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बड़ी खबर – इसरो ने अंतरिक्ष में बनाया भारत को बाहुबली, नासा ने टेके घुटने, किया सलाम

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नई दिल्ली : एक ओर पाकिस्तान है जो आतंकियों की भारत में घुसपैठ कराने में ही व्यस्त रहता है और दूसरी ओर भारत के इंडियन स्पेश रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन यानी इसरो ने सफलता का एक और झंडा गाड़ दिया है. लगातार सफलता के नए-नए मुकाम हासिल करते हुए इसरो ने अंतरिक्ष क्षेत्र में इस बार ऐसी कामयाबी हासिल की है, जिसे देख देश-विदेश के बड़े-बड़े वैज्ञानिक भी हैरान हैं.

इसरो का सबसे पावरफुल रॉकेट

दरअसल इंटरनेशनल वेहिकल्स पर निर्भरता कम करने और मल्टी-बिलियन डॉलर स्पेस मार्केट में अपने शेयर को बढ़ाने के लिए इसरो ने सबसे ताकतवर रॉकेट “जियोसिन्क्रोनस सैटेलाइन लॉन्च वेहिकल मार्क III” को तैयार कर लिया है. इसरो के चेयरमैन एएस किरन कुमार ने बताया कि श्रीहरिकोटा में रॉकेट के सभी सिस्टम लगाए जा चुके हैं और इन्हें जोड़ने का काम किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि इस राकेट की लगातार जांच की जा रही है और इसे जून में लॉन्च किये जाने की पूरी उम्मीद है. गौरतलब है कि अब तक भारत के पास जो राकेट थे, उनमे 2.2 टन की सैटेलाइट ढोने की क्षमता थी. इससे ज्यादा वजनी सैटेलाइट के लिए भारत को विदेश पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब इस नए ताकतवर राकेट के लांच हो जाने से भारत की बड़ी मुश्किल आसान हो जाएगी.

बनाया था विश्व रिकॉर्ड

गेम चेंजर माना जा रहा जीएसएलवी मार्क III राकेट करीब 4 टन के कम्युनिकेशन सैटेलाइट का वजन उठा सकता है. इस राकेट के जरिये से 4 टन तक के वजन के सैटेलाइटों को आसानी से ढोने के अलावा उन्हें अंतरिक्ष में 36 हज़ार किलोमीटर ऊपर स्थित कक्षा में स्थापित भी किया जा सकेगा. आपको बता दें कि इससे पहले भी इसरो ने इसी साल फरवरी के महीने में श्रीहरिकोटा से एक साथ 104 सैटेलाइट लॉन्च करके रूस को भी पीछे छोड़ते हुए विश्व रिकॉर्ड बनाया था.

सबसे ज्यादा ख़ुशी की बात ये थी कि इसरो द्वारा प्रक्षेपित किए गए 104 उपग्रहों में से केवल 3 उपग्रह ही भारत के थे, बाकी सभी उपग्रह अन्य देशों के थे, जिन्हे प्रक्षेपित करने से इसरो को काफी मोटी रकम भी मिली थी. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कभी साइकिल पर सैटेलाइट ले जाने वाले इसरो ने पिछले 5 वर्षों में तकरीबन 896 करोड़ रुपये की कमाई की हैं. 2010-11 में इसरो का मुनाफा 138 करोड़ रुपये था जो मोदी सरकार के आने के बाद 2014-15 में बढ़कर 205 करोड़ रुपये हो गया.

उस उपलब्धि के बाद ये इसरो की एक और बड़ी उपलब्ब्धि है, जिससे पूरी दुनिया में भारत के नाम का डंका बज गया है.

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