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प्राइवेट डॉक्टरों की लूट से गुस्से में आये मोदी ने लिया ऐतिहासिक फैसला, आयकर विभाग आया एक्शन में

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नई दिल्ली : मोदी सरकार लगातार गरीबों के लिए कई तरह की योजनाएं ला रही है. अब आयकर विभाग ने भी गरीबों के हित में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिससे देश का बड़ा फायदा होगा. ये कार्रवाई उन डॉक्टरों और दवाई कंपनियों के खिलाफ है, जो सांठ-गाँठ करके गरीब मरीजों को जानबूझ कर महँगी दवाइयां लिखते हैं और कमीशन कमाते हैं. ऐसे ही डॉक्टरों की लूट के चलते गरीब अपना इलाज नहीं करवा पाते. महीने में कोई यदि बीमार पड़ गया तो जेब से इतने पैसे दवाइयों में ही निकल जाते हैं कि घरखर्च चलाना तक मुश्किल हो जाता है.


कंपनियों-डॉक्टरों की सांठ-गांठ के खिलाफ बड़ी कार्रवाई !

आयकर विभाग की ओर से पिछले कुछ दिनों में दवाई कंपनियों की बड़ी फर्म यूएसवी के करीब 20 ठिकानों पर छापेमारी की गई. इसके अलावा मुंबई के तीन बड़े डॉक्टर, नागपुर का एक और राजकोट के एक डॉक्टर के यहां भी छापेमारी की गयी है.

हालांकि ऐसे डॉक्टरों के नाम अभी तक उजागर नहीं किये गए हैं, जांच चल रही है. एक डॉक्टर के यहां से डॉयरी बरामद की गई जिसके आधार पर जांच की जा रही है. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक यूएसवी के प्रवक्ता ने माना कि कंपनी के कई ठिकानों पर आयकर विभाग ने कार्रवाई की है.

हालांकि कंपनी की तरफ से कहा गया है कि वो आईटी की जांच में सहयोग में कोई कमी नहीं छोडेंगे. उन्होंने कहा कि भले ही आईटी का शिकंजा कंपनी पर कस रहा हो, लेकिन वे दवाइयों को लेकर जारी की गई हर गाइडलाइन का पालन करते हैं. साथ ही वे कानून के मुताबिक देश में दवाईयों का व्यापार कर रहे हैं.


लूट मचाने वाले डॉक्टरों के दिमाग ठिकाने लगाने की कवायद !

दरअसल अक्टूबर 2016 में एमसीआई ने डॉक्टरों के लिए दवाई के पर्चे पर जेनरिक मेडिसन लिखने का आदेश जारी किया था, लेकिन कुछ डॉक्टरों के दिमाग कुछ ज्यादा ही खराब हैं और वो कमीशन के चलते मरीजों से लूट में लगे हुए हैं.

इसे रोकने का एक अन्य उपाय सरकार ने ये सोचा था कि दवाई कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को दिए जाने वाले गिफ्ट पर ही रोक लगाई जाए. फार्मा कंपनियां अपनी दवाईयों की बिक्री बढ़ाने के लिए डॉक्टरों को गिफ्ट के बहाने कई ऑफर दे देती हैं, जिस पर सरकार शिकंजा कसने की लंबे समय से तैयारी कर रही है.

आईटी के मुताबिक वे इस पर नजर बनाए हुए हैं कि डॉक्टर केंद्र की ओर से बनाई गई गाइडलाइंस को फोलो कर रहे हैं या नहीं और इसलिए डॉक्टरों और कंपनियों के बीच होने वाली हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है.


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