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ट्रम्प ने दिया भारतीय सेना को सबसे बड़ा तोहफा, भारत आयी अमेरिकी तोपें देखकर ठन्डे पड़े पाक के तेवर

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नई दिल्ली : पाकिस्तान सुधरने का नाम नहीं ले रहा है, उसकी करतूतों पर लगाम लगाने के लिए शान्ति के सब तरीके आजमा लिए गए लेकिन बात उसके भेजे में घुसी नहीं. ऐसे में अब भारत-पाक के बीच सम्बन्ध तनाव के चरम तक पहुंच चुके हैं. भारतीय सेना ने भी अपने हथियारों पर धार लगाना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में अब एक और अहम खबर सामने आ रही है.

बोफोर्स घोटाले के बाद पहली बार भारत आई नयी तोपें

बोफोर्स सौदे के बाद करीब 30 साल बाद पहली बार भारतीय सेना में नई तोपों को शामिल किया गया है. ये नई अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपें अमेरिका से भारत आयी हैं. पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण स्थिति में सेना के लिए यह अहम घटनाक्रम है.

1986 में कांग्रेस की सरकार के दौरान राजीव गांधी पर बोफोर्स तोपों की खरीद के सौदे में हुई दलाली के आरोप लगने से भारतीय राजनीति में इतना बड़ा विवाद खड़ा हो गया था कि नयी आधुनिक तोपें खरीदने में भारत को 3 दशक का वक़्त लग गया. मोदी सरकार आने के बाद पिछले साल 26 जून को पहली बार जानकारी दी गई कि भारत 145 अत्याधुनिक तोप खरीदेगा.

पिछले साल नवंबर महीने तक भारत और अमेरिका के बीच इसके लिए सौदा हो गया. भारतीय सेना की ताकत को कई गुना बढ़ाने के लिए सरकार ने 145 तोप खरीदने के लिए करार किया. अमेरिकी कंपनी बीएई सिस्टम को इन तोपों को बनाने का जिम्मा सौंपा गया. पिछले गुरुवार को अमेरिका से भारत आयी दो 155 एमएम/39 कैलिबर अल्ट्रा लाइट हॉविटजर्स तोपों का राजस्थान के पोखरण स्थित फायरिंग रेंज में परीक्षण किया जाएगा. 2020 तक सेना की 169 रेजिमेंट में 3503 तोपों को शामिल करने की योजना है.

पोखरण में किया जाएगा परीक्षण

अमेरिका से मिलने वाली तोपों के अलावा भारत में बनी अत्याधुनिक तोपों को भी इनमे शामिल किया जाएगा. जिन दो एम777 हॉविटजर्स तोपों का पोखरण में परीक्षण किया जाएगा, उनसे अलग-अलग तरह के आयुधों का इस्तेमाल करके देखा जाएगा. इन तोपों को इस तरह बनाया गया, जिससे ये भारतीय वातावरण में भारतीय आयुधों को बिना किसी समस्या के दाग सकें.


बता दें कि अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की सेनाएं काफी पहले से ही एम777 हॉविटजर्स तोपों का इस्तमाल कर रही हैं, यहाँ तक कि अमेरिकी सेना ने इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में भी इन्ही तोपों को तैनात किया हुआ है. कांग्रेस सरकार के निक्कम्मेपन के चलते सेना को नयी तोपें मिलने में इतने साल लग गए, यदि कांग्रेस इसके लिए कोई सौदा करती भी तो कोर्ट में भ्रष्टाचार और दलाली खाने का एक और मामला चल रहा होता.

अमेरिका से मिली दो एम777 हॉविटजर्स तोपों के बाद अगले साल सितंबर महीने में भारतीय सेना को तीन और ऐसी ही तोपें मिलेंगी. इसके बाद मार्च 2019 से लेकर जून 2021 तक हर महीने सेना को पांच नई तोपें मिलेंगी.

सेना को मिलने वाली ये तोपें 24 किलोमीटर से 40 किलोमीटर तक के दायरे में दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने में सक्षम होंगी. शुरूआती 25 तोपों को असेम्ब्लेड ही खरीद कर सीधे भारतीय सेना में शामिल किया जाएगा. इसके बाद की 120 तोपों को भारत में महिंद्रा डिफेंस द्वारा असेंबल करके सेना को दिया जाएगा. एम-777 हॉविटजर्स तोपों का डिजाइन बेहद आधुनिक है, जिसके चलते ये बेहद संकरे और पहाड़ी रास्तों पर भी जा सकती हैं. इसलिए पाकिस्तान और चीन से सटी भारतीय सीमा के लिए ये तोपें काफी उपयोगी होंगी.

हेलीकॉप्टर्स खरीद के लिए भी हुआ सौदा

सबसे ख़ास बात ये है कि एम-777 हॉविटजर्स तोपों को वजन पुरानी तोपों के मुकाबले काफी काम है, इसलिए वजन उठा सकने वाले चिनूक हेलीकॉप्टर्स से इन तोपों को हवाई रास्ते द्वारा तेजी से युद्ध के मोर्चे पर पहुंचाया जा सकता है. इसके लिए भारत ने अमेरिका से C130J सुपर हर्कुलिस चिनूक हेलीकॉप्टर्स को खरीदने के लिए सौदा भी कर लिया है. चिनूक हेलीकॉप्टर एक बार में दो हॉविटजर्स तोपों को आसानी से उठाकर युद्ध के मोर्चे तक पहुंचा सकता है.

मोदी सरकार आने से पहले भारतीय सेना की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सेना के पास नयी तोपें तक नहीं थी. मोदी सरकार आने के बाद पीएम मोदी के अथक प्रयासों से अब धीरे-धीरे कोंग्रेसियों द्वारा खोदे गए पुराने गड्ढे भरे जा रहे हैं.


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