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अगर पाकिस्तान ने नही माना अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसले को तो ये हैं इसके अधिकार, कर सकता है…

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नई दिल्ली : इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) एक अंतरराष्ट्रीय न्यायालय है, जिस तरह देश के अंदर के मामलों का निपटारा अदालत में होता है, वैसे ही अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की जरूरत तब पड़ती है, जब दो देशों के बीच कोई ऐसा मुद्दा खड़ा हो जाता है, जिससे दोनों देशों में टकराव की स्थिति बन रही हो, और वो इस कोर्ट के जरिये निदान चाहते हों.

पूर्व भारतीय नेवी ऑफिसर कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है. जाधव की फांसी पर रोक लगवाने के लिए भारत ने ICJ में अपील की है. ICJ ने मामले की सुनवाई होने तक कुलभूषण की फांसी पर रोक भी लगा दी है.

ICJ यानी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय दरअसल यूएन की प्रमुख न्यायिक शाखा है, जिसका गठन 1945 में किया गया था. अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का मुख्यालय नीदरलैंड्स के हेग में है और हर 3 साल में इसके अध्यक्ष का चुनाव होता है. अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कुल 15 जज होते हैं, जिनका कार्यकाल सामान्य तौर पर 9 वर्षों का होता है.

यदि कोई जज कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही इस्तीफा दे देता है तो उसके बचे हुए कार्यकाल के लिए नए जज का चुनाव होता है. सबसे ख़ास बात तो ये है कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के सभी 15 जज अलग-अलग देशों से होते हैं, यानी एक ही देश के 2 जज नहीं हो सकते. इसके साथ ही इन 15 जजों में यूएन की सिक्योरिटी कॉउंसिल के 5 देशों से एक-एक जज जरूर होता है.

फिलहाल फ्रांस के रोनी अब्राहम अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के अध्यक्ष हैं. इसी के साथ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में फिलहाल ब्राज़ील, जापान, स्लोवाकिया, सोमालिया, मोरक्को, ब्रिटेन, अमेरिका, इटली, यूगांडा, चीन, भारत, ऑस्ट्रेलिया, रूस और जमैका से एक-एक जज है.

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में फिलहाल भारत की तरफ से जज दलवीर भंडारी हैं जोकि पहले सुप्रीम कोर्ट के जज थे. दलवीर भंडारी को 2012 में 6 साल के कार्यकाल के लिए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का जज चुना गया था. इन जजों को कोई अन्य पद रखना मना है. किसी एक जज को हटाने के लिए बाकी के जजों का सर्वसम्मत निर्णय जरूरी है. अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में निर्णय बहुमत निर्णय के अनुसार लिए जाते है. न्यायालय का निर्णय अंतिम होता है, उसकी अपील नहीं हो सकती, हालांकि कुछ मामलों में पुनर्विचार किया जा सकता है.

जैसी शक्तियां और अधिकार अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के पास हैं, उस हिसाब से यदि कोई देश अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले को माने से इंकार कर देता है तो मामला यूएन के सिक्योरिटी कॉउंसिल के पास चला जाता है. सिक्योरिटी कॉउंसिल अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले को लागू करवाता है, हालांकि सिक्योरिटी कॉउंसिल में शामिल 5 देशों में से कोई भी देश अपने वीटो अधिकार का इस्तेमाल करके इसपर रोक लगवा सकता है.

कुलभूषण जाधव मामले में भारत ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में अपील की है, हालांकि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय को भी अपने तेवर दिखाते हुए इसे आतंरिक सुरक्षा का मामला बताया है और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय से दखल ना देने की अपील की है. यदि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय पाकिस्तान के खिलाफ फैसला सुनाता है तो पाकिस्तान उसे मानने के लिए बाध्य होगा या फिर मामला सिक्योरिटी कॉउंसिल के पास जाएगा और सिक्योरिटी कॉउंसिल उसे अपने तरह से लागू करवाएगा. हालांकि सिक्योरिटी कॉउंसिल में शामिल 5 देशों में से एक चीन के पास वीटो का अधिकार है और चीन यदि पाकिस्तान का साथ देता है तो अपने वीटो के अधिकार से फैसले को रुकवा सकता है.

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