना के 20,000 करोड़ रुपये

इस होनहार व्यक्ति का नाम है शांतनु भौमिक. भारतीय वैज्ञानिक प्रोफेसर शांतनु भौमिक एक ऐसी तकनीक लेकर आए हैं, जिससे ना केवल लाखों सैनिकों की जान बचेगी बल्कि सेना को प्रतिवर्ष 20,000 करोड़ रुपये तक की बचत भी होगी.

प्रोफेसर शांतनु ने भारतीय सेना के जवानों के लिए एक बुलेटप्रूफ जैकेट बनाई है. पूर्ण रूप से स्वदेशी तकनीक से बनी यह जैकेट अल्ट्रा मॉडर्न लाइटवेट थर्मो-प्लास्टिक टेक्नॉलजी से बनी है और इसकी कीमत मात्र 50,000 रुपये होगी. बता दें कि फिलहाल भारत सेना की बुलेटप्रूफ जैकेट अमेरिका से खरीदता है, जो काफी महंगी पड़ती हैं. अमेरिका से खरीदी गयी बुलेटप्रूफ जैकेट अभी 1.5 लाख रुपये तक आती है.


वजन में बेहद हलकी, कीमत भी कम

लेकिन शांतनु भौमिक के इस जैकेट की कीमत मात्र 50,000 रुपये होगी. इस प्रकार भारत सरकार इन स्वदेशी जैकेटों की खरीद पर प्रतिवर्ष 20,000 करोड़ रुपये बचा पाएगी. इस प्रोजेक्ट पर रक्षा मंत्रालय की कमेटी ने मुहर भी लगा दी है. प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से हरी झंडी मिलते ही देश में ही बुलेट प्रूफ जैकेटों का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा.

सुरक्षाबलों व् सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली जैकेट का वजन 15 से 18 किलो तक होता है, लेकिन इस मॉडर्न जैकेट का वजन केवल डेढ़ किलोग्राम के करीब होगा. यानी जवानों को अधिक भार नहीं धोना होगा, जिससे उनकी कार्य क्षमता में इजाफा होगा. इसके अंदर कार्बन फाइबर की लेयर चढ़ी है, जिसके कारण ये जैकेट 57 डिग्री तक के अधिकतम तापमान में भी काम करेंगी.

देश की जरूरतें पूरी होने के बाद भारत सरकार इनका निर्यात करके देश के लिए पैसे भी जुटा सकती है. स्वदेश में ही इनका निर्माण होने से देश का पैसा देश में ही रहेगा और साथ ही देश के लोगों को रोजगार भी मिलेगा. हलके वजन वाली इस बेमिसाल जैकेट को देख सेना के जवान भी उत्साहित हैं. इनके इस्तमाल से प्रतिवर्ष सैकड़ों जवानों की कश्मीर में व् सीमा पर जान बच सकेगी.


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