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अभी-अभी : जापान पर हो सकता है एक और परमाणु हमला, जान बचाने के लिए भागे जापानी नागरिक !

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दिल्ली : दुसरे विश्व युद्ध के दौरान अपने दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बमों की मार झेल चुका जापान पर एक बार फिर परमाणु हमला होने की आशंका से काँप उठा है. उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जॉन्ग उन पर परमाणु संपन्न राष्ट्र बनने की सनक सवार हो चुकी है, जिसके चलते वो एक के बाद एक घातक मिसाइलों के परिक्षण करता जा रहा है. अब जो खबर सामने आ रही, उसे देख पश्चिमी देशों समेत जापान के हाथ-पाँव ठन्डे पड़ गए हैं.


परमाणु हमले से बचने के लिए जापान ने शुरू की तैयारी

उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच चल रहे तनातानी के बीच जापान ने परमाणु हमले से बचने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं. बताया जा रहा है कि कभी भी युद्ध शुरू हो सकता है और युद्ध की स्थिति में उत्तर कोरिया जापान पर परमाणु हमला कर सकता है. जापान नहीं चाहता कि एक बार फिर उसके लोगों को वही भयावह स्थिति झेलनी पड़े, इसके लिए किसी भी संभावित मिसाइल हमले से बचने के लिए जापान ने इवैकुएशन ड्रिल (लोगों को निकालने की तैयारी) शुरू कर दी है.

जापान की नौसेना और वायुसेना ने अमेरिकी विमानवाहक पोतों के साथ जापान सागर में तीन दिवसीय संयुक्त सैन्य ड्रिल की शुरुआत की है. गौरतलब है कि यदि उत्तर कोरिया ने बैलिस्टिक मिसाइल दागी तो वो केवल 10 मिनट में जापानी क्षेत्र तक पहुंच जायेगी और भारी तबाही मचा देगी.

इसलिए जापान के अधिकारियों ने अपने नागरिकों को सूचना दी है कि उन्हें देश पर मिसाइल हमला होने से 10 मिनट पहले इस बारे में सूचित किया जाएगा. इसलिए उन्हें हर वक़्त तैयार रहना होगा और किसी भी संभावित हमले की स्थिति में जमीन के नीचे बने बंकरों में छिप कर अपना बचाव भी करना होगा.


जापान सरकार ने “सशस्त्र हमलों और आतंकवाद” से बचने के लिए एक गाइड भी प्रकाशित की है. इस ड्रिल में शामिल 280 लोगों को लाउडस्पीकर के जरिये से संभावित विनाशकारी मिसाइल हमले के बारे में सतर्क किया गया. उन्हें सिखाया गया कि हमले के दौरान उन्हें कैसे अपना बचाव करना होगा.

ड्रिल के दौरान बजने वाले इमरजेंसी साइरन्स की आवाज सुनकर एक स्थानीय प्राथमिक विद्यालय के बाहर खेल रहे बच्चे चौंक गए. यह ड्रिल वास्तविक हमले की स्थिति में आपातकालीन संचार के साधनों का परीक्षण करने के लिए की गई थी. ड्रिल का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी हमले के दौरान सभी नागरिक सुरक्षित जगह तक पहुंच जाएं, ताकि उनकी जान बच सके.

ड्रिल के लिए असली हमले का एक माहौल तैयार किया गया, जिसमें जापान के यामागुची प्रान्त के रॉकी इलाके में परमाणु मिसाइल गिरने की स्थिति की कल्पना की गई. इस इलाके में करीब 3400 लोग रहते हैं. इस ड्रिल में स्थानीय प्रशासन और शहर प्राधिकरणों के अधिकारी भी शामिल हुए.

जापान के इस ड्रिल को करने के बाद से तीसरे विश्व युद्ध के कभी भी शुरू होने की अटकलें तेज हो गयी हैं. पिछले कई दशकों में ऐसी ड्रिल नहीं की गयी थी, अब यदि ऐसा करना पड़ रहा है तो जरूर इसके पीछे कोई खुफिया अलर्ट मिला होगा. यदि तीसरा विश्व युद्ध शुरू होता है तो ये दुनिया का पहला परमाणु युद्ध होगा, जिसमे दो या ज्यादा देश एक दूसरे के खिलाफ परमाणु हथियारों का प्रयोग करेंगे. उत्तर कोरिया के खिलाफ जंग जीतना इराक़ या अफगानिस्तान जितना आसान नहीं होगा.


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