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अभी-अभी : कांग्रेस के एक और कारनामे का हुआ पर्दाफाश, देखे बिना यकीन ही नहीं करेंगे आप

नई दिल्ली : स्वतंत्रता दिवस के अगले ही दिन राहुल गाँधी ने बड़े जोश में 101 इंदिरा कैंटीन का उद्घाटन किया. यही नहीं कर्नाटक कांग्रेस में विधायकों के साथ राहुल गाँधी ने भी यहीं खाना खाया. पहले ही दिन यहाँ बड़ी भारी संख्या में गरीब मज़दूर लोगों की भीड़ लग गयी. हालत तो यह हो गयी कि हज़ारों लोगों को भूखे पेट वापस लौटना पड़ा. लेकिन इंदिरा कैंटीन खोले हुए 10 दिन अंदर बड़ी जालसाज़ी, धांधली का खुलासा हुआ है.


राहुल गाँधी की इस इंदिरा कैंटीन में नाश्ता 5 रूपए में और खाना 10 रूपए में दिया जा रहा है. जिसकी वजह से यहाँ गरीबों का इतना भारी संख्या में आना स्वाभाविक है. लेकिन आइये आपको बताते हैं कि कैसे गरीबों साथ-साथ छोटे बच्चों , महिलाओं की जान के साथ खेला जा रहा है.

इंदिरा कैंटीन के नाम पर बड़ी धांधली का हुआ पर्दाफाश

बेंगुलुरु में कोई रेस्तरां खोलना आसान काम नहीं है, बड़ी लम्बी कागज़ी कार्यवाही से गुज़रना पड़ता है. सबसे पहले लेबर विभाग से दुकान या स्टॉल का लाइसेंस लेना पड़ता है, उसके बाद बीबीएमपी का ट्रेड लाइसेंस लेना पड़ता है. सबसे ज़रूरी इसके बाद फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी(FSSAI) से लाइसेंस लेना पड़ता है. इसके बाद भी कई कागज़ी इंतेज़ाम करने पड़ते हैं. लेकिन आप सोच रहे होंगे कि ये सब हम आपको क्यों बता रहे हैं.

दरअसल अगर सरकार आपके अपने राज्य में खुद की हो तो आपको इन प्रक्रियाओं से गुजरने की कोई ज़रूरत ही नहीं होती. कांग्रेस के खून में धांधली करना लिखा हुआ. जी हाँ ये बेहद हैरान करने वाली बात है कि पिछले हफ्ते कांग्रेस ने 101 इंदिरा कैन्टीनें खोलीं, ये सभी कैन्टीनें बिना बीबीएमपी का ट्रेड लाइसेंस और FSSAI लाइसेंस के चल रही हैं. यही नहीं इन कैन्टीनो को चलाने वाले और कई शीर्ष अधिकारियों को पता ही नहीं है कि किन किन लाइसेंस की ज़रूरत पड़ती है.


गरीब लोगों की जान के साथ हो रहा खिलवाड़

आपको पिछले मैगी नूडल्स का मामला तो याद ही होगा जिसमें FSSAI की जाँच में पता चला था कि इसमें लेड मिलाया जा रहा था जिससे कैंसर जैसी बीमारी होती है. ऐसे में कांग्रेस का बिना लाइसेंस के कैंटीन खोलना आम गरीब जनता की जान के साथ क्या खिलवाड़ नहीं है?. उसपर से कांग्रेसी टुकड़नों पर पड़ने वाले इन कैंटीन के इंचार्ज देखिये कैसा मूर्खता भरा जवाब देते हैं “प्राइवेट कैन्टीनों को लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की जरूरत होती है. सरकार उन्हें सर्टिफिकेट जारी कर सुनिश्चित करती है कि जनता को जो खाना परोसा जा रहा है वह सुरक्षित है. इंदिरा कैन्टीन सरकार का प्रॉजेक्ट है, इसलिए इसके खाने में किसी समस्या का सवाल नहीं“. जबकि यहाँ आपके ये ज़रूर बता दें कि इंदिरा कैंटीन का खाना CHEFTALK नामकी निजी कंपनी से ही आ रहा है.

अवैध चल रहीं हैं 101 इंदिरा कैंटीनें

तो वहीँ बीबीएमपी में एग्जेक्यूटिव इंजिनियर नंदीश जेआर ने कहा कि सरकार को इस तरह के आउटलेट्स खोलने के लिए किसी की मंजूरी की जरूरत नहीं होती है. आपको बता दें फूड सेफ्टी ऐक्ट का सेक्स 31(1) के नियम अनुसार किसी को भी FSSAI के लाइसेंस के बिना किसी प्रकार से भी खाने एक स्टाल, कैंटीन , रेस्त्रां खोलने की इजाज़त नहीं है और अगर खोली जाती हैं तो वे अवैध कहलायी जाती हैं. इस हिसाब से सभी 101 इंदिरा कैंटीन अवैध हैं और सबसे बड़ी बात गरीब लोग अगर खाने की गुणवत्ता की कमी से मर जाते हैं तो इसकी ज़िम्मेदारी सिर्फ कांग्रेस ही होगी.


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