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सेना पर पत्थर फेकने वालो को चंडीगढ़ के डॉक्टर ने सिखाया ऐसा सबक, सन्न रह गए पत्थरबाज !

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चंडीगढ़ : कश्मीर में पिछले काफी वक़्त से हिंसा का दौर चल रहा है. जहां एक ओर पाकिस्तानी आतंकियों ने घाटी में कोहराम मचाया हुआ है, वहीँ दूसरी ओर कश्मीरी पत्थरबाज भी सुरक्षाबलों के लिए सर दर्द बने हुए हैं. आये दिन पत्थरबाज आतंकी ऑपरेशन के दौरान बाधा डालने के लिए पहुंच जाते हैं और पत्थर फेकने लगते हैं. लेकिन अब चंडीगढ़ से जो बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है, उसके बाद शायद पत्थरबाजों को अक्ल आ जाए.

डॉक्टर ने इलाज करने से किया मना !

दरअसल इन पत्थरबाजों को पता है कि वो पत्थर फेकेंगे तो सेना कुछ करेगी नहीं और यदि कुछ किया भी तो देश में बैठे वामपंथी व् देशद्रोही तत्व हल्ला मचा देंगे और सरकार पर कार्रवाई रोकने का दबाव बनाएंगे. लेकिन देश में गुस्सा बढ़ता जा रहा है और इसका एक उदाहरण चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर चिकित्सा संस्थान में देखने को मिला है.

दरअसल अपनी मां का इलाज कराने एक युवक कश्मीर से चंडीगढ़ आया था. खबर आयी है कि चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर चिकित्सा संस्थान के एक डॉक्टर ने ये कहते हुए उसकी मां का इलाज करने से मना कर दिया कि, वहां तुम लोग कश्मीर में हमारी सेना पर पत्थर मारते हो और यहां इलाज कराने भी चले आते हो. ये सुनते ही कश्मीरी युवक के पैरों तले जमीन खिसक ही गयी.

वहीं दूसरी ओर चंडीगढ़ में अस्पताल प्रशासन ने ऐसी किसी भी घटना के होने से साफ़ इनकार कर दिया है. हालांकि फिर भी कश्मीरी युवक के आरोप के बाद पीजीआई चंडीगढ़ प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. खबरों के मुताबिक श्रीनगर के रहने वाले जावेद अहमद मलिक 4 मई को अपनी मां नसरीना को लेकर चंडीगढ़ पीजीआई के न्यूरोलॉजी विभाग के ओपीडी में इलाज कराने आए थे. मलिक के मुताबिक़ उनकी मां को इनटर्नल कोरौटाइड आर्टरी एनेयूरिसम नाम की बीमारी है और घाटी में इसका इलाज ना हो पाने के कारण वहां के डॉक्टरों ने उनकी मां को चंडीगढ़ पीजीआई रेफर किया था.


मलिक ने बताया कि जब वो अपनी मां का इलाज कराने पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचे तो वहां के डॉक्टरों ने ये कहते हुए इलाज करने से मना कर दिया कि, “तुम कश्मीर में तो हमारी सेना पर पत्थरबाजी करते हो और यहां इलाज कराने चले आते हो.” इसके साथ ही डॉक्टर ने कश्मीर के अस्पताल की पर्ची देखकर फेंक दी.

मलिक ने कहा कि उन्हें ऐसा करने वाले डॉक्टर का नाम तो नहीं पता है लेकिन उसके कमरे के बाहर मनोज तिवारी के नाम की प्लेट लगी देखी थी. हालांकि डॉक्टर ने ऐसी किसी भी घटना के होने से इनकार कर दिया है. डॉक्टर तिवारी ने कहा कि वो ऐसा कैसे कर सकते हैं, क्योंकि 4 मई को तो वो शहर में थे ही नहीं.

ये देखकर आसानी से समझा जा सकता है कि देश के आम लोगों में गुस्सा बहुत है, कश्मीरी युवकों को इसे भांपना चाहिए और सेना का अपमान करना व् उनपर पत्थर फेकना बंद कर देना चाहिए. नाम ना जाहिर करने की शर्त पर जम्मू के एक युवक ने बताया कि भारत भरोसे ही कश्मीर की अर्थव्यवस्था चल रही है. पाकिस्तानी आतंकियों के चलते कश्मीर में पर्यटन ना के बराबर रह गया है.

व्यापार भी दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा है. ऐसे में यदि भारत जो आर्थिक सहायता दे रहा है, उसी की बदौलत कश्मीर के लोगों का दाना-पानी चल रहा है लेकिन कश्मीरी पत्थरबाजों को ये बात समझ ही नहीं आ रही. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोग पाकिस्तान से इतने त्रस्त हो चुके हैं कि आये दिन पाकिस्तान विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं लेकिन कश्मीर के लोग हैं कि बात ही नहीं समझ रहे हैं.


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