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जयपुर में अवैध रोहिंग्यों के दंगे से जुडी खौफनाक खबर आयी सामने, आपको अंदर तक झकझोर देगी !

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जयपुर : दिल्ली के जंतर-मंतर में कुछ देशद्रोही अवैध रोहिंग्या मुस्लिमों को देश में बसाने की मांग लेकर अड़े हुए हैं, नारे-बाजी कर रहे हैं, रोहिंग्याओं के समर्थन में नारे लगा रहे हैं. वहीँ जयपुर में अवैध रोहिंग्या मुस्लिमों व् अवैध बांग्लादेशियों ने एक बूढी माँ से उसके जीने का सहारा ही छीन लिया है. खून के प्यासे कट्टरपंथियों ने दंगे में भरत की जान ले ली. भरत की माँ टकटकी लगाए अब भी बैठी हुयी है कि उसका लाल आएगा, पर उसे क्या पता कि उसके बेटे को कट्टरपंथियों ने मार दिया है.


विकलांग भरत था परिवार का एकमात्र सहारा !

विकलांग युवक भरत की मां को अब भी यकीन नहीं हो रहा है कि उसका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है. ‘मेरा सोनू आएगा’, ये बोलते हुए बेटे के ई-रिक्शा को एकटक निहारती रही मां. कैसे मारा होगा लाचार भरत को? उन दरिंदो की रूह नहीं काँपी होगी? मामला जयपुर के रामगंज इलाके का है, जहाँ कुछ ही दिन पहले कट्टरपंथी मुस्लिमों ने सिर्फ इस बात पर दंगा कर दिया था कि पुलिस ने एक बिना हेलमेट तीन लोगों को बाइक पर बिठाये शख्स से बाइक के कागजात दिखाने के लिए मांग लिए थे.

25000 कट्टरपंथियों ने दंगे में ना केवल थाने के पास कड़ी गाड़ियों को फूंक डाला बल्कि एक पावर हाउस को भी आग के हवाले कर दिया. सरकारी संपत्ति जनता के पैसों से ही बनायी जाती है लेकिन ये कट्टरपंथी तो टैक्स देते नहीं, इसलिए भला इन्हे क्यों दर्द होने लगा.


दंगाइयों के समर्थन में कांग्रेस के कई नेता ?

इसी दंगे में कट्टरपंथियों ने एक विकलांग ई-रिक्शाचालक को भी नहीं बक्शा और उसे मौत के घाट उतार दिया. लाश को लावारिस बताकर एसएमएस मुर्दा घर में रखवा दिया गया था. उसकी लाश को देख के लोगो का गुस्सा फूट पड़ा. कट्टरपंथियों ने भरत को दंगे के दिन ही मार दिया था. शहर के रामगंज में हुए दंगे में आदिल नाम के शख्स की मौत के बाद एक और युवक भरत कुमार की मौत हो गई है. कांग्रेस के कई नेता चाहते हैं कि अवैध रोहिंग्यों को भारत में रहने दिया जाए.

भरत ई-रिक्शा चलाकर अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करता था. भरत ब्रह्मपुरी थाना इलाके के शंकर नगर इलाके रहता था. एक शख्स ने भरत के चाचा तोलाराम को फोन करके बताया था कि हिंसा में भरत कुमार घायल हो गया और उसे सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया था. साथ ही ये भी बताया कि भरत का रिक्शा रामगंज इलाके में खड़ा हुआ है. तोलाराम को इस दौरान भरत का रिक्शा तो मिल गया, लेकिन भरत नहीं मिला.

शारीरिक रूप से विकलांग भरत कुमार अपनी 65 वर्षीय बूढ़ी मां का इकलौता सहारा था. जिसे कट्टरपंथियों के उन्माद ने मार दिया. बेहद दुखी उसकी बूढ़ी माँ तीन दिनों से अन्न त्याग किया हुआ है, लेकिन देश के स्वार्थी और बिकाऊ मीडिया की नजरें उस ओर जा ही नहीं रही हैं. सारा ध्यान बाबा रहीम की गुफा में लगा हुआ है. देश में कोई और खबर है ही नहीं मानो.


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