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कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा लेकर पहुंची सेना, फिर जो हुआ उससे बौखला उठे अलगाववादी


श्रीनगर : मोदी सरकार के सेना को खुली छूट देने के बाद भारतीय सेना के जवान अपने पूरे जोश में नज़र आ रहे हैं. पिछले 15 साल बाद मोदी सरकार ने सेना को CASO और SADO जैसे सर्च ऑपरेशन चलने की इजाज़त दी है, जिसकी बदौलत पिछले तीन दिन में 38 आतंकवादी को सेना ने मार गिराया है. इसी सिलिसिले में मीडिया ख़बरों के मुताबिक अब ऐसे चौकाने वाली खबर आ रही है, जिसके तहत अब भारतीय सेना के हज़ारो जवानों ने लाल चौक को घेर लिया है.

श्रीनगर के लाल चौक को सेना के हज़ारों जवानों ने घेर लिया है, CASO ऑपरेशन जारी है

भारतीय सेना के CASO ऑपरेशन के तहत पिछले एक महीने से 4000 स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और सुरक्षा बलों के जवान कश्मीर घाटी में चप्पे चप्पे पर नज़र रख रहे हैं. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार को सेना को कुछ ख़ुफ़िया जानकारी मिली. जिसके बाद पूरे लाल चौक और आस पास के इलाके को सेना ने घेर लिया है. लाल चौक श्रीनगर का सबसे ज़्यादा संवेदनशील इलाका माना जाता है, यहां अक्सर देश विरोधी नारेबाजी, प्रदर्शन होते रहते हैं. घेराव के बाद जवानों ने लालचौक और घंटाघर के आसपास के इलाकों में गहन तलाशी अभियान शुरू कर दिया. फिर जवानों ने इलाके की दुकानों, सदिंग्ध घरों और आने जाने वाले वाहनों की ताबड़तोड़ तलाशी लेनी शुरू कर दी. आशा है जल्द ही सेना इस बारे में कोई आधिकारिक सुचना भी जारी कर सकती है.


क्या होता है CASO ऑपरेशन ?

पिछले पंद्रह साल बाद किसी सरकार ने सेना को कश्मीर में CASO ऑपरेशन चलाने की इजाज़त दी है. जम्मू कश्मीर में बढ़ते तनाव के बीच घाटी से आतंकवाद को जड़ से उखड फेंकने के लिए सेना ने कमर कस ली है. कासो (CASO) का मतलब ‘घेरा डालना और तलाशी अभियान’ है. इस तलाशी अभियान में हज़ारों की संख्या में स्पेशल जवान पूरे इलाके की घेराबंदी कर लेते हैं और फिर तलाशी और छानबीन करके देखते ही आतंकवादी को भून दिया जाता है. शोपियां, त्राल समेत दक्षिण कश्मीर के कई इलाकों में सेना ने कासो के जरिए आतंकियों के खात्मे के लिए ये ऑपरेशन चलाया था. जिसके बाद कई आतंकवादियों को सेना ने मार गिराया है.

स्थानीय जनता के सख्त विरोध के बाद पिछली सरकारों ने बंद करवा दिया था CASO ऑपरेशन भारतीय सेना ने स्थानीय लोगों के सख्त विरोध करने और उन्हें होने वाली असुविधा के बाद कासो को बंद करना पड़ा था. साल 2001 के बाद सिर्फ विशेष खुफिया सूचना मिलने पर ही घेरा डालने और तलाशी अभियान चलाया जाता था.


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