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बंगाल के बाद केरल में भी साम्प्रदायिक हिंसाओं का दौर, भारत बढ़ रहा है एक और विभाजन की ओर?

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केरल : हाल ही में बंगाल में हुए साम्प्रदायिक दंगों ने देश को झकझोर के रख दिया, मगर अब हिंसा की घटनाओं में केरल का नाम भी जुड़ गया है। केरल में काफी वक़्त से आरएसएस और बीजेपी के कार्यकर्ताओं पर हमलों के सिलसिले जारी हैं। ताजा घटना पलक्कड जिले के कांजीकोड में घटी है, यहां सीपीएम के गुंडों ने एक भाजपा कार्यकर्ता के घर को आग लगा दी।

आगजनी के इस हमले में परिवार के चार सदस्य बुरी तरह झुलस गए हैं। ख़बरों के मुताबिक़ लेफ्ट के गुंडे अक्सर ही भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता और पंचायत के पूर्व सदस्य कन्नन के घर जाकर उन्हें धमकाया करते थे। बुधवार सुबह गुंडों ने उनके घर के बाहर खड़ी बाइक में आग लगा दी। आग लगने से बाइक की पेट्रोल टंकी फट गयी, जिसकी वजह से आग फ़ैल गयी ओर कुछ ही मिनट में आग ने उनके घर को भी अपनी चपेट में ले लिया।

सबसे ज्यादा हैरानी की बात तो ये है कि जहां एक ओर देश के बिकाऊ मीडिया चैनल इस खबर से किनारा कर रहे हैं, वहीँ दूसरी ओर जो कुछ चैनल्स इस खबर को दिखा भी रहे हैं वो इसे गैस सिलेंडर फटने से हुआ हादसा बता रहे हैं। जबकि केरल के लोकल मीडिया ने साफ शब्दों में बताया है कि गुंडों ने भाजपा नेता के पूरे परिवार को घर में बंद करके बाहर से आग लगाई थी।

घर में जलाकर मारने की कोशिश

आगजनी के वक़्त कन्नन अपने परिवार के साथ घर के अंदर ही थे। तेजी से फैलती हुई आग बहुत जल्द उनके किचन तक पहुंच गई और उसके बाद गैस के सिलेंडर में भी धमाका हो गया। इस वीभत्स हमले में कन्नन, उनकी पत्नी, भाई और एक बच्चा बुरी तरह आग में झुलस गए। चश्मदीदों ने बताया कि सीपीएम कार्यकर्ता हथियारों से लैस थे ओर वो तब तक घर के बाहर ही खड़े रहे जब तक आग ने फैलकर पूरे घर को चपेट में नहीं ले लिया। कन्नन की पत्नी इस आगजनी में सबसे बुरी तरह झुलसी हैं और उनकी हालत बेहद नाजुक है। आग में जलने से उनका घर भी पूरी तरह से बर्बाद हो गया है।

हमलावरों को है पुलिस की शह

कन्नन के घर पर आगजनी करने वाले सीपीएम के हमलावर पूरे इलाके में कुख्यात हैं। इसके बावजूद पुलिस ने इन गुंडों को अभी तक हिरासत में नहीं लिया है। पुलिस इसे आपसी रंजिश का मामला बताकर टालने की कोशिशों में लगी है। असल में केरल में हिंदूवादी ताकतों के खिलाफ ज्यादातर वारदात सीपीएम और कट्टरपंथी ताकतों की मिलीभगत से हो रही है। इन कट्टरपंथियों के निशाने पर ज्यादातर दलित हिंदू होते हैं। कुछ दिन पहले भी एक दलित छात्रा जीशा का बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी, उस वक़्त भी सीपीएम सरकार की भूमिला बेहद संदिग्ध रही थी।


मुख्यमंत्री पी विजयन के इशारे पर हत्याएं!

पिछले काफी वक़्त से केरल में की जा रही राजनीतिक हत्याओं में मुख्यमंत्री पी विजयन का हाथ होने के आरोप लगते रहे हैं। इतना ही नहीं केरल के मुख्यमंत्री विजयन पर आरोप लग चुके हैं कि उन्होंने अपने गांव में भी आरएसएस और भाजपा के कई कार्यकर्ताओं की क्रूरता से हत्या करवाई है। उनके बारे में कहा जाता है कि वो मुख्यमंत्री बनने से पहले कहा करते थे कि आरएसएस और भाजपा के कार्यकर्ताओं की हत्या करके उनकी लाश पर नमक डाल देना चाहिए ताकि कोई सबूत ही न बचे।

सबसे हैरानी की बात ये है कि इन हत्याओं पर दिल्ली का मीडिया कभी एक शब्द भी नहीं बोलता है। केरल में संघ और भाजपा के कार्यकर्ताओं की एक के बाद एक की जा रही हत्याओं के बावजूद केंद्र अब तक केरल सरकार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में नाकाम रहा है। समस्या ये है कि यदि केंद्र सरकार कोई एक्शन लेती है तो दिल्ली में बैठा वामपंथी मीडिया तुरंत हंगामा मचाना शुरू कर देगा। इस गुंडागर्दी ओर हत्याओं को लेकर केरल के लोगों में अब गुस्सा बढ़ने लगा है।

अब आपकी बारी

कश्मीर से हिंदुओं का पलायन पहले ही हो चुका है, बंगाल में भी हिंदुओं के खिलाफ हिंसा हो रही है और केरल में भी हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं। क्या भारत एक और विभाजन की तरफ बढ़ रहा है? अपनी राय आप कमेंट द्वारा शेयर कर सकते हैं।


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