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राजस्थान में मोदी सरकार का बड़ा ऐतिहासिक फैसला, वामपंथियों और कांग्रेसियों में मची चीख-पुकार

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जयपुर : अभी-अभी एक बड़ी खबर सामने आ रही है, कहा जा रहा है कि इस खबर के सामने आते ही फ़र्ज़ी सेक्युलरों और वामपंथियों के पेट में तेज दर्द शुरू हो गया है और अवार्ड वापसी गैंग एक बार फिर से अपने अवार्ड वापस कर सकता है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ साल 1576 में हुआ राजस्थान के मध्यकालीन इतिहास का सबसे चर्चित हल्दीघाटी युद्ध मुगल सम्राट अकबर ने नहीं बल्कि हिन्दू सम्राट महाराणा प्रताप ने जीता था लेकिन तुष्टिकरण के चलते वामपंथियों और कांग्रेसियों ने इतिहास से छेड़छाड़ करके इस युद्ध को अनिर्णायक बताया था. लेकिन अब मशहूर इतिहासकार डॉ. चन्द्रशेखर शर्मा के ताजा शोध का हवाला देते हुए अब राजस्थान की बीजेपी सरकार इतिहास की किताबों में इस ऐतिहासिक घटना को ठीक करने जा रही है.

महाराणा प्रताप ने जीता था ‘हल्दीघाटी’ युद्ध, अब सरकार बदलेगी राजस्थान का इतिहास!

डॉ. शर्मा ने इसके ऊपर शोध किया है और उन्हें इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि इस युद्ध में अकबर बुरी तरह हार गया था और महाराणा प्रताप युद्ध में विजेता बने थे. हाल ही में हुई राजस्थान विश्वविद्यालय सिंडिकेट की बैठक में बीजेपी विधायक और राजस्थान सरकार के प्रतिनिधि मोहनलाल गुप्ता ने हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की विजय का मुद्दा उठाते हुए कॉलेज शिक्षा पाठ्यक्रम में इसका उल्लेख किए जाने की मांग रखी है.

विश्वविद्यालय के कुलपति पद का अतिरिक्त कार्यभार संभालने वाले संभागीय आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बीजेपी विधायक के इन सुझावों को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि वो इस युद्ध से जुडी सिफारिशों को “हिस्ट्री बोर्ड ऑफ स्टडीज” के पास जांच के लिए भेज रहे हैं. यानि अब माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम की तरह जल्द ही कॉलेज पाठ्यक्रम में भी बदलाव किये जाएंगे और अकबर महान की जगह महराणा प्रताप महान कहलायेगे.


हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप की जीत के सबूत

राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय में उदयपुर के मीरा कन्या महाविद्यालय के प्रोफेसर और इतिहासकार डॉक्टर चन्द्रशेखर शर्मा ने अपने शोध में महाराणा प्रताप के समकालीन ताम्र पत्रों के आधार पर उन्होंने हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के विजेता होने का दावा किया है. डॉ. शर्मा के अनुसार हल्दीघाटी का ये युद्ध मेवाड़ तथा मुगलों के बीच 18 जून 1576 को हुआ था. तुष्टिकरण के चलते अभी तक इस युद्ध को इतिहास में अनिर्णायक ही बताया जाता रहा. लेकिन वास्तव में महाराणा प्रताप ने इस युद्ध में अकबर के छक्के छुड़ा दिए थे. डॉ. शर्मा ने अपने शोध से जुड़े सबूत राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय में जमा करा दिए हैं.

डॉ. शर्मा के मुताबिक़ इस युद्ध के बाद अगले एक साल तक महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी के निकट के गांवों की जमीनों के पट्टे ताम्र पत्र के रूप में जारी किए थे. इन ताम्र पत्रों पर एकलिंगनाथ के दीवान प्रताप के हस्ताक्षर थे. उस वक़्त केवल एक राजा ही जमीनों के पट्टे जारी कर सकता था.

अकबर महान की जगह महराणा प्रताप कहलायेगे महान

डॉ. शर्मा के मुताबिक़ उनके शोध में सामने आया है कि हल्दीघाटी युद्ध के करारी हार के बाद मुग़ल सम्राट अकबर अपने सेनापति मान सिंह व आसिफ खां से बेहद खफा हुए थे. उन्होंने दोनों को छह महीने तक दरबार में ना आने की सजा भी दी थी. यदि मुगल सेना इस युद्ध को जीतती, तो अकबर अपने सबसे बड़े विरोधी महाराणा प्रताप को हराने वालों को दंड देने की जगह पुरस्कृत करते. मेवाड़ के कई अन्य इतिहासकार भी इस शोध को सही बता रहे हैं.

खैर अब जल्द ही बीजेपी सरकार इतिहास की पुस्तकों को सही करने जा रही है. इतिहास को तोड़-मरोड़ कर दिखाई गयी ऐसी कई घटनाओं को अब तथ्यों के आधार पर सही करके लोगों को उनके गौरवपूर्ण इतिहास से अवगत कराया जाएगा.


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