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रविश के बलात्कारी भाई के मामले में कोर्ट ने सुनाया ऐसा हैरतअंगेज फैसला, जिसे देख आप सन्न रह जाएंगे

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नई दिल्ली : डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के केस में मीडिया ने टूट कर रिपोर्टिंग की. जो यकीनन काबिले तारीफ़ है. जिन कोंग्रेसी नेताओं ने 10 सालों तक इस केस को दबाये रखा, वो भी बीजेपी पर काफी आक्रामक दिखे, चलिए मान लेते हैं कि विपक्ष का यही काम है. अब रामपाल के केस में सारा मीडिया व्यस्त हो गया है. लेकिन इस आपाधापी में एक और बलात्कारी का केस तो पीछे ही छूट गया, उसके बारे में कोई मीडिया बात क्यों नहीं कर रहा है.

‘बलात्कारी भाई’ को बचाने की तैयारी जोरों पर !

हम बात कर रहे हैं एनडीटीवी इंडिया के रिपोर्टर रवीश कुमार के कथित भाई ब्रजेश पांडेय की, जोकि एक कोंग्रेसी नेता भी है. जहाँ एक ओर गुरमीत राम रहीम का केस अपने अंजाम तक पहुंच रहा था, ठीक उसी वक़्त रसूखदारों व् दिग्गज नेताओं की शह में ब्रजेश पांडेय का मामला रफा-दफा होने की तरफ बढ़ रहा था. क्या कानून वाकई में निष्पक्ष फैसले करता है ? इस सवाल का जवाब आपको नीचे दी गयी रिपोर्ट को पढ़कर मिल जाएगा.

कोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार के इस मामले के मुख्य आरोपी निखिल प्रियदर्शी को राहत दे दी. आपको हैरानी होगी जानकार कि कोर्ट ने उसे 3 महीने का वक्त दिया है ताकि वो बलात्कार पीड़ित लड़की के साथ शादी कर ले. ये कौन सा इन्साफ हुआ भाई ? ऐसे तो सभी रसूखदार लड़कियों का बलात्कार करके फिर उनसे शादी कर बच निकलेंगे.

बलात्कार की सजा शादी होती है क्या ?

प्रॉडिट लड़की एक दलित है और बलात्कार के वक़्त वो नाबालिग भी थी. उसने निखिल प्रियदर्शी और रवीश के भाई ब्रजेश पांडेय पर बलात्कार करने और सेक्स रैकेट चलाने का आरोप लगाया था. मगर केस के मुख्य आरोपी निखिल प्रियदर्शी को पटना हाईकोर्ट ने 23 अगस्त को यह कहते हुए 3 महीने की जमानत दे दी कि इस दौरान उसे पीड़ित लड़की से शादी करनी होगी. 3 महीने बाद आरोपी निखिल प्रियदर्शी को फिर से कोर्ट बुलाया जाएगा और उस वक़्त लड़की का फिर से बयान लिया जाएगा. यदि लड़की का बयान सकारात्मक होता है तो आरोपी को स्थायी जमानत मिल जाएगी.

न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की पीठ ने आरोपी की अर्जी पर ये अजीबोगरीब फैसला सुनाया है. दरअसल आरोपी की ओर से दलील दी गयी कि जोर-जबर्दस्ती से नहीं, बल्कि दोनों के बीच आपसी सहमति से सेक्स हुआ था. इसी आधार पर जज ने बलात्कारी को पीड़िता से शादी करने की ये मोहलत दी है. मगर सवाल ये है कि यदि मान भी लिया जाए कि मर्जी से सेक्स हुआ, तब भी लड़की उस वक़्त नाबालिग थी, इस बात को कैसे नज़रअंदाज कर दिया गया?

केस रफा-दफा करने की तैयारी !

क्या यदि गुरमीत राम रहीम इस्लाम अपनाकर दोनों साध्वियों से एक साथ शादी कर ले तो उसे भी सजा नहीं देंगे क्या ? ये कौन सा तरीका हुआ न्याय का ? समस्या ये भी है कि भारत की न्यायव्यवस्था आज भी अंग्रेजों की उसी पुरानी प्रणाली पर चल रही है, आप या हम न्यायपालिका से सवाल कर ही नहीं सकते वरना कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट यानी कोर्ट की अवमानना मानी जाती है.

सवाल ये है कि जब केस का मुख्य आरोपी ही बलात्कार पीड़िता से शादी करके बच निकलेगा तो बाकी आरोपियों का क्या होगा? उनके लिए तो केस से छूटना बहुत आसान हो जाएगा. दरअसल अंदर की बात ये है कि रसूखदारों की इच्छा से इस देश में न्याय मिलता है. इस केस में भी कुछ वैसा ही हो रहा है. मीडिया ने बात दबा ली है, राजनीतिक नेताओं ने अपनी सारी ताकत झोंकी हुई है आरोपी को बचाने की.


क्या बच जाएगा ब्रजेश पांडेय?

इस केस में निखिल के साथ उसके भाई और पिता को भी आरोपी बनाया गया है. अदालती कार्रवाई के दौरान पीड़िता ने खुलासा किया था कि निखिल के सेक्स रैकेट में तत्कालीन बिहार कांग्रेस उपाध्यक्ष और रवीश कुमार के भाई ब्रजेश पांडेय के साथ मृणाल किशोर और संजीत कुमार भी शामिल हैं. इन तीनों ने भी उसका यौन शोषण किया था.

अपनी शिकायत में पीड़ित लड़की ने ये भी बताया था कि इन वहशी जानवरों ने उसके साथ बुरी तरह मारपीट भी की थी. लेकिन जैसे-जैसे मामला कोर्ट में आगे बढ़ा, लड़की पर तरह-तरह के सामाजिक और राजनीतिक दबाव पड़ने लगे. उसके पिता पर इतना दबाव बना दिया गया कि वो भी सुलह करने के लिए कह रहे हैं. ऐसे में पीड़िता के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ना आसान नहीं है.

उसे मीडिया या सरकारी की तरफ से भी कोई खास मदद नहीं मिल रही है. आपको याद होगा कि कैसे जेसिका लाल हत्याकांड में कोंग्रेसी नेता का बेटा साफ़ बच निकला था. बाद में यदि मीडिया ने स्टिंग ऑपरेशन करके खुलासे नहीं किये होते तो उसे कभी सजा होती ही नहीं. क़ानून के हाथ उस तक कभी नहीं पहुंचते.

मौन क्यों है मीडिया ? ये कैसी दोगलापंथी है ?

हालांकि अभी इस बारे में कुछ भी पक्के तौर पर तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन माना जा रहा है कि मुख्य आरोपी निखिल प्रियदर्शी के बरी होने तक ब्रजेश पांडेय कानून से बचने की कोशिश में लगा है. यदि पीड़ित लड़की बलात्कारी आरोपी से शादी कर लेती है तो ब्रजेश पांडेय का बचना काफी आसान हो जाएगा.

हालांकि इस केस से जुड़े सरकारी वकील के मुताबिक़ ब्रजेश पर पॉक्सो के तहत केस चलाने का पर्याप्त आधार है. मगर इसके बावजूद अभी तक पुलिस ने अन्य आरोपियों के खिलाफ कुछ खास एक्शन नहीं लिया है. माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी और एक बड़े पत्रकार से जुड़ा मामला होने के कारण पुलिस इस केस में ढिलाई बरत रही है. जिसका फायदा आरोपी को मिलना तय है.

बेशर्मी के साथ बाबा रहीम केस में कोंग्रेसी नेता, प्रवक्ता टीवी डिबेटोँ में बैठ कर बीजेपी की खट्टर सरकार पर कीचड उछाल रहे हैं और अपने ही मामले को दबाने की कोशिशें कर रहे हैं. मीडिया को भी इस मामले में सांप सूंघ गया है. रविश का भाई है तो वो नहीं दिखा रहा, मगर ज़ी न्यूज़ व् अन्य न्यूज़ मीडिया को क्या हो गया. क्या अंदर की कोई सेटिंग है क्या कि तुम मेरा मत दिखाओ और मै तुम्हारा नहीं दिखाऊंगा ? पत्रकार-पत्रकार भाई-भाई टाइप का कुछ ?


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