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घाटी में सेना ने दिखाया अपना काल भैरव वाला रूप, ठोक डाले 200 आतंकी, पसरा मौत का गहरा सन्नाटा

कश्मीर : भारतीय सेना ने कश्मीर से आतंकवाद को जड़ से ख़त्म करने के लिए कमर कस ली है और ऐसे में केंद्र में मजबूत मोदी सरकार सेना को खुली छूट दिए हुए है. मोदी सरकार के केंद्र में आने से “ऑपरेशन कासो” की इजाज़त 18 साल बाद मिली. जिसके बाद सेना ने भी ‘ऑपरेशन आल आउट (पूरा सफाया)’ शुरू किया. ऐसे ही कल भारतीय सेना ने भी आतंकियों के सफाए में डबल सेंचुरी पूरी कर ली है.


ऑपरेशन आल आउट का कहर – 200 आतंकी मारे गए 85 बाकी

ताज़ा खबर के मुताबिक भारतीय जाबांज़ सेना द्वारा केवल इस वर्ष अभी तक 11 महीनों के दौरान 200 आतंकियों का सफाया ऑपरेशन आल आउट के तहत किया जा चुका है. जिसमें बड़े -बड़े लश्कर और हिज़्बुल के कमांडर, A++ केटेगरी के खूंखार आतंकी के नाम शामिल हैं. इनमें सब्जार अहमद भट्, अबू दुजाना, जुनैद मट्टू, अबू मुसैब, अजहर खान, सज्जाद लोन, मुज्जफर अहमद वानी, शौकत लौहार, बशीर लश्करी, अबू लल्हारी, अब्दुल क्यूम नाजर, यासिन इट्टू, परवेज अहमद वानी, उमर खालिद, तल्ला राशिद, मोहम्मद भाई, अबू जरगम, महमूद भाई आदि शामिल हैं.

इससे पिछले साल का 150 आतंकी मारे जाने का रिकॉर्ड भी टूट चुका है. लेकिन काम अभी भी बाकी है. भारतीय सेना की अपनी 285 आतंकियों की हिट लिस्ट में 200 को मार गिराया जा चुका है. आलम यह है कि इन संगठनों में अब कोई कमांडर बनने तक बनने से कतरा रहे हैं.

आतंकियों के अंदर दहशत

कश्मीर में आतंकियों के अंदर दहशत बनती जा रही है. खुद अरुण जेटली ने अभी कहा था कि जो भी आतंकियों का कमांडर बनेगा सबसे पहले वो ही मारा जाएगा. लेकिन फिर भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. पीओके में आतंकियों के लांच पैड से 150 आतंकी घुसपैठ करने कि फ़िराक में हैं. ऐसे में मोदी सरकार ने भी अब सेना को और मज़बूत करना शुरू कर दिया है. सेना को आधुनिक हथियार और बख्तर बंद गाड़ियां, और सेना, स्पेशल फाॅर्स, सीआरपीएफ, पुलिस सब मिलकर जॉइंट ऑपरेशन की खुली छूट.


सेना के ज़बरदस्त तेवर से पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों का भी मनोबल बढ़ा है, आतंकी वारदातों में कमी भी आई. खुद DGP ने अभी प्रेस कोंग्रेस में बताया था कि पत्थरबाज़ी में भी बड़ी गिरावट देखी गयी है. आतंकियों के खात्मे में मिल रही कामयाबी पिछले दस साल में एक बड़ा रिकॉर्ड है.

आपरेशन आल आउट ने आतंकियों और आतंकी संगठनों के बीच खौफ भी पैदा कर दिया है. कुछ आतंकी अपने माता- पिता की अपील पर वापस भी लौटे हैं. आतंकी संगठनों में युवाओं की भर्तियां कम हुईं हैं लेकिन यह पूरी तरह बंद नहीं हो सका है.

पहले से संगठनों में शामिल आतंकियों को कमांडर बनाना पड़ रहा है. 2018 में सुरक्षा बलों की हिट लिस्ट में जाकिर मूसा जैसे खतरनाक आतंकी निशाने पर हैं. इनका खात्मा भी लगभग तय है.

 


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