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ममता के बंगाल से आयी ये खबर पढ़कर आपके पैरों तले जमीन खिसक जायेगी, पूरे भारत में गुस्से की लहर

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कोलकाता : पिछले काफी वक़्त से कश्मीर घाटी सुलग रही है, आये दिन पत्थरबाजी और आतंकी वारदात हो रही हैं लेकिन अब ममता बनर्जी के बंगाल की हालत भी कश्मीर जैसी हो गयी है. वैसे तो ममता पर हिन्दू विरोधी होने के आरोप पहले भी लगते आये हैं, लेकिन अब वहां वामपंथियों का आतंक भी सर चढ़कर बोलने लगा है. पत्थरबाजी, हिंसा अब कोलकाता में भी शुरू हो गयी है.


कोलकाता बन रहा अगला ‘कश्मीर’

कल कोलकाता में भी कश्मीर जैसा आलम देखने को मिला, जब यहां पर कुछ वामपंथियों ने कश्मीर के पत्थरबाजों की तरह कोलकाता पुलिस पर बेरहमी से पत्थरबाजी कर दी. लेफ्ट और ममता के आपसी संघर्ष के बीच में आम जनता पिस रही है. लेफ्ट राज्य में अपनी मौजूदगी दिखाने की कोशिशों में लगा हुआ था, वहीँ ममता की पुलिस उन्हें काबू में रखने में जुटी हुई थी.

कोलकाता के मायो और नई दिल्ली रोड के चौराहे पर कई वामपंथियों ने एक पुलिस अफसर को सड़क पर गिराकर लात-घूंसों और बांस के डंडे से उसकी बुरी तरह पिटाई कर दी. टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक इस पुलिस अफसर की पहचान 40 वर्षीय बोद्धिसत्व प्रमाणिक के तौर पर हुई, जिनकी पोस्टिंग बुर्राबाजार पुलिस थाने में हैं.

वामपंथी गुंडों ने इस कदर उन्हें पीटा कि उनकी दो अंगुलियों में फ्रैक्चर हो गया और शरीर में कई जगहों पर सूजन आ गयी. वामपंथियों के हमले के दौरान उनके हेलमेट का सनसाइड टूट गया और उनकी शर्ट पर लगा उनका नेमटैग भी फट गया. प्रदर्शनकारियों की भीड़ को तितर-बितर करने के दौरान ये पुलिस अफसर अपने दल से अलग हो गए थे, उन्हें अकेला देख प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेर लिया और फिर जमकर पीटा.


इन वामपंथी प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरबाजी भी की, जिसमे कई पुलिसवाले घायल हो गए. स्थिति हाथ से निकलती देख पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया और भीड़ को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े.

लेफ्ट और ममता के खींचतान में जनता बेहाल

वामपंथी पार्टियों ने तृणमूल अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की किसान नीति और राज्य में बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ बंद का ऐलान किया है. वामपंथी दलों ने राज्य के सचिवालय ‘नबन्न भवन’ के बाहर चार लाख कार्यकर्ताओं को इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा है. सीपीएम ने लाखों कार्यकर्ताओं से सड़क पर उतरने का आवाहन करने के बाद कहा है कि लाखों कार्यकर्ता कोलकाता के सड़कों पर अपने लोकतांत्रिक अधिकार के लिए उतरे हैं.

कुल मिलाकर लेफ्ट और ममता के बीच की खींचतान के कारण पब्लिक प्रॉपर्टी को नुक्सान पहुजाया जा रहा है और प्रदर्शन के नाम पर सरेआम हिंसा की जा रही है, जिससे पुलिस व् प्रशासन के साथ-साथ आम जनता का भी जीना हराम हो गया है.

वैसे ममता के राज में हिंसा होना कोई नयी बात नहीं है, इससे पहले भी बंगाल कई बार सांप्रदायिक हिंसा की आग में जलता आया है और वोटबैंक के लिए तुष्टिकरण की राजनीति में लगी ममता पर दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई ना करने के आरोप भी लगते आये हैं.


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