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पाकिस्तान को छोड़िये, अब चीन के खिलाफ पीएम मोदी ने फूँका बिगुल, सेना ने शुरू की तैयारियां !

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नई दिल्ली : एलओसी पर भारतीय सेना पाकिस्तान की हर ना’पाक’ साजिश का मुहतोड़ जवाब दे रही है. हाल ही में पाक चौकियों पर किये गए हमलों के बाद से भारतीय सेना ने उग्र रूप धारण किया हुआ है और गोलियों का जवाब बमों और मिसाइलों से दिया जा रहा है. वहीं अब भारतीय सेना एलएसी पर चालबाज चीन से निपटने की तैयारियों में भी लग गयी है.

भारत के 43,180 वर्ग किलोमीटर पर है चीन का अवैध कब्जा

दरअसल आजादी के बाद से ही चीन का भारत के साथ सीमा विवाद रहा है. चीन कई भारतीय इलाकों को अपना हिस्सा बताता आया है और अक्सर ही चीनी सैनिक भारतीय सीमा में घुसे भी चले आते हैं, जिसके बाद सेना द्वारा इन्हे भारतीय इलाकों से खदेड़ा जाता है. चीन 1962 में भी भारत की पीठ में खंजर भोंक चुका है. यदि आप नहीं जानते तो बता दें कि 1962 के बाद से जम्मू कश्मीर में भारत की भूमि का लगभग 38 हजार वर्ग किलोमीटर भूभाग चीन के कब्जे में है.

इसके अलावा 2 मार्च 1963 को चीन तथा पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित चीन-पाकिस्तान ‘सीमा करार’ के तहत पाकिस्तान ने पाक अधिकृत कश्मीर के 5180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को भी अवैध रूप से चीन को दे दिया था, जिसके बाद से चीन ने भारत के 43,180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है.

चीन से निपटने के लिए भारत की तैयारी

इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना चीन से सटी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी पर भी अपनी पैठ मजबूत कर रही है. भारतीय सेना ने चीन के साथ लगने वाली 4057 किलोमीटर लंबी एलएसी पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. बताया जा रहा है कि इसी साल 17 कॉर्प्स को नए हथियार, एयर डिफेंस और इंजीनियर्स ब्रिगेड्स को लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक फैलाया जाएगा. 72 इनफेंट्री डिविजन जिसका हेडक्वॉर्टर पठानकोट में है, को भी अगले 3 सालों में पूरी तरह से ऑपरेशनल बनाया जाएगा. खबर है कि शुरुआत में तो केवल 1 ही ब्रिगेड है, लेकिन तीन साल में जब 72 इनफेंट्री डिविजन पूरी तरह से ऑपरेशनल हो जाएगा, उस वक़्त इसमें 3 ब्रिगेड होंगे.

आपको बता दें कि भारतीय सेना ने 17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स की शुरुआत साल 2014 में की थी. इतना ही नहीं चीन की पिपुल लिबरेशन आर्मी को मात देने की क्षमता रखने वाले इस 17 कॉर्प्स को लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश और पाकिस्तान तक फैलाया जाएगा. 17 कॉर्प्स अत्याधुनिक तोपखाने, बख्तरबंद, एयर डिफेंस, इंजिनियर ब्रिग्रेड से लैस है और चीन को मटियामेट करने की क्षमता रखता है.

समुद्री ‘जलरक्षक’ बनकर चीन को बेअसर करने में जुटा भारत

पड़ोसी मुल्कों को तरजीह देने और हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा जाल बिछाने से जुड़ी नीति के तहत भारत लगातार काम कर रहा है. पिछले हफ्ते दो पड़ोसियों श्रीलंका और मालदीव को संकट के वक्त भारत की ओर से भेजी गई मदद को भी इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है.

चीन के प्रभुत्व को कम करने के लिए मॉरीशस के पीएम का भारतीय दौरा भी कूटनीतिक नजरिए से बेहद अहम है. बता दें कि मॉरीशस हिंद महासागर क्षेत्र में एक अहम देश है. इस समुद्री जलक्षेत्र में चीन के प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों के बीच मोदी सरकार की ये रणनीति काफी अहम है. भारत ने मॉरीशस के साथ समुदी सुरक्षा से लेकर कई अहम मुद्दों पर डील की.

एक ओर तो मोदी सरकार सेना को इतना मजबूतकर रही है कि टकराव की स्थिति आनेपर भारत दो-दो हाथ करने में सक्षम हो. वहीँ टकराव की स्थिति कभी ना आये और चीन भारत पर कभी हमला ना कर सके इसे लेकर कूटनीतिक प्रयासों पर भी जोर दिया जा रहा है.

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