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आप तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के इंतज़ार में हैं,वहां केरल कोर्ट ने सुनाया हाहाकारी फैसला

तिरुवनंतपुरम : देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक पर 11 मई से चली आ रही सुनवाई पूरी हो गयी है. कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. ये सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर के नेतृत्व वाली पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ तीन तलाक की संवैधानिक वैधता पर फैसला सुनाएगी. लेकिन इस बीच केरल की एक कोर्ट ने अपना तीन तलाक पर फैसला सुना भी दिया है, जिससे कम से कम केरल की मुस्लिम महिलाओं के लिए रहत की खबर आयी है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केरल के इस कोर्ट में पांच साल से अटका हुआ एक मामला है जिसमे मालाप्पुरम के निवासी अली फैजी ने 2012 में अपनी पत्नी जमीला को रजिस्टर्ड डाक के जरिये तलाक़ भेज दिया था. जिसे उसकी पत्नी ने तलाक़ को माने से इंकार कर दिया था. इस पर केरल के कोर्ट के जज श्री रमेश भाई ने फैसले सुनाया कि इस तरह डाक से दिया हुआ तलाक़ पूरी तरह अमान्य और अवैध है.

केरल के कोर्ट ने कहा अवैध है तीन तलाक़

जज रमेश भाई ने अली फैजी की याचिका को ख़ारिज करते हुए बताया कि इस्लामी कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और ना ही तलाक का कोई वाजिब कारण ही दिया गया है. जज ने केरल और कर्नाटक उच्च न्यायालयों के पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि वैध तलाक तभी हो सकता है जब पति पत्नी के बीच सारे समझौते के प्रयास विफल हो चुके हो पर अली फैजी ने ऐसा कोई प्रयास नहीं किया. इसलिए कोर्ट इस तरह दिए गये तलाक़ को मानने से इंकार करती है और इसे पूरी तरह अवैध बताती है. यही नहीं 2012 में दिए तलाक़ के बाद अली फैजी तीन और शादियां कर चुका है.

केरल के कोर्ट के इस फैसले से उन तमाम मुस्लिम महिलाओं के लिए राहत की खबर आयी है जो कि तीन तलाक से पीड़ित हैं और वर्षों से इसके खिलाफ कोर्ट में जंग लड़ रही हैं.

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