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ब्रेकिंग – मोदी ने सेना को दी खुली छूट, बॉर्डर पर पहुंची सेना का रौंद्र रूप देख दंग रह गए जिनपिंग !

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नई दिल्ली : सिक्किम में सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन के बीच हालात काफी नाजुक मोड़ पर पहुंच गए हैं. अभी तक तो चीन की मीडिया ही धमकी दे रही थी लेकिन इस बार चीन की डिफेंस मिनिस्ट्री के प्रवक्ता और डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑफ इन्फॉर्मेशन ऑफिस कर्नल वू कियान ने खुद भारत को युद्ध की धमकी देते हुए बड़े-बड़े दावे पेश किये हैं.


सिक्क‍िम में सेना बढ़ाने की चीन की धमकी

वू कियान ने कहा है कि चीन डोकलाम में अपनी सेना और बढ़ाएगा. हर कीमत में चीन अपने इलाके की रक्षा करेगा. कर्नल वू कियान ने धमकाते हुए कहा है कि चीन की संप्रभुता की रक्षा के संकल्प को लेकर भारत किसी गलतफहमी में न रहे. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी दुनिया की सबसे बड़ी सेना है और अपने इलाके की रक्षा करने में पूरी तरह से सक्षम है. पीएलए का पिछले 90 सालों का इतिहास उसकी क्षमता को साबित करता है.

वहीँ भारत सरकार भी अपने अटल निर्णय पर कायम है और फैसला कर चुकी है कि डोकलाम से भारतीय सेना पीछे नहीं हटेगी. चीन के हमले को करारा जवाब देने के लिए भारतीय सेना हर मोर्चे पर तैयार है. अभी हाल ही में पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा पर तनाव के चलते मोदी सरकार ने सेना को 40,000 करोड़ रुपए तक का साजोसामान खुद खरीदने का अधिकार दे दिया. इसके चलते सेना को छोटी अवधि के युद्ध के लिए रक्षा खरीद समिति की मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी और उसे जरूरी साधनों को कम समय में जुटाने में सहूलियत होगी.

चीन के खिलाफ भारत की तैयारी

वहीँ चीन को ध्यान में रखते हुए भारत लम्बी दूरी तक मार करने वाली एक ऐसी मिसाइल विकसित कर रहा है, जो ना केवल परमाणु हमला करने में सक्षम होगी बल्कि भारत के किसी भी हिस्से से उसे चीन पर दागा जा सकेगा. विशेषज्ञों के मुताबिक़ भारत के पास 150-200 परमाणु बम बनाने के लिए प्लूटोनियम मौजूद है और भारत चीन से निपटने के लिए घातक परमाणु हथियारों को विकसित कर रहा है.

इसी के साथ 2000 किलोमीटर तक परंपरागत या परमाणु हथियार ले जा सकने वाली भारत की अग्नि-2 मिसाइल चीन के पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी हिस्से जबकि अग्नि-4 पूरे चीन के किसी भी इलाके को निशाना बनाने में सक्षम होगी. साथ ही भारत अग्नि-5 जैसी इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल भी तेजी से विकसित कर रहा है, जो 5000 किलोमीटर तक परमाणु हमला कर सकेगी.


बॉर्डर पर सड़कों का जाल बिछा रहा भारत

चीन की अक्ल ठिकाने लगाने के लिए मोदी सरकार ने चीन बॉर्डर के आसपास के इलाकों में 73 सडक़ें बनवाने का फैसला ले लिया है. इनमे से 46 सडक़ों का निर्माण रक्षा मंत्रालय के खर्च से कराया जाएगा और 27 सडक़ों का निर्माण गृह मंत्रालय करवाएगा. यहाँ तक कि इनमे से 30 सडक़ों का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो भी चुका है.

कांग्रेस सरकार के वक़्त में चीन को लेकर भारत की रणनीति ये थी कि यदि सीमा के इलाके वीरान व् दुर्गम होंगे तो युद्ध जैसे हालात बनने पर चीनी सेना को भारतीय सीमा में घुसने में मुश्किलें होंगी. हालांकि ये सोच सही नहीं थी और चीन अपने बॉर्डर के पास के इलाकों में जानबूझकर लगातार सडक़ें बनवाता रहा. गृह राज्‍यमंत्री किरण रिजिजू ने बीते मंगलवार को लोकसभा में इस बात की जानकारी दी थी.

चीन बॉर्डर के पास भारत ने तैनात किए 100 टैंक

एक और महत्वपूर्ण खबर ये है कि चीन के खतरे को भांपते हुए भारतीय सेना ने लद्दाख बॉर्डर पर 100 घातक टैंकों को तैनात किया हुआ है. अभी और भी ज्यादा टैंकों को यहां तैनात किया जाएगा. काफी ऊंचाई वाला ये इलाका बेहद ठंडा रहता है. यहाँ का तापमान लगभग माइनस 45 डिग्री सेल्सियस रहता है, यहाँ तैनात किये गए ये टैंक काफी स्पेशल है, जो इतने कम तापमान में भी बेहद घातक प्रहार करते हैं. इतने ठन्डे इलाके में इन टैंकों में स्पेशल फ्यूल का इस्तमाल किया जाता है.

चीन के खतरे को भांपते हुए मोदी सरकार ने 6 महीने पहले ही लद्दाख में टीपू सुल्तान, महाराणा प्रताप और औरंगजेब जैसी टैंक रेजिमेंट की तैनाती करवा दी थी. सैन्य दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण इस इलाके में टैंक रेजिमेंट का क्या महत्व है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1962 के युद्ध के दौरान सेना ने यहां प्लेन से 5 टैंक उतारे तो थे लेकिन जब तक ये टैंक यहाँ पहुंचे तब तक भारत युद्ध हार चुका था.

अरुणाचल में भी 90 हजार से ज्यादा जवान तैयार

इसी के साथ बेहद संवेदनशील माने जाने वाले लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक के बॉर्डर पर 90274 जवान तैनात हैं, जिन्हे सेना गोला-बारूद, वायुसेना, इंजीनियरिंग ब्रिगेड से लैस करने जा रही है. अरुणाचल बॉर्डर के पास भारतीय सेना ने हाल ही में ब्रह्मोस मिसाइलें भी तैनात की हैं, जिन्हे भारत ने रूस के साथ मिलकर विकसित किया है और इनका सामना करने की क्षमता तो अमेरिका में भी नहीं है. कुल मिलाकर देखा जाए तो चीन की ओर से युद्ध की धमकियां दी जा रही हैं, वहीँ मोदी सरकार धमकियां देने में यकीन नहीं रखती और चुपचाप बॉर्डर पर सेना को मजबूत करती जा रही है.


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