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मस्जिदों को लेकर मुसलमानों ने लिया बेहद चौंकाने वाला फैसला, देश में आज तक नहीं हुआ था ऐसा

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केरल : अप्रैल के महीने में गायक सोनू निगम ने ट्विटर पर एक मैसेज देकर बहुत बड़ी बहस छेड़ दी थी. उन्होंने मस्जिदों में 5 बार नमाज़ के वक़्त अज़ान लाउडस्पीकर पर अदा करने का मुद्दा उठाया था. जिस पर पूरे देश में काफी विवाद खड़ा हुआ था. सोनू निगम ने यह भी कहा था कि अजान की आवाज से उन्हें जल्दी उठना पड़ता है. वहीँ अब केरल की इस मस्जिद ने लाउड-स्पीकर को लेकर बेहद चौकाने वाला फैसला सुना दिया है.

5 बार की जगह सिर्फ एक बार ही अज़ान होगी अब

अज़ान’ को लेकर आए दिन होने वाले विवाद और शिकायतों के बीचा अभी खबर आ रही है कि केरल के मलप्पुरम की मस्जिद जुमा मस्जिद के संगठन ने फैसला किया है कि अब से दिनभर में लाउडस्पीकर से पांच के बजाय एक ही ‘अजान’ होगी. कहा जा रहा है कि यह फैसला मस्जिदों के आसपास स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों और दूसरे लोगों को तेज आवाज से होने वाली परेशानी और बढ़ते ध्वनि प्रदुषण को देखते हुए लिया गया है.

सभी 17 मस्जिदों में, बिना लाउडस्पीकर के बिना माइक के होगी अज़ान

मीडिया ख़बरों के मुताबिक वालिया जुमा मस्जिद के साथ 17 मस्जिदों ने मिलकर यह तय किया है कि सिर्फ जुमा मस्जिद में लाउडस्पीकर से दिन में एक बार ही अजान होगी और बाकी मस्जिदों के भीतर बिना माइक के अजान होगी. इसके लिए सभी 17 मस्जिदों की समितियों ने भी अपनी मंजूरी दे दी है. इस फैसले के बाद पिछले एक हफ्ते से इस फैसले पर अमल हो रहा है जिसके कारण बिना लाउडस्पीकर के मस्जिदों में अब अज़ान हो रही है. ये एक अच्छी और अनोखी पहल है और इससे पूरे देश की सभी मस्जिदों को सबक लेना चाहिए.

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक वजक्कड़ मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष टीपी अब्दुल अज़ीज ने बताया “वजक्कड़ जंक्शन के पास 7 मस्जिदें हैं और 10 किलोमीटर के दायरे में कुछ और मस्जिदें भी हैं. लेकिन ये हमारे संज्ञान में आया है कि मस्जिदों में अज़ान के अलग-अलग समय में कई बार अज़ान अदा किये जाने के कारण जनता, व्यापारियों और स्कूलों में बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है”.

कई और मस्जिद भी ले सकती हैं यही फैसला

इस फैसले में सुन्नी, मुजाहिद (सलाफी), जमात ए इस्लामी और तबलीग समुदाय के लोग भी शामिल थे. इस बैठक का अंजाम ये रहा कि अब हफ्ते के पांच दिन सिर्फ दिन में एक बार ही नमाज़ अदा की जाएगी और सभी का एक सा समय होगा. अब ऐसे खबरें भी आ रही हैं कि दूसरी मस्जिद कमेटियां भी जुमा मस्जिद से प्रेरणा लेकर इस जैसा ही फैसला ले सकती हैं.

स्थानीय लोग हैं खुश “कानफोड़ू आवाज़ से मिलेगी आज़ादी”

स्थानीय व्यापारी ने कहा “वालिया जुमा मस्जिद ने एक शानदार उदाहरण पेश किया है. इस फैसले से बेतरतीब तरीके से कान फाड़ने वाले लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं होगा, अब राजनीतिक दलों को भी इस बारे में सोचना चाहिये”.

क्यों किया जाता है लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल इस नए आधुनिक युग में भी?

पुराने ज़माने में जब घड़ियाँ नहीं होती थी, धुप छाँव से लोग समय का अंदाज़ा लगाते थे. तब लोगों को वक़्त पर नमाज़ में पहुंचने के लिए तेज़ आवाज़ में नगाड़े बजाये जाते थे. लाउड-स्पीकर आया तो और ज़ोर से अज़ान दी जाने लगी. लेकिन इस आधुनिक युग में लोग भूल गए कि सबके हाथों में घडी हैं, स्मार्टफोन हैं, जिससे वक़्त पर लोग अपने आप ही पहुंच जाते हैं. तो फिर अब इस प्रथा का अंत कर देने में क्या बुराई है.

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