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कश्मीर समस्या के समाधान के लिए सेना ने उठाया ऐतहासिक कदम, अब हमेशा के लिए बदल जायेगी घाटी

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नई दिल्ली : कश्मीर के पत्थरबाजों को लाइन पर लाने के लिए भारतीय सेना ने एक नया दांव लगाने का फैसला किया है. जी नहीं, इस बार उन्हें जीप के आगे नहीं बंधा जाएगा, बल्कि इस बार सेना उन्हें भारत का भ्रमण कराने और उनके सपनों को नयी उड़ान देने का फैसला किया है. सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि अशांत दक्षिणी कश्मीर के 20 पत्थरबाजों को भारत के अन्य राज्यों के भ्रमण पर ले जाया जाएगा.


ये एक शैक्षणिक यात्रा होगी और इसके द्वारा देश के विकास से उन्हें वाकिफ कराया जाएगा. उम्मीद की जा रही है कि इससे उनकी बंद आँखें खुलेंगी और वो अपने व् अपने लोगों के विकास के बारे में सोचेंगे. दरअसल कश्मीरी पत्थरबाजों से मुलाक़ात करने के बाद विक्टर फोर्स के जनरल आफिसर कमांड मेजर जनरल बी एस राजू के मन में ये विचार आया.

आतंकवादियों के खिलाफ विभिन्न सैन्य अभियानों के दौरान सुरक्षाबलों पर पत्थर फेंकने के चलते कई पत्थरबाजों को पकड़ा गया था. इन पत्थरबाजों से बातचीत के दौरान मेजर जनरल राजू को अहसास हुआ कि इन लोगों को पता तक नहीं है कि ये पत्थर आखिर फेंक क्यों रहे हैं, भारत व् सुरक्षाबलों के लिए इनके मन में जन्म से ही गलतफहमियां बसाई गयी हैं.

मेजर जनरल राजू ने बताया कि इन पत्थरबाजों से बात करने पर उन्हें पता चला कि ये युवा पत्थर फेंकने में इसलिए लिप्त हैं क्योंकि वो बचपन से ही यही सब देख रहे हैं. जन्म से ही अपने आसपास लोगों को पत्थर फेंकता देख ये युवा भी इस छवि के गुलाम बन चुके हैं. उन्होंने कहा कि कई पत्थरबाज तो ऐसे भी हैं जिन्हें यह भी नहीं मालूम है कि वे आखिर क्यों पत्थरबाजी कर रहे हैं.


उन्होंने बताया कि वो ये जानकर चकित रह गए कि उनमें से कई पत्थरबाज तो केवल मजे के लिए पत्थर फेंक कर रहे थे. मेजर जनरल राजू खुद भी एक पुत्र और एक पुत्री के पिता हैं. उन्होंने एक अभिभावक की नियमावली का पालन करने का फैसले किया है. इसके तहत उन्होंने पत्थरबाजों से अनौपचारिक रूप से बातचीत शुरू कर दी और तब उन्हें ये पता चला कि इनके भी सपने हैं.

सपनों को हकीकत में बदलने के संबंध में पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम के बयान का जिक्र करते हुए मेजर जनरल राजू ने युवा छात्रों से उनके करियर के बारे में काउंसलिंग शुरू की. उन्होंने बताया कि पत्थर फेंकने वाले युवा भी हमारे-आपके जैसे हैं, उनके मन में भी बहुत से सपने हैं. वो बेचारे अलगाववादियों के कारण ज्यादा कुछ कभी देख ही नहीं पाए. अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण उनके सपनों को पंख नहीं लग पाते.

उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश सिर्फ इन युवाओं के सपनों को उड़ान देना है. इसी के चलते ऐसे 20 युवाओं को सेना की सद्भावना योजना के तहत भारत का भ्रमण कराया जाएगा. सेना ने स्थानीय पुलिस की मदद से उन लड़कों की पहचान करनी शुरू कर दी है, जिन्हें दिल्ली ले जाया जाएगा. दिल्ली के बाद उन्हें मुंबई, जयपुर और ऐतिहासिक महत्व वाले अन्य स्थानों पर भी ले जाया जाएगा ताकि वो देख सकें कि भारत के अन्य राज्य कितना आगे निकल गए हैं, वो देख सकें कि अलगाववादियों की बातों में आके वो कितना कुछ खो रहे हैं.

सेना का मानना है कि विभिन्न शहरों की यात्रा के बाद जब ये युवा लौटकर अन्य कश्मीरियों को अपने अनुभव सुनाएंगे तो अगले समूह के लिए वे प्रोत्साहित होंगे. इस मिशन के जरिये कश्मीरियों को भारत से जोड़ने की कोशिश की जा रही है.


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