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रक्षामंत्री ने सेना को सौंपा चीन की तबाही का सामान, हिन्द महासागर में चीनी फ़ौज के उड़े होश

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नई दिल्ली : आज भारत देश तेज़ी से शक्तिशाली बनता जा रहा है. हमारे दो पडोसी देश अड़ियल चीन और आतंक समर्थक पाकिस्तान के लिए आज की तारीख में भारत को हर वक़्त तैयार रहने की ज़रूरत है. कुछ वक़्त पहले तो चीन ने डोकलाम विवाद में अपना असली रूप दिखा ही दिया था. जब भारत को 1962 के युद्ध की चीन ने धमकी दी थी. लेकिन अब भारत दुश्मनों को मुहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है.


भारतीय नौसेना को मिला देश का सबसे घातक वॉरशिप

अभी मिल रही खबर के मुताबिक हाल ही में नियुक्त हुई रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण अपने तेज़ तर्रार फैसले के लिए जानी जाती रही है. अभी हाल ही में तीन दिशाओं में भारत की सीमा पर खुद जाकर जायज़ा लिया, हर दिन तीनो सेना प्रमुखों से सुरक्षा मुद्दों पर बात कर रही हैं. लेकिन आज देश के सबसे घातक वॉरशिप आईएनएस किल्तान को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा की उपस्थिति में भारतीय नौसेना को सौंपा है. दुश्मनों की सबमरीन का पलभर में खात्मा करने की क्षमता रखने वाला किल्टन वॉरशिप की सबसे बड़ी बात है कि ये स्वदेशी है और सबसे आधुनिक तकनीक और हथियारों से लैस है.

आपको बता दें पिछले कुछ महीनों में भारतीय महाद्वीप में चीन अपनी सबमरीन लेकर भारत की जासूसी करता रहता है. लेकिन अब वो भारत के इस बाज़ की नज़रों से बच नहीं पायेगा. डोकलाम हो या समुद्री सीमा चीन की दूसरे देश की सीमा में घुसने की गंदी आदत है. लेकिन अब आईएनएस किल्तान के आ जाने से चीन की हर चाल पर नज़र रखी जा सकेगी

पिछली सरकारों में मिलते थे घोटाले

पिछली कांग्रेस सरकारों की तरह नहीं जो दूसरे देश के आगे हाथ फैलाकर पुरानी तकनीक वाले हथियार भी करोड़ों डॉलर में खरीदते थे. आज भारत अपने दम पर हथियार बनाने के लिए खुद सक्षम है. वरना सेना को हथियारों के नाम कांग्रेस ने सिर्फ घोटाले ही दिये थे बोफोर्स तोप घोटाला, रफ़ाएल लड़ाकू विमान, ऑगस्टा वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला. लेकिन आज पीएम मोदी के मेक इन इंडिया योजना के तहत भारत न सिर्फ खुद हथियार बना रहा है बल्कि दूसरे देशों को बेच भी रहा है.


इसकी खूबी यह है कि पूरी तरह से स्वदेशी वॉरशिप है पानी के अंदर दुश्मन के किसी भी हमले को नाकाम करने में सक्षम है. इस वॉरशिप को बनाने में हाई क्लास स्टील डीएमआर 249 का उपयोग किया गया है. जिसे स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानि सेल इस स्टील को तैयार किया है. 3500 टन वजनी ये युद्धपोत 109 मीटर लंबा है. इसमें चार डीजल इंजन लगा है. वॉरशिप करीब 45 किलोमीटर की रफ्तार से पानी में तैर सकता है.  बता दें कि आईएनएस किल्टन सभी प्रमुख हथियारों और सेंसर के समुद्री टेस्ट्स को शुरू करने वाला पहला वॉरशिप भी हैं.

इसमें किस तरह के घातक हथियार लगे हैं वो हम आपको नहीं बताएँगे क्यूंकि वो सुरक्षा के लहजे से गुप्त रखे जाते हैं. लेकिन ये समझ लीजिये दुश्मन को पल भर में धूल चटा देंगे ऐसे उच्च एवम आधुनिक तकनीक के घातक हथियार लगाए गए हैं.

नौसेना प्रमुख सुनील लांबा की मौजूदगी में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण विशाखापट्ट्नम ने नेवल डॉकयार्ड में वॉरशिप को कमीशन किया है. आईएनएस किल्टन उन चार एएसडब्ल्यू कार्वेट्स में से एक है जिन पर करीब 7800 करोड़ रुपये खर्च ‌हुए हैं.


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