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“आप” की कांग्रेस के बड़े षड्यंत्र का पर्दाफ़ाश, देखकर राजनीति पर से विश्वास उठ जाएगा आपका

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नई दिल्ली : “राजनीति” में इंसान किस हद तक गिर सकता है, इस बात का अनुमान लगा पाना बेहद मुश्किल होता है. जनता के सामने एक दूसरे को अपशब्द कहने वाले, परदे के पीछे कैसे गले मिलकर जनता को मूर्ख बनाते हैं इसका अंदाजा ज्यादातर भोले-भाले लोग नहीं लगा पाते. ऐसा ही कुछ यूपी चुनावों में भी होने जा रहा है. केजरीवाल की आम आदमी पार्टी यूपी में चुनाव तो लड़ नहीं रही, लेकिन पार्टी ने यूपी में प्रचार अभियान में उतरने का एलान कर दिया है। है ना आश्चर्य की बात? आप पूछेंगे कि भाई जब चुनाव लड़ ही नहीं रहे तो फिर प्रचार किसका करोगे?

तो सुनिये क्या कहा आप के प्रवक्ता वैभव माहेश्वरी ने

माहेश्वरी साहब का कहना है कि उनकी पार्टी के तमाम बड़े नेता और पार्टी कार्यकर्ता यूपी में बीजेपी को हरवाने के लिए प्रचार करेंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी यूपी में जगह-जगह रैलियां करेगी ताकि बीजेपी को नुकसान पहुचे। अब आप के मन में सवाल उठेगा कि बीजेपी को यूपी में नुक्सान पहुचाके केजरीवाल को क्या मिलेगा क्योंकि उनकी पार्टी तो यूपी में चुनाव लड़ ही नहीं रही?

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तो देखिये और समझिये राजनीति के इस घिनौने रूप को

आम आदमी पार्टी ने अपनी ज्यादातर रैलियां और सभाएं यूपी में उन जगहों पर करने की योजना बनायी है, जहां पर बीजेपी को रोक कर कांग्रेस को फायदा पहुचाया जा सके। सोनिया गांधी के करीबी अहमद पटेल की देखरेख में सारी रणनीति की योजना बनायी गई है। ये वही केजरीवाल हैं जिन्होंने अपना पहला चुनाव कांग्रेस के खिलाफ अनशन करके लड़ा था, भ्रष्टाचार मिटाने और लोकपाल लाने की बड़ी-बड़ी बातें की थीं. लेकिन 2014 का लोकसभा का चुनाव मोदी के खिलाफ वाराणसी से लड़ा था.

10 जनपथ के इशारे पर यूपी में रैलियां

यूपी में केजरीवाल की पार्टी की रैलियों का पूरा खाका बनाने के लिए कांग्रेस के एक बड़े नेता से बातचीत की गयी। हमें मिली जानकारी के मुताबिक कुछ ही दिन पहले सोनिया गांधी के एक करीबी नेता और बईमानों के गुरुघंटाल केजरीवाल के बीच एक बैठक हुई, जिसमे रणनीति बनायी गयी। इसी रणनीति के तहत केजरीवाल ने आनन-फानन में यूपी के वाराणसी, मेरठ और लखनऊ में ताबड़तोड़ रैलियां कीं।

आम आदमी पार्टी का यूपी में कोई खास संगठन तो है नहीं, लेकिन फिर भी उनकी इन तीनों रैलियों के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की गई थीं। इन रैलियों का मकसद यही था कि यूपी चुनाव में वोटों के समीकरण को प्रभावित किया जा सके।

यूपी में क्या है केजरीवाल की रणनीति?

पंजाब और गोवा में मतदान 4 फरवरी को होना है, इसके बाद आप के तमाम बड़े नेता फ्री होंगे। यूपी में वोटिंग का काम 11 फरवरी से शुरू होना है। पंजाब और गोवा को निपटाते ही केजरीवाल और उनकी पार्टी के सभी बड़े नेता यूपी के चुनाव में जुट जाएंगे। कहने को तो वो यहां बीजेपी के विरोध में रैलियां करेंगे, लेकिन कोशिश होगी कि बीजेपी के वोटों को तोड़ कर कांग्रेस को फायदा पहुचा सकें। इस मकसद को पूरा करने के लिए खास-तौर पर कुछ मुद्दों को चुना गया है। वैसे तो यूपी में सबसे अहम मुद्दा कानून-व्यवस्था का माना जाता है, लेकिन आम आदमी पार्टी का सारा फोकस नोटबंदी पर रहेगा।

वैश्य वोटरों पर केजरीवाल का फोकस

दरअसल यूपी में वैश्य समुदाय यानी व्यापारी समुदाय को बीजेपी के परंपरागत वोटर के रूप में माना जाता है। नोटबंदी के फैसले से व्यापारियों को कुछ दिक्कतें तो हुई ही थीं। बस इसी का फायदा उठाने के लिए आम आदमी पार्टी के वैश्य नेता जैसे कि अरविंद केजरीवाल और आशुतोष रैलियां करके इन वोटरों को गुमराह करेंगे। रैलियां भी ऐसी सीटों पर तय की गई हैं, जहां पर बीजेपी को नुक्सान होने पर सीधा फायदा कांग्रेस के उम्मीदवारों को होगा यानी वहां पर अन्य पार्टियों जैसे सपा या बसपा काफी कमजोर हैं।

यूपी में बीजेपी को हरा कर मोदी को कमजोर करने की साजिश

इनकी बातों में आकर यदि वैश्य समुदाय ने बीजेपी की जगह कांग्रेस पार्टी को वोट दे दिया तो यूपी में बीजेपी को 10 से 15 सीटों पर हार का मुह देखना पड़ सकता है। और यदि ऐसा हो गया तो यूपी में बीजेपी पिछड़ सकती है और कांग्रेस, एसपी और बीएसपी पर दबाव बनाकर मिलीजुली सरकार बनवा सकती है। ऐसे में यदि बीजेपी यूपी में बहुमत में नहीं आती है तो राज्यसभा में भी उसकी पकड़ मजबूत नहीं हो पायेगी और कई ऐसे बिल पास नहीं हो पाएंगे जिनके लिए राज्यसभा में बहुमत की आवश्यकता है, और यूपी को भी केंद्र की योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पायेगा. बीजेपी के बहुमत में ना आने से यूपी के लोगों का विकास अन्य राज्यों की तुलना में धीरे हो जाएगा.

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