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ब्रेकिंग – डोकलाम के बाद ब्रिक्स में भी भारत के आगे झुका चीन, जिनपिंग ने लिया हैरतअंगेज फैसला !

modi-jinping

शियामेन : डोकलाम में चीन ने भारत को खूब हेकड़ी दिखाई, धमकियां भी दी लेकिन फिर भी पीएम मोदी डोकलाम में पीछे ना हटने के अपने फैसले से टस से मस नहीं हुए. आखिरकार चीन को ही हार मानकर भारत का प्रस्ताव मानना पड़ा. ब्रिक्स समिट से पहले भी चीन ने भारत को चेतावनी दी कि आतंकवाद का मुद्दा ब्रिक्स में ना उठाया जाए लेकिन पीएम मोदी ने एक बार फिर सख्त स्टैंड ले लिया और चीन को एक बार फिर से घुटने टेकने पड़े हैं. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स सम्मलेन में आखिरकार आतंकवाद का मुद्दा उठा ही लिया.

खुद ही आतंकवाद पर बोले जिनपिंग !

जिनपिंग ने शियामेन में नौवें वार्षिक ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए सदस्य देशों से अपने मतभेद दूर करने तथा आपसी विश्वास एवं रणनीतिक संवाद बढ़ाकर एक दूसरी की चिंताओं पर ध्यान देने को कहा. भारत को दो महीनों तक धमकियां देने वाले चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि लोग संघर्ष और टकराव के बदले शांति और सहयोग चाहते हैं.

चीन से भारत ने साफ़ कर दिया था कि भारत तो अपने फैसले से पीछे नहीं हटने वाला और ब्रिक्स में आतंकवाद की बात जरूर करेगा, चाहे चीन बुरा माने या भला. जिनपिंग को समझ आ गया कि पीएम मोदी तो पीछे हटने नहीं वाले, लिहाजा उन्होंने खुद ही ब्रिक्स में आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दुनिया पर आतंकवाद के खतरे की काली छाया बनी हुई है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि ज्वलंत भू-राजनीतिक मुद्दों को सुलझाना आज के समय की मांग है.

भारत के साथ मतभेद नहीं चाहता चीन !

भू-राजनीतिक मुद्दों को सुलझाने वाली बात डोकलाम के मुद्दे के बारे में कही गयी है. ब्रिक्स व्यापार फोरम के उद्घाटन समारोह में चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा कि, ‘दुनिया में लोग शांति और सहयोग चाहते हैं न कि संघर्ष और टकराव. दुनिया के कुछ हिस्सों में लगातार हो रहे संघर्ष से विश्व शांति के लिए खतरा पैदा हो गया है. आतंकवाद के खतरे और साइबर सुरक्षा की कमी की वजह से दुनिया पर काली छाया बनी हुई है.’

जिनपिंग ने पिछले 10 सालों में ब्रिक्स के सहयोग का खाका खींचते हुए कहा कि मतभेदों को दूर करते हुए एक-दूसरे को बराबर मानना और सहमति के क्षेत्रों की तलाश करना सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है. जिनपिंग ने आतंकवाद के मुद्दे पर जोर देते हुए कहा कि वो इस बात से सहमत हैं कि आतंकवाद के सभी रूपों के प्रति समग्र दृष्टिकोण अपनाने और इसके लक्षणों एवं कारणों की तह तक पहुंचने के बाद आतंकवादियों के छिपने के लिए जगह नहीं बचेगी.


अमेरिका भी दे चुका है चेतावनी !

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की हत्या करने वाले आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह देने को लेकर चीन के करीबी सहयोगी पाकिस्तान पर प्रहार किया था और इस्लामाबाद को चेतावनी दी थी कि आतंकवाद को संरक्षण देने पर उसे काफी कुछ भुगतना पडेगा.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने चेतावनी दी थी कि, “आतंकवाद पर पाकिस्तान का रवैया ब्रिक्स सम्मलेन के लिए सही मुद्दा नहीं है. हमें मालुम है कि भारत की कुछ चिंताएं हैं, लेकिन ये मुद्दा उठाने पर सम्मलेन अपने मकसद से भटक सकता है. चीन अपने करीब सहयोगी की किसी भी तरह की आलोचना को बर्दाश्त नहीं करेगा. वैसे पाक खुद भी आतंकवाद से पीड़ित है.”

भारत के सामने एक बार फिर चीन ने टेके घुटने !

यानि चीन ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी थी कि वो अपने करीबी सहयोगी देश पाकिस्तान के खिलाफ कुछ भी सुन नहीं पायेगा. चीन ने भारत से कहा था कि इस बार आतंकवाद का मुद्दा ब्रिक्स सम्मलेन में ना उठाया जाए. लेकिन पीएम मोदी के सख्त फैसले के सामने चीन ने एक बार फिर घुटन टेकते हुए खुद ही आतंकवाद के मुद्दे को उठा लिया. दरअसल चीन नहीं चाहता कि ब्रिक्स सम्मलेन के दौरान भारत और चीन के बीच किसी भी तरह की खटास आये.

पीएम मोदी और जिनपिंग की सम्मलेन के बाद मुलाक़ात भी होनी है, जिसमे डोकलाम का मुद्दा भी जरूर उठाया जाएगा. साथ ही नेपाल और म्यांमार में भारत के रोल को लेकर भी कई महत्वपूर्ण बातें हो सकती हैं, ये मुलाक़ात चीन के लिए काफी जरुरी है. ऐसे में चीन किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहता. ये भारत की ताकत है, जिसने ब्रिक्स में चीन को पाकिस्तान का हाथ छोड़ने पर मजबूर कर दिया.


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