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अभी-अभी : बॉर्डर पर बिगड़े हालात, भारतीय सेना ने निकाली होवित्जर तोपें, चीनी सेना के छूटे पसीने !

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नई दिल्ली : डोकलाम इलाके में चीनी की घुसपैठ को भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया है लेकिन चीनी सेना अभी भी बॉर्डर पर तैनात है. मोदी सरकार ने अपना रुख तो पहले ही साफ़ कर दिया है कि चाहे जो हो लेकिन भारत चीन को डोकलाम में अवैध घुसपैठ नहीं करने देगा. अब बॉर्डर पर चीन की अकड़ कम करने के लिए भारतीय सेना ने एक नया मिशन शुरू किया है.

सेना ने निकाली होवित्जर तोपें

भारतीय सेना अमेरिका से खरीदी हुई लंबी दूरी तक मार करने वाले अल्ट्रा-लाइट होवित्जर तोपों को भारत-चीन बॉर्डर पर तैनात करने जा रही है. राजस्थान के पोखरण में इन्हे दागा जा रहा है. तोपों के परीक्षण करके M-777 A-2 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर के प्रोजेक्टाइल, रफ्तार और गोले दागने की फ्रीक्वेंसी जैसे बेहद महत्वपूर्ण डेटा को जमा किया जा रहा है.

चीन को ये दिखाने की कोशिश की जा रही है कि भारतीय सेना को कमजोर समझने की गलती वो गलती से भी ना करे वरना लेने के देने पड़ जाएंगे. बता दें कि 155 मिलीमीटर, 39-कैलिबर के इस तोप में भारतीय गोलों का इस्तमाल किया जाएगा.

चीन में तबाही मचाने को तैयार होवित्जर तोपें

इन तोपों की सबसे ख़ास बात ये है कि बोफोर्स तोप के मुकाबले ये तोपें वजन में बेहद हलकी हैं. इनका वजन केवल 11 टन है और आकार में भी ये तोपें बोफोर्स की आधी है. यही वजह है कि इन्हे लाना ले जाना काफी आसान है. इन्हे समुद्र के जरिये और हवा में लिफ्ट करके भी युद्ध क्षेत्र तक ले जाया जा सकता है.


हॉवित्जर तोप बिच्छु की तरह बैठी रहती है, यानी दुश्मनों के लिए इसकी पोजीशन पता लगा पाना भी आसान नहीं होता. डायरेक्ट रेंज में 4 किलोमीटर और इनडायरेक्ट रेंज में 30 से 40 किलोमीटर तक हॉवित्जर दुश्मन के ठिकानों को आसानी से बर्बाद कर देती है.

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने 5000 करोड़ रुपये की लागत से 145 होवित्जर तोपों की आपूर्ति के लिए पिछले साल नवंबर में अमेरिका के साथ सैन्य समझौता किया था. जिसके तहत भारतीय सेना को मई में ये तोप मिली हैं. इन तोपों को टक्कर देने वाली तोपें तो चीन के पास भी नहीं हैं.

ब्रह्मोस मिसाइलें भी हैं तैनात

बता दें कि बोफोर्स तोप सौदे में कांग्रेस द्वारा जबरदस्त घोटाला किये जाने के 30 साल बाद भारतीय सेना को अमेरिका से ये तोपें मिली हैं. मोदी सरकार है, इसलिए बिना किसी घोटाले या दलाली के सौदा पूरा हो गया और भारतीय सेना को तोपें मिलना शुरू भी हो गयी.

भारतीय सेना चीन को ध्यान में रखते हुए लम्बी दूरी की मार करने वाली ऐसी महाविनाशक परमाणु मिसाइलें भी विकसित कर रहा है, जिन्हे देश के किसी भी हिस्से से चीन पर दाग कर तबाही मचाई जा सकती है. यानी दक्षिण भारत के आर्मी बेस से दागी मिसाइल पलभर में बीजिंग में तबाही मचा देगी. इससे पहले भी पीएम मोदी ने ब्रह्मोस मिसाइल के सफल परिक्षण के बाद ब्रह्मोस मिसाइलों को अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर तैनात करके चीन को स्पष्ट संकेत दिए थे कि भारत अपनी सीमाओं की रक्षा करने के लिए कोई भी सख्त कदम उठाने से नहीं चूकेगा.


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