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ब्रेकिंग : चीनी सीमा के नजदीक भारत ने किया सबसे जबरदस्त काम, चीन में मची खलबली !

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नई दिल्ली : 1962 में चीन ने भारत पर हमला करके भारत की काफी जमीन अपने कब्जे में ले ली थी. चीन ने लद्दाख में और मैकमोहन रेखा के पार एक साथ हमले शुरू करके पश्चिमी क्षेत्र में चुशूल में रेजांग-ला एवं पूर्व में तवांग पर कब्ज़ा कर लिया था. केवल इतना ही नहीं बल्कि 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध में चीन ने पाकिस्तान को समर्थन भी किया था. यही कारण है कि पीएम मोदी चीन के साथ सटी भारतीय सीमा पर ख़ास ध्यान देते आये हैं.


चीनी सीमा के नजदीक भारत ने बनाया सबसे लंबा पुल

इस युद्ध में तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू की अदूरदर्शिता के चलते भारत को हार का मुँह देखना पड़ा था. युद्ध के बाद भारतीय सेना में व्यापक बदलाव आये और भविष्य में इसी तरह के संघर्ष के लिए तैयार रहने की जरुरत महसूस की गई. बताया जा रहा है कि भारत ने चीनी सीमा के नजदीक अपना सबसे लंबा पुल बना लिया है. ब्रह्मपुत्र नदी पर बने इस पुल का उद्धाटन 26 मई को पीएम मोदी करेंगे. असम के ढोला-सादिया में ब्रह्मपुत्र नदी पर बना ये पुल 9.15 किलोमीटर लंबा है.

इसकी सबसे ख़ास बात तो ये है कि इस पुल पर से 60 टन तक का युद्ध टैंक भी गुजर सकेगा. इसी से ये साबित होता है कि इसे सैन्य ताकत को ध्यान में रखते हुए ही बनाया गया है. पुल का डिजाइन इस तरह का बनाया गया है कि ये सैन्य टैंकों का भार आसानी से सहन कर सके और युद्ध होने की स्थिति में टैंकों को इसपर से ले जाया जा सके.


तकरीबन 950 करोड़ रूपये की लागत से बने इस पुल को चीन-भारत सीमा पर, खास तौर पर पूर्वोत्तर में भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. इसी के साथ इस पुल के जरिये से अरूणाचल प्रदेश और असम के लोग सड़क मार्ग से भी यात्रा कर सकेंगे.

बता दें कि असम और अरूणाचल प्रदेश भारत के लिए सामरिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हैं. ये पुल भारत-चीन के काफी करीब बनाया गया है, लिहाजा किसी भी युद्ध के दौरान सैनिकों और तोपों की तेजी से आवाजाही में इससे काफी सहायता मिलेगी. ये पुल असम की राजधानी दिसपुर से लगभग 540 किलोमीटर दूर और अरूणाचल प्रदेश की राजधानी इटानगर से तकरीबन 300 किलोमीटर दूरी पर है. इसके अलावा चीनी सीमा से पुल की हवाई दूरी 100 किलोमीटर से भी कम है. इसे भारत की की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है.


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