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बिहार में नितीश के तख्तापलट की सनसनीखेज साजिश का पर्दाफ़ाश, पीएम मोदी ने बचाई नितीश की जान

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नई दिल्ली : 2014 के लोकसभा के दौरान भले ही नितीश कुमार ने पीएम मोदी का साथ छोड़ दिया था लेकिन पीएम मोदी ने फिर भी नितीश कुमार की ऐसी सहायता की जिसका अहसान उतारना उनके लिए बेहद मुश्किल होगा. अभी-अभी आयी एक बेहद अहम् खबर से बिहार की राजनीति में हड़कंप मच गया है और कहा जा रहा है कि महागठबंधन अब किसी भी वक़्त टूट सकता है.

नितीश के तख्तापलट की साजिश नाकाम !

दरअसल आजतक में छपी एक खबर के मुताबिक़ पीएम मोदी ने बिहार में नितीश कुमार का तख्ता पलट होने से बचा लिया वरना लालू यादव अब तक उनका तख्ता पलट कर अपने बेटे तेजस्वी यादव को बिहार का मुख्यमंत्री बना चुके होते.

नितीश कुमार की पीठ में छुरा घोंपने की पूरी साजिश रची जा चुकी थी. सारा खेल यूपी चुनाव के नतीजों पर टिका हुआ था. आजतक की इस खबर के मुताबिक़ बाकायदा एक रणनीति के तहत बिहार में तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाये जाने की मांग उठायी जाने लगी. ऐसा माहौल बनाया जाने लगा जिससे लगे कि बिहार में सभी चाहते हैं कि नितीश कुमार को हटाकर तेजस्वी को मुख्यमंत्री बना दिया जाए.

सियासी साजिश से नितीश भी हैरान ?

खबर के मुताबिक़ लालू ने साजिश रची थी कि यूपी में समाजवादी पार्टी की जीत के बाद एक महीने के अंदर-अंदर वो अपनी पार्टी आरजेडी का समाजवादी पार्टी में विलय कर देंगे. इस योजना का संकेत अखिलेश यादव ने एक इंटरव्यू के दौरान तब भी दिया था जब उन्होंने कहा था कि यूपी में जीत के बाद वो कांग्रेस, ममता और लालू के साथ 2019 की तैयारी करेंगे.

लेेकिन यूपी में पीएम मोदी की ऐसी आंधी चली कि सपा के साथ-साथ कांग्रेस और बसपा के भी सभी अरमान हवा में उड़ गए. इसी के साथ साथ लालू यादव के दिल के अरमान भी आसुओं में बह गए. शायद यही वजह है कि यूपी के नतीजों से लालू को इतना धक्का पहुचा कि होली पर भी उनके घर पर सन्नाटा बिखरा पड़ा था.


नितीश ने भी खेला अपना दांव !

वहीँ नितीश को भी लालू की इस साजिश पर संदेह हो गया था, जिसके चलते नितीश ने यूपी चुनाव लड़ने से ही इनकार कर दिया और साथ ही यूपी में प्रचार के लिए भी वो लालू के साथ नहीं गए. नीतीश के चुनाव ना लड़ने के फैसले से सीधा फायदा बीजेपी को पूर्वांचल में हुआ, जहां पर कुर्मी मतदाताओं की अच्छी खासी आबादी है. नीतीश कुमार खुद भी कर्मी जाति के हैं और उनके प्रचार करने से बीजेपी को सीधा नुक्सान होता और सपा के जीतने की संभावना बढ़ जाती.

हालांकि नितीश के बिना भी लालू यादव खुद अकेले ही प्रचार के लिए पूर्वांचल पहुच गए थे. अपनी साजिश को पार लगाने के लिए वो किसी भी तरह से यूपी में सपा की जीत चाह रहे थे. आपको बता दें कि बिहार में आरजेडी के पास 80 और कांग्रेस के पास 27 विधायक हैं. बहुमत के लिए केवल 15 अन्य विधायकों की जरुरत पड़ती जिसका इंतजाम लालू के लिए कोई ख़ास मुश्किल नहीं होता.

प्रचंड मोदी लहर में लालू का काम खराब !

राजनीति के मंझे हुए नेता लालू यादव कोई भी जोड़-तोड़ करके 15 विधायकों का इंतजाम तो कर ही लेते. जिसके बाद नितीश के साथ गठबंधन तोड़ कर खुद सरकार बनाते जिसमे तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाया जाता और लालू खुद राष्ट्रीय राजनीति में कूद पड़ते. लेकिन लालू की सभी योजनाएं मोदी की प्रचण्ड लहर में बह गयीं.

अब मजबूरी में उनके पास बिहार में महागठबंधन को बचाये रखने के अलावा कोई और चारा भी नहीं है. हालांकि कहा जा रहा है कि नितीश सब कुछ देख-समझ रहे हैं और उन्हें अपने सच्चे दोस्तों और अवसरवादी साथयों में अंतर साफ़ दिखाई दे रहा है. जिसके चलते जल्द ही बिहार में बड़ा उलटफेर होने की पूरी-पूरी संभावना है. सूत्रों के मुताबिक़ यूपी में सरकार बनाते ही बिहार में महागठबंधन भी टूट जाएगा और बीजेपी के साथ मिलकर नितीश बिहार में दोबारा सरकार बनाएंगे.


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