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घाटी में शुरू हुआ बड़ा संग्राम, जम्मू कश्मीर पुलिस ने भारतीय सेना के खिलाफ ही ले लिया एक्शन !

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नई दिल्ली : विद्रोह और कलह के बीच कश्मीर से एक ऐसी खबर सामने आ रही है, जिसने सभी को चौंका दिया है. सेना को घाटी में मौजूद आतंकियों को सीधा ठोकने के आदेश मिले हुए हैं. अपने काम को वो बखूबी अंजाम भी दे रही है. आतंकियों के एनकाउंटर के दौरान कई बार पत्थरबाज उन्हें बचाने की कोशिश भी करते हैं, जिसमे कभी-कभार पत्थरबाजों को भी गोली लग जाती है.

सेना के खिलाफ जम्मू कश्मीर पुलिस !

खबर है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस भी अब अलगाववादियों और आतंकियों के पक्ष में खड़ी होती नज़र आ रही है और सेना के खिलाफ साजिशें कर रही है. सेना के जवानों को फर्जी केसों में फंसाया जा रहा है. सेना के जवानों के ऊपर दर्ज हो रही एफआईआर और उनकी गिरफ्तारी से पुलिस और सेना के बीच तनाव का माहौल बन गया है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के दिमाग इस कदर खराब हो चुके हैं कि 12 राष्ट्रीय राइफल के कमांडिंग अफसर कर्नल समरेश चटर्जी को जम्मू कश्मीर के पुलिस डायरेक्टर जनरल को एक पत्र लिखना पड़ा. एक सितंबर को चटर्जी ने पत्र लिखकर पुलिस डायरेक्टर जनरल को बनिहाल टाउन में लोकल पुलिस की मनमानी और सेना विरोधी भावनाओं के बारे में बताया.

झूठे मामलों में फंसाने की साजिश !

कमांडिंग अफसर ने 1 सितंबर की घटना का जिक्र करते हुए कहा, जब एक गाड़ी एक सैन्य ट्रक के पीछे गिर गई, जिसके बाद कार में सवार दो नागरिकों की मौत हो गई. इसके बाद उस ट्रक ड्राइवर को आर्मी एक्ट के तहत मिलिट्री कस्टडी में ले लिया गया था. लेकिन बनिहाल के पुलिस अधिकारियों ने उसे अपनी कस्टडी में रखने पर जोर दिया.


जब सेना के अधिकारियों ने पुलिस को समझाने की कोशिश की तो उलटा इन पुलिस अफसरों ने सेना के जवानों के खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया. अपने तीन पेज के पत्र में सीओ ने बताया कि, ‘अहंकार से प्रेरित’ बनिहाल के पुलिस अफसरों ने चटर्जी और उनके सेकंड इन-कमांड दीपक सुयल के ऊपर आरपीसी के सेक्शन 353 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कर ली. इस एफआईआर में कहा गया है कि सेना के इन अधिकारियों ने बल प्रयोग करके पुलिस अफसरों को उनके कर्तव्य से रोका.

कमांडिग अफसर ने राज्य के डीजीपी से इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए कहा, ताकि सेना और पुलिस के बीच रिश्ते फिर से बेहतर हो सकें. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं से सुरक्षा जवानों का मनोबल और प्रेरणा पर असर पड़ता है. ये केवल एक घटना ही नहीं बल्कि ऐसी अनेकों घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमे पुलिस ने सेना के काम में अड़ंगा डालने की कोशिश की है. सेना के जवानों को फर्जी केस में फंसाने की कोशिशें की गयी हैं.

सीओ ने अपने पत्र में इसी साल अप्रैल महीने में हुई एक और ऐसी ही घटना का जिक्र किया गया है. जिसमे कश्मीर पुलिस ने सेना के एक अफसर को तकरीबन एक हफ्ते तक अवैध रूप से अपनी कस्टडी में रखा था. इसके बाद सेना इस मुद्दे को हाईकोर्ट ले जाने के लिए मजबूर हुई थी.

स्पष्ट है कि अलगाववादियों का रुख कश्मीर पुलिस पर भी हावी हो रहा है और वो भी सेना को अपने दुश्मनों की तरह देख रहे हैं. सेना को सहयोग देने की जगह सेना के खिलाफ ही मामले खड़े किये जा रहे हैं. ऐसे में या तो पुलिस अधिकारी अपने रवैय्ये में बदलाव लाएं वरना सेना यदि अपनी पर आ गयी और कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ गया तो फिर इन्ही पुलिस वालों को काफी तकलीफ होगी.


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