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जम्मू में रोहिंग्याओं ने किया खुलेआम गोवध, फिर जो हुआ उसे देख हिल गए वामपंथी व् मुस्लिम संगठन

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नई दिल्ली : मोदी सरकार अवैध बांग्लादेशियों व् रोहिंग्या घुसपैठियों को निकाल फेकने के लिए प्रयासरत है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट लगातार मानवाधिकारों का बहाना लगा कर इस काम में अड़ंगे अड़ा रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ देश में 40000 से अधिक अवैध रोहिंग्या मुस्लिम रह रहे हैं. जम्मू से रोहिंग्यों को लेकर अब एक अहम् खबर आ रही है, जिसे लेकर देश की भ्र्ष्ट मीडिया सरकार के खिलाफ शोर मचाने लगी है.


भावनाएं आहत करने के लिए खुलेआम किया गोवध

दरअसल खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक़ देश में रह रहे रोहिंग्या मुस्लिम कट्टरपंथी इस्लामिक व् आतंकी संगठनों के संपर्क में हैं और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं. यही वजह है कि जम्मू पुलिस इसे लेकर काफी सतर्क है, क्योंकि जम्मू में बड़ी संख्या में अवैध रोहिंग्या मुस्लिम बसे हुए हैं.

बताया जा रहा है कि इन अवैध रोहिंग्यों ने जानबूझ कर बहुसंख्यक समुदाय की भावनाएं आहत करने के लिए गाय का वध किया और गोमांस खाया. हिम्मत तो ये रही कि उस गाय का कंकाल भी इन्होने अपने शिविर के पास ही फेंक दिया. जैसे ही लोगों ने गाय का कंकाल देखा तो इलाके में तनाव बढ़ने लगा.

बीजेपी ने किया गोवध के खिलाफ प्रदर्शन

रोहिंग्याओं के शिविर के पास एक खाली भूखंड में गाय का कंकाल देख बीजेपी के लोगों ने गोवध के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. किसी तरह की अनहोनी न हो व् इलाके में साम्प्रदायिक तनाव न फैले, इसलिए पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए कई रोहिंग्या शरणार्थियों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया. हालांकि किसी के खिलाफ सबूत ना मिलने के कारण सभी को छोड़ दिया गया, मगर थाने से बाहर आते ही रोहिंग्याओं ने खुद को मारे-पीटे जाने का हल्ला मचा दिया.

एक नाबालिग रोहिंग्या शरणार्थी ने बताया कि जम्मू के सीमांत इलाके में स्थित थाने में पुलिस ने 10 रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों को कतार में खड़े कर लाठी और बेल्ट से उनकी पिटाई की. पुलिस उनसे सिर्फ एक सवाल पूछ रही थी कि गाय की हत्या किसने की.

रोहिंग्याओं के मुताबिक़ जम्मू के दक्षिणी इलाके के चानी हिम्मत थाने में पुलिस ने बच्चों को दूध पिलाने वाली दो रोहिंग्या महिलाओं समेत 12 रोहिंग्या शरणार्थियों को 11 दिनों तक हिरासत में रखा था और उनकी पिटाई भी की.


पुलिस पर लगाया निर्दयता का आरोप

16 वर्षीय सैयद नूर ने मीडिया को बताया, ‘थाने में बच्चे चिल्ला रहे थे, जिनमें एक सिर्फ चार दिन का नवजात था.’ सैयद के मुताबिक पुलिस ने उसे आठ दिनों तक हिरासत में रखा. 29 वर्षीय हामिद हुसैन ने पुलिस हिरासत में अपने दूसरे दिन को याद करते हुए बताया, ‘हम चिल्ला-चिल्ला कर पुलिस को बता रहे थे कि हमने ये काम नहीं किया है, लेकिन वो हमें पीटते रहे.’

हिरासत में लिए गए तीन लोगों के अलावा, रोहिंग्या समुदाय के नेता और उनके पड़ोसियों ने पुलिस की निर्दयता के बारे में बताया. हुसैन ने कहा, ‘पुलिस ने हमें फर्श पर लिटाकर हमारे पैर, हाथ और पीठ पर लाठी और बेल्ट से मारा. उन्होंने हमें बहुत सताया.’

पुलिस पर क़ानून व्यवस्था के उल्लंघन का आरोप

हिरासत में लिए गए शरणार्थियों ने बताया कि, ‘उनको 96 से 264 घंटे की अवधि के बीच पुलिस ने छोड़ा और कभी न्यायालय में पेश नहीं किया. अपराध प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के मुताबिक पुलिस किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में नहीं रख सकती है. इस अवधि के दौरान पुलिस को उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना होता है.’

पड़ोस में रहने वाली 35 वर्षीय हिंदू महिला ने मीडिया को बताया कि पुलिस रोहिंग्या समुदाय के लोगों को गिरफ्तार कर ले गई थी और उनको भी थाने में बुलाया था, लेकिन उन्होंने जब अपने को हिंदू बताया तो पुलिस ने उनको छोड़ दिया.

पुलिस ने किया आरोपों का खंडन

चानी हिम्मत के थानेदार साजिद मीर ने कई लोगों को पूछताछ के लिए थाने बुलाने की पुष्टि की है. हालांकि उनका दावा है कि उनको बाद में वापस जाने को कहा गया था और किसी को हिरासत में नहीं लिया गया था.

उधर, बीजेपी विधिक प्रकोष्ठ के सदस्य हुनर गुप्ता ने भी इस बात की पुष्टि की कि बीजेपी के लोगों ने यहां गोवध के विरोध में राजमार्ग जाम किया था. गुप्ता ने फरवरी में जम्मू से रोहिंग्या समुदाय के लोगों को देश से बाहर निकालने के लिए एक जनहित याचिका दायर की थी. बहरहाल मीडिया ने मानवाधिकारों का हवाला देते हुए अवैध रोहिंग्याओं के कथित तौर पर पुलिस द्वारा पीटे जाने के मुद्दे को उछालना शुरू कर दिया है.


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