Home > ख़बरें > खुशखबरी – मोदी सरकार अब करेगी ऐसा अनोखा काम जो पिछले साठ साल में कांग्रेस ने कभी सोचा ही नहीं

खुशखबरी – मोदी सरकार अब करेगी ऐसा अनोखा काम जो पिछले साठ साल में कांग्रेस ने कभी सोचा ही नहीं

नई दिल्ली : भारत रत्न जो भारत का सबसे बड़ा सम्मान है, उसे दिया जाता है जिसने भारत के लिए बेहद खास कार्य किया हो, भारत का सम्मान बढ़ाया हो लेकिन बड़े दुःख की बात है कि खेल जगत में हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले दिग्गज मेजर ध्यानचंद को अब तक भारत रत्न से नहीं सम्मानित किया गया है. पिछले साठ सालों से किसी सरकार ने इस महान खिलाडी के बारे में नहीं सोचा, लेकिन अब एक ऐसी खबर आ रही है जिसके अनुसार मोदी सरकार अब एक ऐसा शानदार कदम उठाने जा रही है जो सभी देशवासियों को गर्वान्वित कर देगी.

मोदी सरकार देगी हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न

पीटीआई समाचार एजेंसी के हवाले से खबर आ रही है कि केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल ने पीएम मोदी के कार्यालय को पत्र लिख भारत रत्न के लिए महान हाकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के नाम की सिफारिश कर दी है. उम्मीद की जा रही है कि यह सिफारिश जल्द ही मंजूर भी की जा सकती है. इस महान हाकी खिलाड़ी को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिलाने की मंत्रालय की यह सबसे अच्छी कोशिश बताई जा रही है. इस खबर के बाद पूरे सोशल मीडिया में मोदी सरकार की बहुत प्रशंसा करी जा रही है और साथ ही कांग्रेस पार्टी की बुराई जहाँ इंदिरा गाँधी ने खुद को ही भारत रत्न दे दिया था, पर ध्यानचंद को हमेशा दरकिनार कर दिया गया.

गोयल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “हां हमने ध्यानचंद को भारत रत्न के संदर्भ में प्रधानमंत्री को लिखा है. उन्हें मरणोपरांत यह सम्मान देना देश को उनकी सेवाओं की सच्ची श्रद्धांजलि होगी”.

साल 2013 में कांग्रेस ने सचिन तेंदुलकर को दिया था भारत रत्न

इससे पहले भी कई बार धयन्चन्द जी के लिए भारत रत्न की मांग अनेक बार उठायी जा चुकी है. ध्यानचंद ने भारत को तीन ओलिंपिक (1928, 1932 और 1936) में गोल्ड मेडल दिलाकर पूरे विश्वभर में देश का नाम गौरवान्वित करवाया था. साल 2013 में कांग्रेस सरकार ने क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर को खेल जगत से पहला खिलाडी चुना न की मेजर ध्यानचंद को.

ध्यानचंद के बेटे अशोक कुमार समेत पूर्व भारतीय कप्तानों अजित पाल सिंह, जफर इकबाल और दिलीप टिर्की उन 100 पूर्व खिलाड़ियों में शामिल थे, जो कि मेजर ध्यानचंद की लगातार अनदेखी करने पर भी धरने पर बैठे रहे थे. इससे पहले भी साल 2011 में भी कांग्रेस सरकार ने संसद के 82 सदस्यों का आग्रह स्वीकार नहीं किया था, जिन्होंने इस सम्मान के लिए हॉकी के जादूगर ध्यानचंद का समर्थन किया था.

क्यों कहा जाता है मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर ?

एक वक़्त ऐस अभी था जब भारतीय हॉकी टीम इतनी मजबूत हुआ करती थी कि उसे हरा पाना दुनिया में किसी भी देश की टीम के लिए असंभव जैसा था. मेजर ध्यानचंद उस समय भारत हॉकी कि रीढ़ कि अहद्दी कहे जाते थे. आज भी हॉकी में ज़बरदस्त प्रदर्शन की वजह से उनकी तुलना फुटबॉल में पेले और क्रिकेट में ब्रैडमैन से की जाती है.

वीडियो देखिये

एक वक़्त तो ऐसा भी था जब बिना जूते पहने मेजर ध्यानचंद ने जर्मनी को ओलंपिक फाइनल में दी मात

इस न्यूज़ को अपने मित्रों के साथ शेयर करना न भूलें। आपकी सुविधा के लिए शेयर बटन्स नीचे दिए गए हैं।
हिंदी न्यूज़ से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें


फेसबुक पेज लाइक करें

loading...

Comments