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RSS ने खेला मास्टर स्ट्रोक, एक झटके में होगा अल्पसंख्यकों का सफाया, भारत बनेगा हिन्दू राष्ट्र !

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नई दिल्ली : बीजेपी के महान धुरंधरों में पीएम मोदी के बाद अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम भी शामिल हो गया है. हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी का शानदार प्रदर्शन देख सभी विपक्षी दलों के होश उड़े हुए हैं, ऐसा ही कुछ हाल खुद को सेकुलरिज्म का ठेकेदार मानने वालों का भी है. इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और सच्चर कमेटी के प्रमुख रिटायर्ड जस्टिस राजेंद्र सच्चर ने बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है जिसने देश की राजनीति में उथल-पुथल मचा दी है.


भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाएगा आरएसएस ?

दरअसल बीजेपी के केंद्र के साथ-साथ यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में सरकार बनाने को एक अलग ही रंग दिए जाने की कोशिश शुरू हो गयी है. राजनीतिक फायदा उठाने के लिए देश में साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने की साजिशें की जा रही हैं. ख़बरों के मुताबिक़ जस्टिस राजेंद्र सच्चर ने एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में आशंका जतायी है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) 2019 में भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करवाएगा.

वो कहते हैं ना कि कुछ लोगों की आदत होती है हर बात में कमी निकालना, लेकिन जब कोई कमी ही न मिले तो अफवाह फैलाने में क्या जाता है. दरअसल देश के लगभग हर राज्य में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है, अन्य विपक्षी पार्टियां भी कुछ ख़ास प्रदर्शन नहीं कर पा रही हैं. पीएम मोदी की आंधी में विपक्ष का देश से सफाया होता जा रहा है. इसी के चलते अब बीजेपी और पीएम मोदी पर कीचड उछालने की कोशिश की जानी शुरू हो गयी है.

न्याय की डिग्री हासिल करने वाले जस्टिस राजेंद्र सच्चर ने खुद को भविष्यदर्शी समझते हुए बीजेपी की सरकार में भारत के लिए भविष्यवाणी कर दी है. रेडिफ डॉट कॉम को दिए एक इंटरव्यू के दौरान राजेंद्र सच्चर ने पीएम मोदी की आड़ में सीधे आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी तो केवल चेहरा हैं.

एक योगी से क्यों डर रहे हैं सच्चर साहब ?

उन्होंने कहा कि, “सबसे खतरनाक संकेत योगी आदित्य नाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जाना है.” उनके मुताबिक़ ये आरएसएस की सोची-समझी योजना का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि, “आरएसएस तय कर चुका है कि 2019 में बीजेपी की जीत के बाद वो भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करवाएगा.

उन्होंने विपक्षी पार्टियों को इस बारे में सचेत करते हुए कहा कि उनके मुताबिक़ विपक्षी पार्टियां अभी इस खतरे को भांप नहीं पा रही हैं. अब ये जस्टिस सच्चर के मन में सीएम योगी आदित्यनाथ का खौफ है या कुछ और, ये तो वो खुद ही जानें.

क्या बीजेपी को हराने के लिए समाज में फूट डाली जा रही है ?

जस्टिस सच्चर ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ को सीएम बनाने के संकेत को सावधानी से पढ़ना चाहिए. इसके आगे उन्होंने कहा कि हालांकि सभी हिन्दुओं का आरएसएस से कोई वास्ता नहीं है, हिंदुओं की अलग-अलग संस्कृति, परंपरा और खान-पान की आदतें हैं. उनके मुताबिक़ यूपी में बीजेपी की प्रचंड जीत से आरएसएस पहले से ज्यादा ताकतवर हो गया है.


आरएसएस यदि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करवाने की कोशिश करता है तो इसके क्या परिणाम होंगे? इस सवाल के जवाब में जस्टिस सच्चर ने अपनी दिव्य दृष्टि द्वारा पता लगा लिया कि आरएसएस के ऐसा करने पर देश में जबरदस्त विरोध होगा और विरोध करने वालों में हिन्दू भी शामिल होंगे. आरएसएस को काफी मुश्किलों का सामना करना पडेगा.

उनके मुताबिक़ बहुत से लोग देश को हिन्दू राष्ट्र नहीं बनाना चाहते. उनके मुताबिक़ पंजाब में बीजेपी के सहयोगी अकाली दल भी इस मामले में उनका समर्थन नहीं करेगा. देश के हिन्दू,मुस्लिम, सिख, इसाई सभी एक सुर में इसका विरोध करेंगे.

क्या जनता की समझदारी पर शक कर रहे हैं सच्चर साहब ?

इसके बाद पूर्व जस्टिस साहब ने विपक्षी पार्टियों को सुझाव दिया कि यदि वो देश पर आने वाले इस सबसे बड़े खतरे को जड़ से उखाड़ फेकना है तो सभी विपक्षियों को एकजुट हो जाना चाहिए. यानी बीजेपी के खिलाफ सभी पार्टियों को एक हो जाना चाहिए.

सबसे हैरानी की बात तो ये है कि इतने महत्वपूर्ण पद पर रह चुके जस्टिस सच्चर को ज़रा भी ध्यान नहीं आया कि लोकतंत्र में हिन्दू, मुस्लिम, सिख और इसाई सभी ने मिलकर बीजेपी को जीत दिलाई है. बीजेपी से पहले अन्य पार्टियों को भी ऐसी बड़ी जीत हासिल हो चुकी है.

सामाजिक बुराइयों को ख़त्म करवाना गलत है क्या ?

अब यदि पीएम मोदी ट्रिपल तलाक को ख़त्म करना चाहते हैं तो इसमें गलत क्या है? मुस्लिम महिलाएं खुद भी तो यही चाहती हैं. यदि सीएम योगी प्रदेश में अवैध कत्लखाने बंद करवा देते हैं तो इसे मुस्लिमों से जोड़ कर क्यों देखा जा रहा है, कई हिन्दू भी तो इस तरह की हरकतों में शामिल थे. और फिर खुद जस्टिस रह चुके सच्चर साहब को ये तो अच्छी तरह मालूम होगा कि अवैध कत्लखाने क्या, किसी भी अवैध काम को रोकना ही तो प्रशासन की जिम्मेदारी होती है.

गुजरात चुनाव के लिए ये कोई नया शिगूफा तो नहीं ?

अभी हाल ही में पीएम मोदी ने देश के तथाकथित सेकुलरों की पोल खोलते हुए कहा भी था कि विपक्ष नए-नए मुद्दे फैक्ट्री में बनाता है. दिल्ली में चुनाव था तो चर्च पर हमले की बात उठाई. बिहार में अवार्ड वापसी का मुद्दा चला. पता नहीं आजकल अवार्ड वापसी वाले कहां हैं? अब ईवीएम का मुद्दा उठाया है. ऐसे में शक उठना लाजमी ही है कि कहीं आगामी गुजरात चुनाव को देखते हुए हिन्दू राष्ट्र के नाम पर बीजेपी को बदनाम करने की साजिश तो नहीं की जा रही?


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