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पीएम मोदी के मिशन में मद्रास हाईकोर्ट ने अड़ाई टांग, ख़ुशी से नाच उठे ओवैसी, आजम और वामपंथी

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चेन्नई : ट्रिपल तलाक जैसी कुरीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है. मुस्लिम महिलाएं दशकों से उनके शोषण की इस कुप्रथा को ख़त्म करने के लिए सरकार व् न्यायालयों से गुहार लगाती आ रही हैं लेकिन देश की अदालतों में हिम्मत ही नहीं हो रही कि वो कट्टरपंथियों द्वारा लागू की गयी इस कुप्रथा को ख़त्म कर पाएं. सुप्रीम कोर्ट में काफी वक़्त चली सुनवाई में अलग-अलग धर्मों के जजों की बेंच बनायी गयी, जिसने गर्मी की छुट्टियों के बाद फैसला सुनाने की बात कहकर मामले को टाल दिया.

नए पशु व्यापार नियम पर मद्रास हाईकोर्ट की रोक

अब देखिये इन्ही अदालतों का दूसरा रूप, गाय ह्त्या ना हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में पशु बिक्री को लेकर नए नियम जारी किए थे. जिसके बाद कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने केरल में सरेआम गाय काट कर बीफ पार्टी का आयोजन किया. गाय देश में जरूर कटे इसे लेकर आनन्-फानन में मामला अदालत पहुंच गया और मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने तुरंत बिना किसी देरी के केंद्र सरकार के नए नियमों पर रोक लगा दी.

उच्च न्यायालय ने ना केवल केंद्र सरकार द्वारा पशु बिक्री को लेकर जारी किए गए नए नियमों पर रोक लगाई बल्कि केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस पर चार सप्ताह में जवाब भी मांगा है. दिवाली, होली और जल्लिकट्टु पर फैसले सुनाते वक़्त अदालतों की तेजी देख मन में गर्व होता है लेकिन ट्रिपल तलाक, बहु विवाह, गौ ह्त्या जैसे मामले कैसे लम्बे खिंचते चले जाते हैं, इसके पीछे का राज तो अब जज साहब ही जाने.

वैसे दुनिया के हर देश में बैन हो चुके ट्रिपल तलाक पर भी एक ही दिन या फिर एक ही हफ्ते में फैसला क्यों नहीं सुनाया गया, इस बारे में प्रश्न उठाने का हक़ किसी को है या नहीं? आखिर जो अदालत जल्लिकट्टु पर फ़टाफ़ट प्रतिबंध लगा सकती है, जो गाय को काटने से बचाने के लिए केंद्र सरकार के नियमों पर भी रोक लगा सकती है, वो एक विशेष वर्ग से जुड़े मामलों पर मौन व्रत क्यों धारण कर लेती है? ये कैसा इन्साफ यही? किसी किस्म का डर है या फिर अदालतें भी तुष्टिकरण की नीति पर चलने में यकीन रखती हैं?

बता दें कि केंद्र सरकार ने देश में पूरी तरह से गौ हत्या पर पाबंदी लगाते हुए गोकशी को रोकने के लिए एक नया तरीका निकाला था, जिसके तहत सरकार ने पशु क्रूरता अधिनियम, 1960 के अंतर्गत कत्लखानों में गायों के साथ कई अन्य जीवों की खरीद-फरोख्त पर नए नियम बनाए थे.

इन नए नियमों के मुताबिक अब कोई भी मवेशी को तब तक बाजार में बेचने के लिए नहीं ला सकता जब तक कि वह यह लिखित घोषणापत्र नहीं देता कि मवेशी को मांस करोबार के लिए हत्या करने के मकसद से नहीं बेचा जा रहा है. इसके अलावा मवेशी केवल उस व्यक्ति को ही बेचा जा सकेगा जो दस्तावेज दिखा कर यह साबित करेगा कि वह किसान है.

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