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कांग्रेस और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के कनेक्शन का सच आया सामने, जांच एजेंसियां सकते में !

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नई दिल्ली : कर्नाटक की राजधानी बैंगलोर में महिला पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. वामपंथी पत्रकार गौरी लंकेश बीजेपी और मोदी सरकार की कट्टर विरोधी मानी जाती थीं. उनकी ह्त्या होते ही कई पत्रकारों व् सम्पादकों ने इसके लिए हिंदुत्व विचारधारा को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है. हालांकि अब पूरे मामले का कांग्रेस से कनेक्शन सामने आ रहा है.

गौरी लंकेश की हत्या के पीछे कांग्रेस के लोगों पर शक गहरा रहा है. एबीपी न्यूज के संवाददाता विकास भदौरिया ने ट्वीट करके बताया है कि गौरी लंकेश कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार से जुड़ी एक खबर पर काम कर रही थीं कि तभी एकाएक उनकी ह्त्या कर दी गयी. कई अन्य स्थानीय और दूसरे पत्रकारों ने भी इस एंगल की तरफ ध्यान दिलाया है.

हत्या के पीछे कांग्रेस कनेक्शन ?

एक बार खुद गौरी लंकेश ने जानकारी दी थी कि वो कर्नाटक के कांग्रेसी विधायक डीके शिवाकुमार के खिलाफ एक मामले में जांच कर रही हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डीके शिवाकुमार वही कोंग्रेसी विधायक हैं, जिनके रिसॉर्ट में हाल ही में गुजरात के कांग्रेसी विधायक रुके थे.

कालेधन के मामले में उन पर सीबीआई छापेमारी भी कर चुकी है. इसके अलावा कर्नाटक सरकार और मुख्यमंत्री सिद्धरमैया से जुड़े मामले भी गौरी लंकेश अपनी पत्रिका में छापने वाली थी. इसके अलावा गौरी लंकेश ने भी कुछ ट्वीट में ऐसी बातें लिखी हैं, जिनसे उनके और उनके वामपंथी साथियों के बीच किसी विवाद का संकेत मिलता है.

वहीँ इस मामले में गुजरात के गृह मंत्री का कहना है कि मामले में नक्सलियों का हाथ भी हो सकता है, क्योंकि जिस तरह से उनके घर में घुसकर सीधे सर में तीन गोलियां मारी गयी हैं, उससे लग रहा है कि हत्यारे उनकी जान-पहचान के थे. खैर अब पुलिस ने जांच शुरु कर दी है. लेकिन उससे पहले ही वामपंथी पत्रकारों का इस मामले को आरएसएस और बीजेपी से जोड़ देना शक पैदा करता है.

कौन थीं गौरी लंकेश ?

गौरी लंकेश एक पत्रकार थीं जो ‘लंकेश’ नाम से कन्नड़ भाषा का एक टेबलॉयड अखबार निकाला करती थीं. अपने अखबार में वो सांप्रदायिक राजनीति, जाति प्रथा जैसे मुद्दों पर बेहद आक्रामक लेख लिखने के कारण मशहूर थीं. उन्हें बीजेपी और हिंदुत्ववादी राजनीति का बड़ा विरोधी माना जाता था. बताया जाता है कि वो इस कदर बीजेपी और हिंदुत्व विरोधी थीं कि उन्हें बदनाम करने के लिए कई बार वो फर्जी खबरें छापने के आरोपों में भी घिरी रहीं.

2008 में बीजेपी सांसद प्रह्लाद जोशी और उमेश धुसी ने उनके अखबार में छपे एक लेख को झूठ बताते हुए अदालत में उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी ठोक दिया था. अदालत में गौरी लंकेश अपनी रिपोर्ट को सही साबित नहीं कर पाईं और अदालत ने उन्हें 6 महीने की जेल और जुर्माने की सज़ा भी दी थी. हालांकि उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा, क्योंकि अदालत से ही उन्हें जमानत मिल गई.

देखिये गौरी के वो दो ट्वीट जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि उनके और उनके वामपंथी (शायद नक्सली) साथियों में कोई विवाद चल रहा था.

इस तीसरे ट्वीट में गौरी लंकेश के भाई और उनके बीच के विवाद की खबर है. उनके अपने भाई का कहना था कि नक्सली विचारधारा की समर्थक हैं और उनके इस रवैये के कारण अखबार की इमेज पर बुरा असर पड़ रहा है.


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