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ब्रेकिंग – दुनिया नें माना भारत का लोहा, बड़े बड़े दिग्गज देशो को पीछे छोड़ भारत ने रचा इतिहास


चेन्नई : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो ISRO) ने अभी अभी सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी मार्क- थ्री को प्रक्षेपित करके एक बार फिर इतिहास रच दिया है. इसरो ने हमेशा से भारत देश का सर गर्व से ऊँचा करवाया है साथ ही आज पूरी दुनिया में भारत का लोहा मनवाया है. मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल में इसरो ने जैसे एक नयी छलांग लगाई है. इससे पहले भी इसरो ने 104 उपग्रह अंतरिक्ष में सफलतापूर्व छोड़ने का रिकॉर्ड बनाया था. जिससे  भारत ने करीब 300 मिलियन डॉलर कमाए थे.

अंतरिक्ष की दुनिया में इसरो ने रचा इतिहास

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने अभी यानी सोमवार (5 जून) को अपने सबसे भारी रॉकेट के जरिए संचार उपग्रह जीसैट-19 को लॉन्च कर दिया इसका वजन लगभग 3,136 किलोग्राम तक है. इसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से छोड़ा गया. जीएसएलवी-एमके3-डी1 त्रिस्तरीय रॉकेट है जिस राकेट से इसे छोड़ा गया है उसका नाम है “फैट बॉय”. यह भूस्थैतिक कक्षा में 4000 किलो तक का पेलोड ले जा सकता है अभी तक इतना वजन का पेलोड ले जाने के लिए विदेशों की मदद लेनी पड़ती थी जिसमें करोड़ों रूपए लग जाते थे, लेकिन अब भारत आत्मनिर्भर बन गया है.

इसरो के चेयरमैन एएस किरन कुमार ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि जीएसएलवी मार्क-3 को लॉन्च करने का प्रमुख उद्देश्य ज्यादा वजन वाले कम्युनिकेशन सैटलाइट जीसैट-19 को जीटीओ (जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट) में प्रवेश कराना होगा. जीएसएलवी मार्क-3 लॉन्च करने के लिए उच्च गति वाले क्रायोजेनिक इंजन का प्रयोग किया गया है. यह वही इंजन है जिसे एक वक़्त ऐसा भी था जब अमेरिका ने रूस को भारत को देने के लिए रोक लगा दी थी. यहाँ आपको बता दें करीब 30 साल की कड़ी रिसर्च और मेहनत के बाद इसरो ने यह इंजन बनाया था.


इसरो के पूर्व प्रमुख के राधाकृष्णन ने मोदी सरकार के सहयोग और इसरो की ज़बरदस्त कामयाबी के लिए बधाई दी है और इस लांच को मील का पत्थर बताया है. क्यूंकि अब इसरो के उपग्रह प्रक्षेपण की क्षमता 2.2-2.3 टन से करीब दोगुना हो करके 3.5- 4 टन की हो जाएगी. यह आने वाले भविष्य में इसरो का एक सबसे मजबूत प्रक्षेपण यान होने वाला है. भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने 200 हाथियों जितना वजनी सैटेलाइट इस राकेट की मदद से लॉन्च किया है.

इसरो ने सभी प्रतिस्पर्धियों देशों को पछाड़ा

उपग्रह प्रक्षेपण में अब तक सौ फीसदी सफलता हासिल करने के साथ ही इसरो की न सिर्फ विश्वभर में प्रतिष्ठा बढ़ी है, बल्कि प्रतिस्पर्धियों को मुश्किल चुनौति भी दी है. अमेरिका की स्पेस एक्स जैसी कंपनियां 2015 तक एक उपग्रह छोड़ने के लिए 6 करोड़ रुपये तक वसूला करती थी, जबकि इसरो ने इसके लिए मात्र 30 लाख रुपये ही लिए. इसे यह भी पता चलता है की मोदी सरकार में अब इसरो कितने करोड़ों रुपयों की बचत कर पायेगी, जो कि अब तक विदेशों से मदद लेने में खर्च हो जाया करते थे.

भारत ने 300 मिलियन डॉलर कमाए

घर फूंक कर तमाशा करने की बजाय,  इसरो आज आर्थिक रूप से भी काफी हद तक मज़बूत है. एक उदहारण से इसे इस तरह समझिये कि कुछ वक़्त पहले जो इसरो ने एक साथ जो 104 उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किए थे, उसमें से 101 दूसरे देशों के उपग्रह भी शामिल थे, एक रिपोर्ट के अनुसार इनके लांच से भारत ने करीब 300 मिलियन डॉलर कमाए थे.


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